Lok Sabha Chunav 2024: यूपी की बाकी 12 सीटों में से बीजेपी ने 7 पर घोषित किए नाम, 5 पर क्यों फंसा पेच?

UP Lok Sabha Chunav 2024: अगर तीसरी बार भी बीजेपी केंद्र में सरकार बनाना चाहती है तो उसका रास्ता फिर से उत्तर प्रदेश से ही होकर गुजरेगा। राज्य में लोकसभा की 80 सीटें हैं, लेकिन पार्टी 12 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित करने में देरी हो रही थी। लेकिन, बुधवार को उनमें से 7 सीटों पर उम्मीदवार घोषित कर दिए गए हैं, जिनमें से हाई-प्रोफाइल मैनपुरी सीट भी शामिल है।

भाजपा की ओर से उत्तर प्रदेश में जिन 12 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा में देरी हो रही थी, उनमें रायबरेली और मैनपुरी के अलावा गाजीपुर, बलिया, मछलीशहर, फिरोजाबाद, कैसरगंज, इलाहाबाद, देवरिया, भदोही, फूलपुर और कौशांबी शामिल थीं। लेकिन, अब रायबरेली, कैसरगंज,भदोही,फिरोजाबाद और देवरिया छोड़कर पार्टी ने सभी सीटों पर उम्मीदवारों के नाम जारी कर दिए हैं।

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नाम घोषित होने में देरी की अलग-अलग रही वजह
भारतीय जनता पार्टी में इन सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर जो उलझन रही, उसकी अलग-अलग वजहें हैं। मसलन, रायबरेली में पार्टी कांग्रेस की ओर से नाम घोषित होने का अभी भी इंतजार कर रही है। क्योंकि, यहां देखना है कि कांग्रेस गांधी परिवार के ही किसी सदस्य पर फिर से दांव लगाती है या फिर कोई दूसरा विकल्प तलाशती है।

कई सीटों पर जातीय समीकरण बनी सबसे बड़ी उलझन
लेकिन, अन्य सीटों पर जातीय समीकरण ज्यादा मायने रख रहे हैं। कुछ सीटों पर पार्टी नए उम्मीदवारों की तलाश में है तो यह भी तसल्ली कर लेना चाहती है कि इससे उसके प्रदर्शन पर कोई विपरीत असर न पड़े। इसलिए, फिर से सिर्फ 7 सीटों पर ही ऐलान कर पायी है।

वाराणसी से सटी पूर्वांचल की सीटों पर भी घोषित हो गए नाम
भाजपा ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट वाराणसी से सटी तीन सीटों बलिया, गाजीपुर और मछलीशहर से भी प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने बलिया से नीरज शेखर, गाजीपुर से पारसनाथ राय और मछलीशहर से बीपी सरोज को उतारा है।

मैनपुरी में योगी के मंत्री पर जताया भरोसा
इसी तरह मैनपुरी में समाजवादी पार्टी ने मौजूदा सांसद और पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को फिर से उतारा है। भाजपा को एक ऐसे नाम की तलाश थी, जो जातीय गुना गणित में फिट बैठे और उन्हें टक्कर देने लायक माकूल चेहरा भी हो। इसके लिए पार्टी के गलियारों में दो नामों की चर्चा हो रही थी।

एक तो बदायूं की मौजूदा सांसद संघमित्रा मौर्य का नाम था। वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक कार्यक्रम में मंच पर रो भी चुकी हैं। कहा जा रहा है कि बदायूं से टिकट कटने की वजह से वह भावुक हो गई थीं। दूसरा नाम जयवीर सिंह का था, जो योगी सरकार में मंत्री हैं। पार्टी ने इन्हें ही टिकट थमाया है।

यहां जातीयों में समीकरण बिठाने की हुई कोशिश
पूर्वांचल की दो महत्वपूर्ण सीटें गाजीपुर और बलिया वाराणसी से सटी हुई हैं। माफिया मुख्तार अंसारी की मौत की वजह से गाजीपुर का चुनाव इस बार काफी घमासान होने वाला है। समाजवादी पार्टी ने यहां से पहले ही उसके भाई अफजाल अंसारी को टिकट दे रखा है।

बीजेपी इन दोनों सीटों पर ठाकुर या भूमिहार उम्मीदवार उतारने को लेकर माथापच्ची में जुटी थी। बलिया से ठाकुर को टिकट दिया है तो गाजीपुर से भूमिहार प्रत्याशी पर फिर से दांव लगाया है।

इसी तरह से इलाहाबाद से नीरज त्रिपाठी, कौशांबी से विनोद सोनकर, फूलपुर से प्रवीण पटेल को टिकट देकर जातीय गुना गणित साधने की कोशिश की है।

कैसरगंज में अभी नहीं सुलझा पेच
लेकिन, कैसरगंज से पार्टी अभी भी कोई नाम नहीं तय कर पाई है। यहां से कुश्ती संघ के पूर्व प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह सांसद हैं। पार्टी चाहती है कि उनकी जगह इस बार उनके परिवार के ही किसी सदस्य को टिकट दिया जाए।

क्योंकि, हरियाणा की कुछ महिला पहलवानों ने उनके खिलाफ जो शिकायत की थी, उसकी वजह से भाजपा वहां कोई चुनावी नुकसान नहीं चाहती। राज्य की 10 लोकसभा सीटों में से 8 पर जाटों का अच्छा प्रभाव है।

लेकिन, जानकारी के मुताबिक बृजभूषण सिंह इतनी आसानी से अपनी सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। पार्टी की दिक्कत ये है कि वे अपनी सीट के अलावा आसपास की अन्य सीटों पर भी अपना प्रभाव रखते हैं। इसी तरह से देवरिया, फिरोजाबाद और भदोही में भी नामों की घोषणा नहीं हो पाई है।

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