UP Madrasa Act: गोरखपुर के अल्पसंख्यक समाज के लोगों की SC के फैसले पर कुछ ऐसी रही प्रतिक्रिया
UP Madrasa Act News In Hindi Gorakhpur Uttar Pradesh: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा अधिनियम को संवैधानिक करार देते हुए हाइकोर्ट के निर्णय को खारिज कर दिया है। इस पर वन इंडिया हिंदी रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने गोरखपुर के मदरसा संचालक व अल्पसंख्यक समाज के लोगों से खास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने खुलकर अपने विचार रखे।
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गोरखपुर के गीता वाटिका शाहपुर स्थित घोषीपुरवा मदरसे के शिक्षक वली मोहम्मद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं । इससे पूरे प्रदेश में स्थित मदरसे में पढ़ने वाले छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी।

घोषीपुरवा के रहने वाले हाजी कमरुद्दीन कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। मदरसे चलने चाहिए। हम खुद अपने मोहल्ले में चंदा इकठ्ठा कर मदरसों के संचालन में सहयोग करते है। इसमें गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा दी जाती है।
हाजी अब्दुल मजीद कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हम सभी खुश हैं। मदरसों के लिए यह बहुत फायदेमंद है। मदरसे 1976 से ही चल रहे हैं। लगभग 50 साल होने जा रहे हैं। मदरसे में गरीब बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के साथ ही हम उन्हें भोजन व अन्य सामग्रियां भी उपलब्ध करते हैं। जिससे गरीब बच्चों का भला होता है।
सोहराब अली कहते हैं कि यह सुप्रीम कोर्ट का अच्छा निर्णय है जो स्वागत के योग्य है। इससे बच्चों का भविष्य बेहतर होगा।
सद्दाम हुसैन कहते हैं कि हम सभी इस फैसले का स्वागत करते हैं यह मुस्लिम समाज के हित में लिया गया अच्छा निर्णय है।
मोहम्मद सैफ आलम कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने अच्छा फैसला सुनाया है। मदरसे गरीब बच्चों का भविष्य बनाते है। ऐसे में मैं बार बार कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूं।












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