UP News: अखिलेश से हो गया RLD का मोहभंग? जयंत ने क्यों कहा- 'चावल खाना है तो खीर ही खाओ'
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर गरमाहट आई है। जयंत चौधरी के एक ट्विट के बाद अब राजनीतिक विश्लेषक सपा और रालोद के बीच संबंधों की समीक्षा करने में जुटे हैं।
RLD Chief Jayant Chaudhary: समाजवादी पार्टी (samajwadi Party) के मुखिया अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) एक तरफ बिहार के सीएम नीतीश के साथ मिलकर गैरबीजेपी गठबंधन का ताना बाना बुनने में लगे हैं इधर उनकी अपने ही सहयोगी और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के चीफ जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) अलग ही रंग में नजर आ रहे हैं। जयंत के दो ट्विट काफी चर्चा में और इसको अखिलेश-जयंत के गठबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है।
जयंत के ट्विट से गरमायी राजनीति
दरअसल रालोद के मुखिया जयंत चौधरी ने गुरुवार को दो ट्विट किए। पहले ट्विट में जयंत ने लिखा, 'खिचड़ी, पुलाव, बिरयानी जो पसंद है खाओ!' इसके थोड़ी देर बाद ही जयंत ने दूसरा ट्विट करते हुए लिखा, ' वैसे चावल खाना ही है तो खीर ही खाओ। जयंत के इन बयानों के बाद से ही यूपी में सियासी तूफान खड़ा हो गया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान का गलत मतलब न निकालें
हालांकि रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने कहा कि जयंत चौधरी के बयानों का गलत मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। ये बयान उन्होंने किस परिपेक्ष्य में कहे हैं और उनके क्या मायने हैं ये तो वही बता सकते हैं लेकिन जहां तक बात सपा-रालोद के गठबंधन की हो रही है उससे इसका कोई लेना देना नहीं है।
लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है रालोद
राय ने कहा कि पार्टी का पहला लक्ष्य लोकसभा चुनाव की तैयारी करना है और पार्टी उसमें लगी है। जल्द ही पश्चिमी यूपी के एक दर्जन लोकसभा सीटों पर पार्टी की बूथ कमेटियों का गठन हो जाएगा। पार्टी की कोशिश है कि लोकसभा चुनाव में इतना वोट प्रतिशत हासिल किया जाए जिससे रालोद की पुरानी साख यानी क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा दोबारा हासिल किया जा सके।
हरेंद्र मलिक का कद बढ़ने से नाराज हैं जयंत
इधर, रालोद में मौजूद सूत्र बताते हैं कि जयंत चौधरी अखिलेश यादव के रुख से काफी नाराज हैं। उन्होंने उसी हरेंद्र मलिक को राष्ट्रीय महासचिव बना दिया जो ताउम्र चौधरी साहब को हराने का काम करते रहे। हरेंद्र मलिक का कद बढ़ाते समय अखिलेश ने जयंत के साथ अपने संबंधों का खयाल नहीं रखा। हरेंद्र मलिक को पश्चिम में जाट राजनीति में बड़ा नाम माना जाता है। वह चार बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं।
क्या रालोद को सात लोकसभा सीटें देंगे अखिलेश
रालोद के सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव की सपा से आरएलडी का मोहभंग होने की एक वजह और भी है। दरअसल रालोद पश्चिमी यूपी में एक दर्जन सीटों पर अपनी जोरदार तैयारी कर रही है। रालोद की कोशिश है कि कम से कम सात सीटों पर चुनाव लड़े। रालोद के सूत्रों के मुताबिक क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा दोबारा पाने के लिए रालोद को कम से कम चार लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करनी होगी।
बिरयानी और खीर के बहाने संदेश देने की कोशिश
आरएलडी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अखिलेश यादव ज्यादा से ज्यादा दो सीटें देने की ही मूड में हैं। जबकि पार्टी करीब सात सीटों पर अपनी तैयारी कर रही है। यदि समय रहते सपा ने यह डिमांड पूरी नहीं कि तो जयंत चौधरी एनडीए की तरफ जाने का भी विचार कर सकते हैं। इसलिए बिरयानी और खीर के बहाने की संदेश देने की काशिश की जा रही है।












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