UP News: संभल के पांच प्राचीन धार्मिक स्थलों का होगा जीर्णोद्धार, जानिए DM की क्या है योजना
UP News: उत्तर प्रदेश के संभल जिला प्रशासन ने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए हाल ही में अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान फिर से खोजे गए पांच धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार की योजना बनाई है।
जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पेंसिया ने गुरुवार को इन स्थलों को बहाल करने और उनकी धार्मिक, ऐतिहासिक तथा पर्यटन महत्व को बढ़ाने के लिए ठोस प्रयासों की घोषणा की।

पुनर्जीवित किए जाएंगे ये धार्मिक स्थल
डीएम के अनुसार बहाल किए जाने वाले पांच स्थल चतुर्मुख कुंड, अशोक कुंड, चतुर्सागर, एकांत तीर्थ और शंख माधव को पुनर्जीवित किया जाएगा। इन स्थलों का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। जहां प्राचीन समय में स्नान, पूजा और धार्मिक अनुष्ठान हुआ करते थे।
मनरेगा और सरकारी योजनाओं का होगा उपयोग
डॉ. पेंसिया ने बताया कि इन स्थलों के जीर्णोद्धार के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम और ग्राम निधि के धन का उपयोग किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में इन स्थलों की बहाली के लिए सरकारी योजनाओं और नगरपालिका फंड का सहारा लिया जाएगा।
विशेष रूप से एकांत तीर्थ तालाब को मनरेगा के तहत पुनर्जीवित किया जाएगा। जबकि चतुर्मुख कुएं और अशोक कुंड पर सुधार कार्य पहले ही शुरू हो चुके हैं। बाकी स्थानों पर जीर्णोद्धार कार्य आने वाले महीनों में शुरू किया जाएगा।
सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में बड़ा कदम
इन प्रयासों का उद्देश्य संभल को पर्यटन केंद्र में बदलना है। जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलें और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण हो सके। डीएम पेंसिया ने कहा कि इन धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण संभल को एक नई पहचान देगा और देश-विदेश से पर्यटकों को आकर्षित करेगा।
अतिक्रमण विरोधी अभियान से हुई थी खोज
इन स्थलों की फिर से खोज जिला प्रशासन द्वारा दिसंबर में चलाए गए अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हुई। यह अभियान 24 नवंबर को शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के दौरान हुई हिंसा के बाद शुरू किया गया था। उस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे।
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इन धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार के साथ जिला प्रशासन का उद्देश्य संभल को धार्मिक पर्यटन के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनाना है। इन प्रयासों के माध्यम से संभल की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करते हुए क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
संभल के ये प्राचीन स्थल न केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक हैं। बल्कि यह शहर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण भी हैं। जिला प्रशासन की यह पहल पर्यटन को बढ़ावा देने और संभल को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।












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