यूपी चुनाव 2022 में योगी और मोदी दोनों ब्रांड की होगी परीक्षा, रिजल्ट देगा भाजपा के भविष्य के संकेत
लखनऊ, 20 दिसंबर। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारी कर रही भाजपा ने प्रचार अभियानों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा को टक्कर देने के लिए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव प्रदेशभर में विजय रथयात्रा लेकर प्रचार कर रहे हैं और छोटे दलों के साथ गठबंधन कर रहे हैं। कांग्रेस की प्रियंका गांधी ने इस बार महिला और किसानों के वोटबैंक को साधने पर पूरा जोर लगा दिया है। बहुजन समाज पार्टी की मायावती बिना शोर किए चुनावी तैयारी कर रही हैं। इन सबके बीच सत्ताधारी भाजपा सबसे ज्यादा प्रचार मोड में दिख रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तो प्रचार अभियान चला ही रहे हैं लेकिन उनसे भी एक कदम आगे बढ़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव अभियान में जुटे दिख रहे हैं। यही नहीं भाजपा ने पार्टी की सरकार वाले प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को भी यूपी चुनाव के मैदान में उतार दिया है। पार्टी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में यह चुनाव लड़ती दिख रही है। प्रधानमंत्री लगातार यूपी में योजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और रैलियां कर रहे हैं। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भव्य उद्घाटन का उत्सव भी प्रधानमंत्री पर ही फोकस रहा और इस आयोजन में सीएम योगी बहुत कम दिखे। आखिर भाजपा यूपी चुनाव 2022 के लिए इतनी ताकत क्यों झोंक रही है। इसके पीछे क्या वजहें हैं?

लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी में जुटी भाजपा
यूपी चुनाव 2022 में अगर भाजपा की हार होती है तो इसका सीधा असर लोकसभा चुनाव 2024 पर हो सकता है। इससे विपक्षियों के हौसले बुलंद हो जाएंगे और भाजपा के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा। हार से सीएम योगी आदित्यनाथ और पीएम नरेंद्र मोदी की छवि को भी धक्का लग सकता है। यूपी में भाजपा की कामयाबी ही भविष्य के अच्छे संकेत दे सकती है। 2017 में यूपी में प्रचंड बहुमत से जीती भाजपा ने वह चुनाव पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही लड़ा था। मोदी लहर में 300 से ज्यादा सीटों पर जीती भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया। अपने कार्यकाल में सीएम योगी ने माफियाओं और अपराधियों को कंट्रोल करने की अपनी छवि बनाई है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास, प्रयागराज में कुंभ के आयोजन और जगहों के नाम बदलने के फैसलों से सीएम योगी ने हिंदुत्व के एजेंडे को भी आगे बढ़ाया है। वे कोरोना कंट्रोल के साथ ही यूपी में रोजगार और विकास के भी वे दावे कर रहे हैं। हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण के लिए भाजपा सीएम योगी को देशभर में चुनाव प्रचार के लिए भेजती रही है और यही उनका ब्रांड भी है। वहीं गुजरात मॉडल से विकास पुरुष की छवि बनाकर देश की राजनीति में केंद्र में भाजपा को दो बार बहुमत दिलाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भव्य उद्घाटन कर हिंदू हृदय सम्राट की छवि बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पीएम मोदी गुजरात मॉडल के बाद हिंदुत्व की एक नई छवि पेश कर रहे हैं जिसमें विकास और धर्म दोनों का मेल है। यूपी चुनाव में योगी और मोदी ब्रांड की परीक्षा होगी।

योगी ब्रांड के ऊपर मोदी ब्रांड की होगी परख
भाजपा यूपी चुनाव में सीएम योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर 'सोच ईमानदार, काम दमदार' नारे के साथ उतरी है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों के माध्यम से 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' नारे को भी आजमा रही है। राम मंदिर का भव्य शिलान्यास कार्यक्रम, केदारनाथ में आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण और अब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भव्य उद्घाटन, इन सबके जरिए मोदी हिंदुत्व के अगुआ के तौर पर अपनी उस छवि को गढ़ रहे हैं जिसमें वो विकास को भी जोड़ते हैं। वहीं, सीएम योगी कट्टर हिंदुत्व की छवि के तौर पर पहचाने जाते हैं। पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि यूपी प्लस योगी, बहुत है उपयोगी। कहा जाता है कि केंद्र की सत्ता तक का रास्ता यूपी से होकर जाता है। मोदी हिंदुत्व और विकास को जोड़कर अपना ब्रांड बना रहे हैं उसके लिए यूपी चुनाव 2022 पहली प्रयोगशाला है। इसके बाद साल 2024 में लोकसभा चुनाव होगा जिसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी से तैयारी में लग गए हैं। इस तरह से यूपी चुनाव में इस बार मोदी और योगी दोनों ब्रांड की परख होगी।

क्या सपा की तैयारियों से भाजपा को है खतरा?
2017 के चुनाव में भाजपा ने यूपी में छोटे दलों के साथ गठबंधन बनाया था जिसने पूर्वांचल में पार्टी को काफी सीटें जिताने में मदद की थी। 2022 के यूपी चुनाव में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी छोटे दलों के साथ समीकरण बनाया है। सीएम योगी की सरकार भले ही कह रही हो कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में ऐसी कई रिपोर्टें आईं जिससे पता चलता है कि जमीनी स्तर पर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर व्यवस्था नहीं कर पाई थी। अखिलेश यादव लगातार योगी सरकार के विकास के कामों पर निशाना साधते रहे हैं। अखिलेश यह बताते रहे हैं कि सपा और बसपा काल में किए गए कामों का ही फीता भाजपा काट रही है। ब्राह्मण वोटबैंक भी भाजपा से नाराज बताया जा रहा है। मुस्लिमों का ध्रुवीकरण सपा की तरफ हो सकता है। विरोधी दलों के नेता सीएम योगी पर आरोप लगाते हैं कि उन्होंने सिर्फ ठाकुरों का भला किया है। यूपी की जातिगत समीकरणों को देखते हुए भाजपा इतनी आश्वस्त नहीं दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस बड़े पैमाने पर यूपी में रैलियां, उद्घाटन और शिलान्यास कर रहे हैं, उससे लगता है कि भाजपा इस कोशिश में है कि यूपी चुनाव फिर से मोदी ब्रांड पर शिफ्ट कर दिया जाय ताकि एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से कम नुकसान हो।

केंद्र की भाजपा सरकार लड़ रही है यूपी का चुनाव!
यूपी चुनाव से पहले हो रहे लोकार्पण, उद्घाटन और शिलान्यास की रैलियों में केंद्र की मोदी सरकार का अमला दिख रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का भव्य उद्घाटन प्रधानमंत्री ने किया। गंगा एक्सप्रेसवे का शिलान्यास प्रधानमंत्री ने किया। मिर्जापुर में चार नेशनल हाईवे का लोकार्पण करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि योगी जी की सरकार को चुनिए, मैं यूपी की सड़कों के विकास के लिए 5 लाख करोड़ लाकर दूंगा जिससे यहां की सड़कें अमेरिका की तरह हो जाएंगी। वहीं सीएम योगी ने भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मुफ्त में सबको टीका दिया है, कुछ लोगों ने इसे मोदी और भाजपा का टीका कहा, जिन्होंने टीका का विरोध किया अब उनका विरोध जनता करेगी। यूपी चुनाव में केंद्र की भाजपा सरकार अपने काम भी गिनाने में लगी है और चुनावी मोड में आई जनता को मैसेज दे रही है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनेगी तो फिर केंद्र की भाजपा सरकार भी मदद देगी।












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