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रामपुर लोकसभा उपचुनाव: आजम के करीबी पर दांव लगाकर भगवा लहराने की कोशिश में BJP ?

लखनऊ, 7 जून: उत्तर प्रदेश में रामपुर और आजमगढ़ में लोकसभा का उपचुनाव 23 जून को होना है। आजमगढ़ और रामपुर दोनों ही अपने अपने लिहाज से इस उपचुनाव में काफी मायने रखते हैं। बीजेपी ने रामपुर में आजम खान के करीबी नेता पर दांव खेला है। घनश्याम लोधी आजम खान के करीबी रहे हैं। वह विधानसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी में शामिल हो गए थे। एक तरह से कहें तो इन दोनों जगहों पर उपचुनाव को लेकर जमकर घमासान मचा हुआ है। इन दोनों सीटों पर 23 जून को वोटिंग है, जबकि 26 जून को नतीजे आएंगे।

बीजेपी

आजम खां के करीबी दोस्तों के बीच रामपुर में मुकाबला

रामपुर उपचुनाव का नतीजा समाजवादी पार्टी में आजम खान के कद और स्थिति का नतीजा साबित होगा। ऐसे में अखिलेश यादव के सामने आजम खान की पार्टी में नंबर-2 की स्थिति बनाए रखने की चुनौती होगी। रामपुर की रणभूमि में बीजेपी ने आजम खान के करीबी नेता पर दांव खेला है. घनश्याम लोधी आजम खान के करीबी रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी में शामिल हो गए थे। घनश्याम दो बार एमएलसी भी रह चुके हैं। वहीं आजम खान ने तमाम मंथन और मंथन के बाद जिस नाम का ऐलान किया है, वह है आसिम राज। समाजवादी पार्टी के नगर अध्यक्ष आसिम राजा आजम खान बेहद खास माने जाते हैं।

रामपुर में आजम की प्रतिष्ठा दांव पर?

करीब दो साल बाद जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने जिस तरह का रवैया दिखाया है। इसके पीछे की वजह पार्टी से नाराजगी थी। यह नाराजगी तब और बढ़ गई जब खबर आई कि रामपुर में प्रत्याशी के नाम को लेकर आजम खान और सपा आलाकमान के बीच सहमति नहीं बन रही है। इसमें कोई शक नहीं लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि आजम खां की मर्जी के बिना रामपुर में किसी को भी उतारा जा सकता है. इसलिए तंजीन फातिमा से लेकर तमाम नाम चर्चाओं में बने रहे।

आजम के करीबी आसिम राजा पर सपा का दांव

अब जब आजम खान के करीबी आसिम राजा को उतारा गया है तो जाहिर सी बात है कि जीत का श्रेय और हार की जिम्मेदारी भी आजम खान के हिस्से में ही आएगी। इसलिए अखिलेश यादव को रामपुर की ज्यादा चिंता नहीं होगी. लेकिन सियासी गलियारों में यह चर्चा शुरू हो चुकी है कि देखना होगा कि अखिलेश यादव रामपुर में कितनी रैलियां और जनसभाएं करेंगे. चुनाव प्रचार से पता चलेगा कि आजम और अखिलेश कितने करीब आ गए हैं? क्या आंतरिक क्लेश खत्म हो गया है?

2 सीटों पर उपचुनाव और 3 'मुख्यमंत्रियों' को टेंशन!

इस उपचुनाव में कांग्रेस ने दोनों सीटों से किनारा कर लिया है। बसपा ने इस दंगल को थोड़ा दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ जहां बसपा ने आजम खान के रामपुर में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है, वहीं दूसरी तरफ आजमगढ़ में मुस्लिम उम्मीदवार गुड्डू जमाली को मैदान में उतारकर समाजवादी पार्टी के एमवाय समीकरण को बिगाड़ने के लिए बहुत पहले बोर्ड लगा दिया गया है।

योगी के कामकाज और अखिलेश के साख का इम्तिहान

उपचुनाव के इस दंगे में मौजूदा मुख्यमंत्री सीएम योगी के सामने सरकार के कामकाज का सवाल है तो वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के लिए गढ़ बचाने की चुनौती है। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती किसी उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारती हैं, लेकिन आजमगढ़ की लड़ाई में कूदकर उन्हें भी बसपा की ताकत का एहसास करना होगा।

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