Ground Report: जानिए आखिर कैसे 'मिशन खिलखिलाहट' ने बदली इन कुपोषित बच्चों की जिंदगी? खिलेंगे और चेहरे

Gorakhpur News Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में इन दिनों कुपोषित बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालने के लिए एक खास योजना 'मिशन खिलखिलाहट' चलाई जा रही है। यह योजना सीडीओ संजय कुमार मीणा की पहल पर चलाई जा रही है। जिसमे डीपीओ डॉक्टर अभिनव कुमार मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों का भी सहयोग मिल रहा है। वन इंडिया टीम के रिपोर्टर पुनीत श्रीवास्तव ने सीडीओ,डीपीओ सहित इस अभियान से कुपोषण से बाहर निकल चुके कुछ बच्चियों के परिजनों से भी बातचीत की।

कुपोषण से बाहर निकालकर बेहतर जीवन प्रदान करना है उद्देश्य

गोरखपुर के मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार मीणा ने मिशन खिलखिलाहट के बारे में बताया कि इस अभियान की शुरुआत करने का उद्देश्य कुपोषित बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालकर बेहतर जीवन प्रदान करना हैं। इसमें बच्चों के लिए पोषाहार तो उपलब्ध ही कराए जाते हैं लेकिन कभी कभी बच्चों को इससे निकलने में ज्यादा समय लग जाता हैं। इनके अभिभावक उन खाद्य सामग्रियों को बच्चों के लिए उपलब्ध नहीं करा पाते हैं। ऐसे में उन बच्चों को ज्यादा फोकस किया गया है जिनके परिजनों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।

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संभ्रांत लोग भी इससे जुड़ रहे हैं

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    उन्होंने बताया कि इस मिशन में हमारे साथ साथ कई अधिकारियों ने बच्चों को गोद लिया है और अपने श्रोत से उन्हें कुपोषण से बाहर निकालने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही संभ्रांत लोग भी इससे जुड़ रहे हैं।

    150 से अधिक बच्चों को कुपोषण मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है
    सीडीओ ने बताया कि यह मिशन पिछले छह सात महीने से चल रहा है। जिसमें अब तक 30 से अधिक बच्चे कुपोषण से बाहर निकल चुके हैं। हम लोग इसका फेज 2 लांच करने जा रहे हैं। जिसमे 150 से अधिक बच्चों को कुपोषण मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

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    बेहतरीन पहल है

    जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर अभिनव कुमार मिश्रा ने कहा कि मिशन खिलखिलाहट सीडीओ सर के नेतृत्व में चलाई जा रही एक बेहतरीन पहल है जो बच्चों को कुपोषण से निकालने का काम कर रही है। मैने भी इस अभियान के तहत बच्ची को गोद लिया था जो अब पूरी तरह कुपोषण से बाहर निकल चुकी है। मैं महीने में दो से तीन बार इस बच्ची से मिलता था और कुपोषण से बाहर निकलने के लिए जो खाद्य पदार्थ जरूरी थे उसे उपलब्ध कराता था। साथ ही समय समय पर चिकित्सकीय जांच भी होती थी।

    कुपोषण के खिलाफ यह अभियान एक जंग है
    डीपीओ ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ यह अभियान एक जंग है। इसमें हम अधिकारियों को जोड़ने के साथ ही संभ्रांत लोगों को जोड़ने का काम भी कर रहे हैं। हमे इसमें सफलता भी मिली है।

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    आज बेटी कुपोषण से बाहर निकल चुकी है

    न्यू गंडक कॉलोनी में रहने वाले कुछ कुपोषित बच्चे जिन्हे सीडीओ और डीपीओ से गोद लिया था अब पूरी तरह से कुपोषण से बाहर निकल चुके हैं। सीडीओ संजय कुमार मीणा ने एक बच्ची आध्या को गोद लिया था। उसकी मां दीपमाला ने बताया कि बच्ची 6 महीने पहले कुपोषण का शिकार थी। सीडीओ साहब ने इसे गोद लिया और समय समय पर हर चीज उपलब्ध कराते रहे। खाने का विशेष ध्यान रखा गया। आज बेटी कुपोषण से बाहर निकल चुकी है।

    इस अभियान ने मेरी पूरी जिंदगी बदलकर रख दी है
    डीपीओ ने जिस बच्ची परी को गोद लिया था उसकी मां सीबू ने बताया कि आज डीपीओ सर की वजह से मेरी बच्ची पूरी तरह कुपोषण से बाहर निकल चुकी है। वो पिछले कई महीनों से यहां आते और पोषण सामग्रियां उपलब्ध कराते थे। इसके साथ इलाज का भी ध्यान रखते थे। आज इस अभियान ने मेरी पूरी जिंदगी बदलकर रख दी है।

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