UP News: जानिए क्या है यूपी की नई सर्विस पॉलिसी जिसका विरोध कर रहा PMSA
UP News: नए नियमों के साथ, डॉक्टरों को बिना किसी गलती के पदोन्नति में देरी का सामना करना पड़ेगा। इस नीति को लेकर चिकित्सकों ने अपनी चिंताओं से सरकार को अवगत करा दिया है। जल्द ही इसपर कोई फैसला लिया जा सकता है।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपी में नई पदान्नति नीति जारी की है जिसका काफी विरोध किया जा रहा है। डॉक्टरों की मांग है कि पुराने एवं पुराने सेवा नियमों को जारी रखा जाए और डॉक्टरों को उनकी उचित पदोन्नति दी जाए। हालांकि सरकार इस पर कब तक विचार करेगी यह कह पाना मुश्किल है लेकिन संगठन के लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक राज्य में लगभग 14,000 डॉक्टर हैं जो स्वीकृत पदों से लगभग 6,000 कम हैं।
डॉक्टरों ने नई सेवा नीति का किया विरोध
सरकारी डॉक्टरों ने बैठक कर नई सेवा नीति का पुरजोर विरोध किया है। संगठन का कहना है कि नई नीति में पदोन्नति के नियमों में बदलाव किया गया है जो स्वीकार्य नहीं है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ (पीएमएसए), लखनऊ शाखा के सचिव डॉ जितेंद्र तिवारी ने कहा, नए नियमों के साथ, डॉक्टरों को बिना किसी गलती के पदोन्नति में देरी का सामना करना पड़ेगा। पीएमएसए राज्य में सरकारी डॉक्टरों का एक निकाय है।
नई नीति में सरकार ने उठाया कड़ा कदम
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नई सेवा नीति में कहा गया है कि एक डॉक्टर को लेवल दो में पदोन्नति पाने के लिए लेवल एक पर चार साल और लेवल तीन में पदोन्नति पाने के लिए लेवल दो पर सात साल बिताने होंगे। यह स्तर एक से स्तर दो तक पदोन्नति में किसी भी संभावित देरी के बावजूद है। एक स्तर से दूसरे स्तर पर पदोन्नति के लिए सेवा के संचयी वर्षों की गणना नहीं की जाएगी।
संगठन ने लिया नई नीति का विरोध करने का फैसला
तिवारी ने कहा कि हमने हर स्तर पर नई नीति का विरोध करने का फैसला किया है। निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक में सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. आनंद ओझा, लखनऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज अग्रवाल सहित एसोसिएशन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।












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