UP News: 2024 चुनाव से पहले लव जिहाद-धर्म परिवर्तन के खिलाफ अभियान को तेज करेगा RSS
RSS Chief Mohan Bhagwat: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की पांच दिवसीय बैठक आज समाप्त हो जाएगी। सूत्रों की माने तो बैठक में तय हुआ है कि लव जिहाद और धर्म परिवर्तन के खिलाफ अपने अभियान को और तेज करेगा। इसके लिए खासतौर से महिलाओं, दलितों और पिछड़ों के बीच इसको लेकर सम्पर्क अभियान चलाने पर सहमति बनी है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की लखनऊ में चल रही अवध प्रांत की बैठकों के बाद यह बात सामने आई है। संगठनात्मक उद्देश्यों के लिए, आरएसएस ने उत्तर प्रदेश को छह भागों में विभाजित किया है जिसमें ब्रज, मेरठ (दोनों पश्चिम यूपी), कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, गोरखपुर और काशी (वाराणसी) शामिल है।
युवाओं को जोड़ने का अभियान चलेगा
सूत्रों की माने तो बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि संघ वैचारिक रूप से इच्छुक युवाओं को अपने साथ जोड़ने के अभियान में तेजी लाएगा। आने वाले महीनों में यह प्रक्रिया गति पकड़ेगी। यह कदम दो कारणों से विशेष महत्व रखता है, खासतौर से ऐसे समय में 2024 के लोकसभा चुनाव काफी नजदीक हैं।
लव जिहाद और धर्म परिवर्तन के खिलाफ तेज होगा अभियान
युवाओं को संघ की विचारधारा और कार्यप्रणाली से परिचित कराने के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर या कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, आरएसएस कैडर संकेत दिया। भागवत की मौजूदगी में हुई चर्चा की जानकारी रखने वाले एक आरएसएस नेता ने कहा, "देश विरोधी गतिविधियों, लव जिहाद और प्रलोभन के माध्यम से धर्म परिवर्तन पर जोर देने के अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में संघ के संपर्क अभियान को तेज करने का निर्णय लिया गया है।"
गुमराह युवाओं के लिए चलेगा अभियान
धर्म परिवर्तन और लव जिहाद लंबे समय से संघ के एजेंडे में रहे हैं, लेकिन 2017 से इसे और बढ़ावा मिला है, जब केंद्र और उत्तर प्रदेश में "डबल इंजन" भाजपा सरकारें सत्ता में हैं। संघ नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान मुसलमानों के खिलाफ नहीं, बल्कि "गुमराह युवाओं" के खिलाफ चलाया जा रहा है।
महिलाओं की भागीदारी पर जोर देगा संघ
संघ नेताओं के मुताबिक संघ और उसके सभी 36 सहयोगी संगठन महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान देंगे, खासकर आरएसएस विचार के केंद्र में विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने में। महिला आरक्षण विधेयक हाल ही में संसद के दोनों सदनों में पारित हुआ है। भाजपा ने इस ऐतिहासिक फैसले को आरएसएस के पूर्व प्रचारक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आया फैसला बताया है।
सामाजिक सद्भाव को लेकर काम कर रहा है संघ
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, "अगर किसी राष्ट्र में सामाजिक सद्भाव की कमी है तो वह कमजोर हो जाता है और यही कारण है कि आरएसएस इस संबंध में काम कर रहा है। संघ का हमेशा यह विचार रहा है कि मंदिर, श्मशान और कुएं सभी के लिए समान होने चाहिए।"












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