'बुलडोजर संस्कृति न्यायपालिका के मुताबिक नहीं, इसे रोका जाए': यूपी कांग्रेस अध्यक्ष
कांग्रेस नेता अजय राय ने उत्तर प्रदेश में 'बुलडोजर संस्कृति' की आलोचना करते हुए कहा कि यह न्यायिक व्यवस्था के विपरीत है और इसे रोका जाना चाहिए। उनकी यह टिप्पणी अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच बुलडोजर के इस्तेमाल को लेकर तीखी नोकझोंक के बाद आई है, जो आदित्यनाथ के अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का प्रतीक बन गया है।
इसी हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर का उपयोग करके अपराधियों के घरों को ध्वस्त करने की निंदा की थी। राय ने कानूनी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करने की वकालत करते हुए अदालत के रुख की प्रशंसा की। राय ने पीटीआई वीडियो से कहा, 'हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं और कोई भी निर्णय न्यायपालिका के अनुसार होना चाहिए, ताकि लोगों को न्याय मिल सके। न्यायपालिका में बुलडोजर के लिए कोई जगह नहीं है।'

बुलडोजर जस्टिस पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी जस्टिस बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की ओर से एक सुनवाई के दौरान आई। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी का घर सिर्फ इसलिए कैसे गिराया जा सकता है, क्योंकि उस पर कोई अपराध करने का आरोप है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि दोषियों के घर भी बिना कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए नहीं गिराए जा सकते।
बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का समर्थन किया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि पूरे भारत में उचित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश स्थापित किए जाएंगे। इस कदम का उद्देश्य मनमाने ढंग से होने वाले विध्वंस को रोकना और कानूनी मानकों को बनाए रखना है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
अखिलेश यादव ने मंगलवार को घोषणा की कि अगर 2027 में उनकी समाजवादी पार्टी की सरकार बनी तो उत्तर प्रदेश के सभी बुलडोजर सीएम आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर की ओर चलाए जाएंगे। इस बयान नेबुलडोजर के इस्तेमाल को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।
इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि हर कोई बुलडोजर चलाने में सक्षम नहीं है। उन्होंने कहा, 'हर किसी के हाथ बुलडोजर चलाने में सक्षम नहीं होते। इसके लिए 'दिल और दिमाग' दोनों की जरूरत होती है।'












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