UP News: लव जिहाद पर यूपी की अदालत की सख्त टिप्पणी, कहा-'भारत की एकता और संप्रभुता के लिए खतरा'
UP News: उत्तर प्रदेश की एक स्थानीय अदालत ने लव जिहाद के मामलों को गंभीर जनसांख्यिकीय खतरा बताते हुए इस पर गहरी चिंता जताई है। फास्ट ट्रैक कोर्ट के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने 25 वर्षीय मोहम्मद आलिम को बलात्कार और पहचान धोखाधड़ी के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसी मामले में आलिम के 65 वर्षीय पिता को भी दो साल की सजा दी गई।
यह मामला एक 20 वर्षीय महिला से जुड़ा है। जो कंप्यूटर कोर्स कर रही थी। आरोपी आलिम ने खुद को आनंद बताकर महिला को धोखे में रखा। अदालत ने पाया कि आलिम ने मनोवैज्ञानिक दबाव विवाह के प्रलोभन और नौकरी का वादा कर महिला को प्रभावित किया। इस घटना को अदालत ने अवैध धर्मांतरण और धोखाधड़ी का संगीन उदाहरण बताया।

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अवैध धर्मांतरण और पहचान धोखाधड़ी भारत की जनसांख्यिकी के लिए खतरा बन रहे हैं। इसके अलावा न्यायालय ने विदेशी फंडिंग की संभावनाओं पर भी चिंता व्यक्त की। जो धर्मांतरण से संबंधित मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
फैसले में अवैध धार्मिक रूपांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि यह कानून ऐसे अवैध रूपांतरणों का मुकाबला करने के लिए बना है। संविधान में दिए गए धर्म का पालन और प्रचार करने के अधिकार का सम्मान करते हुए अदालत ने कहा कि किसी भी प्रकार के जबरन रूपांतरण को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
अपने फैसले में अदालत ने मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि वे इस फैसले की प्रतियां प्राप्त करें और इस पर ध्यान दें। साथ ही अदालत ने चेतावनी दी कि अगर इन मुद्दों का समाधान नहीं किया गया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अदालत ने पाकिस्तान और बांग्लादेश में हुए जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से भारत में संभावित खतरों की तुलना की। यह फैसला देश की एकता और संप्रभुता की सुरक्षा के लिए जनसांख्यिकीय हेरफेर के खिलाफ सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करता है।












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