Success Story: कभी फीस जमा करने के भी नही थे पैसे, आज करोड़ों के हैं मालिक, ऐसे बदली किस्मत
Success Story Of Dhirendra Yadav Kushinagar: कहते हैं समय और किस्मत कब किसकी बदल जाए यह कोेई नहीं जानता। हां इसे बदलने के लिए कड़ी मेहनत जरुर करनी पड़ती हैं। ऐसा ही कुछ है कुशीनगर के कसया क्षेत्र के माधोपुर गांव के रहने वाले धीरेन्द्र यादव की। इन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से पूरी किस्मत बदल डाली। धीरेन्द्र ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में अपने जीवन का पूरा संघर्ष बताया।
आर्थिक स्थिति बचपन से थी खराब
धीरेन्द्र कहते हैं कि घर की आर्थिक स्थिति बचपन से ही खराब थी। बाबा दूध बेचने का काम करते थे। जो घर का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त नहीं था। आर्थिक अभाव के कारण हर तरीके की समस्याओं का सामना करना पड़ा।

इंटर तक शिक्षा प्राप्त करते ही आ गई घर की जिम्मेदारी
धीरेन्द्र कहते हैं किसी तरह करते धरते मैंने इंटर तक की शिक्षा ग्रहण की । इंटर करने के ही दौरान घर की जरुरतों छोटे भाई की शिक्षा के लिए मैंने नौकरी की तलाश शुरु कर दी। पिता जी बचपन में ही गुजर गए थे। बाबा दूध बेचने का काम करते थे।
स्कूल की फीस जमा करने के नहीं थे पैसे
धीरेन्द्र कहते हैं कि जब मैं पढ़ाई कर रहा था तो अधिकांश ऐसा होता था कि मैं समय से फीस नहीं भर पाता था।
कार चलाने को भी थे तैयार
धीरेन्द्र कहते हैं कि आर्थिक अभाव इस कदर था कि मैं कार चलाने के लिए भी तैयार था। अखबारों में एड देखता था कि कही नौकरी मिल जाए।
गांव के सज्यजीत मिश्रा ने दिया प्लेटफार्म
इस खराब समय में मुझे साथ मिला गांव के रहने वाले सत्यजीत मिश्रा का। जो उस समय एमबीए थे और बतौर बैंक मैनेजर कार्यरत थे। उन्होंने मुझे इश्योरेंस में काम के लिए प्रेरित किया।

खुद के पास से पैसे लगा भरा मेरा फार्म
धीरेन्द्र कहते हैं कि जब सत्यजीत सर ने मुझे काम के लिए आफर किया उस समय फार्म भरने तक के मेरे पास पैसे नहीं थे। सर का बड़प्पन था कि उन्होंने मुझे नौकरी देने के साथ की फार्म भरने के पैसे भी अपने पास से दिए। मैं जीवन भर उनका एहसानमंद रहूंगा।
मुकाम हासिल होने लगा
धीरेन्द्र कहते हैं कि वर्ष 2005 से एडवाइजर के काम को मेहनत और लगन के बल पर करने की वजह से जल्दी ही उसे मुकाम हासिल होने लगा। वर्ष 2009-10, वर्ष 2010-11 और वर्ष 2011-12 में एमडीआरटी (मिलेनियम डॉलर राउंड टेबल) को क्वालीफाई कर गोरखपुर ब्रांच का नाम रोशन किया। वर्ष 2013-14 में एचओएस क्लब (हेड ऑफ़ सेल्स क्लब), के तमगे से नवाजा गया। कंपनी ने इसके लिए मुझे वियतनाम में सम्मानित किया। वर्ष 2014-15 में सीडीओ क्लब (चीफ डिस्ट्रीब्यूशन क्लब) के सदस्य बने। मॉरीशस में सम्मानित किए गए। इसके साथ ही धीरेंद्र ने वह सारी बाधाएं पर कर लीं हैं, जिसे बीमा सेक्टर का चैलेन्ज माना जाता है।
अमेरिका में होंगे सम्मानित
धीरेन्द्र ने कहा कि मुझे कंपनी ने उन लोगों में चुना है जो पूरे विश्व में बेहतर काम करने में टॉप रैंकिंग रखते थे। मुझे जल्द ही अमेरिका में सम्मानित किया जाएगा।
लोगों से अपील
धीरेन्द्र कहते हैं कि परिस्थिति कितनी भी विपरीत क्यों न हो कभी किसी को हिम्मत नहीं हारनी नहीं चाहिए कड़ी मेहनत कर सफलता पाई जाती है। और अपनी विश्वसनीयता कभी नहीं खाेनी चाहिए।
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