UP Electricity Crisis: रायबरेली के अस्पतालों में मरीजों की शामत, वाराणसी में सड़कों पर उतरी जनता
उत्तर प्रदेश में कई इलाके बिजली कटौती के कारण संकट का सामना कर रहे हैं। बिजली विभाग के लाखों कर्मचारियों की हड़ताल के कारण अंधेरे में डूबे इलाकों से लोगों का आक्रोश भी सामने आया है। कई जिलों में संकट गंभीर है।

UP Electricity Crisis के कारण सुर्खियों में है। पावर की कमी के कारण कई इलाकों में घंटों से अंधेरा छाया है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार Raebareli में Hospitals बिजली की कमी के कारण मरीजों का इलाज प्रभावित हुआ है। औद्योगिक नगर कानपुर और पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी कई इलाकों की बत्ती गुल है। आक्रोश में कई जगहों पर लोग सड़कों पर हैं। जानिए कितना गंभीर है संकट
बिजली विभाग के कर्मचारियों की राज्यव्यापी हड़ताल रविवार को तीसरे दिन भी जारी रही। स्ट्राइक इसलिए भी चिंताजनक बन गई क्योंकि कर्मचारी संघ ने उनके नेताओं के खिलाफ दर्ज मामले रद्द न करने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी। संघ ने कहा कि अगर कर्मचारियों को बर्खास्त या गिरफ्तार किया गया, तो सांकेतिक स्ट्राइक अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदल जाएगी।
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हड़ताल के कारण बिजली संकट पर इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के रायबरेली में कम से कम 1,000 गांव अंधेरे में डूब गए। शहरी क्षेत्र के 70 इलाकों में बेरोकटोक बिजली संकट जारी है। लोगों के पास पीने का पानी नहीं है। रायबरेली में बिजली की अनुपलब्धता के कारण स्वास्थ्य सेवाएं भी बुरी तरह बाधित हुई है। एम्स और अन्य अस्पतालों में बिना बिजली के मरीज काफी परेशान हैं। हालांकि, जनरेटर के माध्यम से संकट को हल करने के लिए रुक-रुक कर प्रयास किए गए। 54 में से 27 बिजलीघरों में 33 किलोवॉट-एम्पीयर (केवीए) लाइनों में खराबी आ गई है। इस कारण प्रशासन के सामने चुनौती खड़ी हो गई है।
वाराणसी में चक्का जाम
बिजली विभाग के कर्मचारियों की लगातार हड़ताल और लंबे समय तक बिजली कटौती को लेकर वाराणसी की आक्रोशित जनता सड़कों पर उतर आई। प्रदर्शनकारियों ने शहर के भदैनी विद्युत सब स्टेशन पर चक्का जाम भी किया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार देवरिया के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट गौरव श्रीवास्तव ने बताया, "जिम वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड ने अनुबंध के आधार पर काम कर रहे 42 कर्मचारियों को हड़ताल वापस लेने के लिए लिखा है।"
योगी-आदित्यनाथ सरकार ने कहा है कि अगर हड़ताल से जनता को परेशानी होती है, तो वह आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) के तहत विरोध करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी और काम पर नहीं लौटने वाले संविदा कर्मियों को बर्खास्त करने की धमकी दी है। सख्त रूख दिखा रही सरकार ने यह भी कहा कि प्रदर्शनों के दौरान तोड़फोड़ होने की स्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई शुरू की जाएगी।
बता दें कि बिजली विभाग के कर्मचारियों की यूनियन विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले एकत्र हुए कर्मचारी राज्य भर में प्रदर्शन कर रहे हैं।












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