UP Nikay Chunav: पहले चरण में कम मतदान से अलर्ट हुई BJP, MP-MLA को जारी किया निर्देश

उत्तर प्रदेश में दूसरे चरण के मतदान को लेकर बीजेपी ने नई रणनीति बनाई है। नेताओं की माने तो सभी सांसदों एवं विधायकों को कहा गया है कि मतदान के दिन ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों को घरों से बाहर निकालने का प्रयास करें।

बीजेपी

Bhartiya Janta Party: उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों के पहले चरण में कम मतदान प्रतिशत ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व को चिंता में डाल दिया है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि कम मतदान प्रतिशत उम्मीदवारों और मतदाताओं के बीच बढ़ती दूरी को संकेत करते हैं। बीजेपी कार्यालय में हाल ही में सम्पन्न हुई एक बैठक में वरिष्ठ नेतृत्व ने पार्टी कार्यकर्ताओं, सांसदों और विधायकों दोनों और पार्टी पदाधिकारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि दूसरे चरण के मतदान में बड़ी संख्या में लोग अपने मताधिकार का उपयोग करें।

शहरी इलाकों में कम मतदान को लेकर बीजेपी चिंतित

पहले चरण में मतदान का पैटर्न पहले की तरह ही रहा। शहरी क्षेत्रों की बजाए ग्रामीण इलाकों में भारी मतदान हुआ। लखनऊ की ही बात करें तो लखनऊ नगर निगम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में 39.67 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया जबकि नगर पंचायत चुनावों में 64 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

दूसरे चरण के मतदान से पहले अहम बैठक

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि 4 मई को पहले चरण के मतदान वाले सभी 37 जिलों में पुराना पैटर्न ही सामने आ रहा है। यह भाजपा के लिए चिंता का विषय है। इसलिए अगले चरण के चुनाव में भाजपा के पक्ष में मतदान प्रतिशत में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए बैठक बुलाई थी।

जनता से कनेक्ट नहीं हो पा रहे उम्मीदवार

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि नगरपालिका वार्ड चुनावों में कम मतदान प्रतिशत उम्मीदवार और मतदाताओं के बीच संबंध की कमी को दर्शाता है। छोटे चुनावों का व्यक्तिगत प्रभाव भी होता है। लोगों का वोट न डालना यह दर्शाता है कि निकाय चुनाव लड़ने वाले नवोदित राजनेता मतदाताओं से जुड़ने में विफल रहे हैं।

चुनाव कार्यक्रम को लेकर जताई चिंता

कुछ नेताओं ने चुनाव कार्यक्रम को लेकर भी चिंता जताई है। नेता ने कहा, "चुनावों को कभी भी रविवार या त्योहार जैसी छुट्टियों के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए क्योंकि जब एक से अधिक छुट्टियां होती हैं तो लोग वोट डालने के अपने लोकतांत्रिक कर्तव्य को निभाने के बजाय आनंद लेने के लिए बाहर जाने का विकल्प चुनते हैं।

अवकाश के दिन मतदान नहीं होना चाहिए

पहले चरण का चुनाव 4 मई को हुआ था और अगले दिन बुद्ध पूर्णिमा का अवकाश था। इसके बाद शनिवार और रविवार का दिन रहा। उन्होंने कहा, "चार दिनों का अवकाश होने पर लोग घरों से बाहर जाना चाहते हैं अपने परिवार के साथ। खासतौर से ऐसा शहरों में देखने को मिलता है। इसलिए इसका सीधा असर चुनाव पर भी पड़ता है।"

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