UP: भविष्य के लिए जमीन तैयार कर रही BJP, MLC की 6 सीटों पर अपनाया "सबका साथ,सबका विकास" का फार्मूला

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो बीजेपी एएमयू कुलपति को एमएलसी बनाने का दांव खेलकर भविष्य की राजनीतिक जमीन तैयार कर रही है। बीजेपी अब दिखाना चाहती है कि उसका सबका साथ सबका विकास का फार्मूला वाकई सही है।

बीजेपी

Bhartiya Janta Party Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में बीजेपी का अब हर कदम 2024 के लिहाज से ही उठ रहा है। कुछ दिनों पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने अपनी नई टीम का ऐलान किया था जिसे 2024 के समीकरण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। ठीक इसी तरह अब सरकार ने 6 नॉमिनेटेड सीटों पर नाम तय कर हर समीकरण साधने का प्रयास किया है। इस लिस्ट में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति तारिक मंसूर को भी जगह मिली है वहीं दूसरी ओर श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पीएम मोदी के करीबियों में शामिल रहे नृपेंद्र मिश्रा के बेटे को साकेत मिश्रा को भी स्थान दिया गया है।

मुस्लिम समुदाय के बीच संदेश देने का प्रयास

बीजेपी के एक नेता ने बताया कि सरकार के साथ-साथ सत्तारूढ़ भाजपा के सूत्रों ने कहा कि सूची राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को उनकी मंजूरी के लिए भेजी गई थी जिसे राजभवन ने मंजूरी प्रदान कर दी है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है और दुनिया भर में जाना जाता है। एएमयू वी-सी के नाम की सिफारिश करके, सरकार ने मुस्लिम समुदाय में बुद्धिजीवी वर्ग के बीच एक सकारात्मक संदेश भेजने की कोशिश की है।"

एएमयू से लंबे समय से जुड़े रहे हैं तारिक मंसूर

दरअसल, 66 वर्षीय मंसूर 2017 में एएमयू के वीसी बने थे। वह कई वर्षों से विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि मंसूर का नाम पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तय किया गया था, जबकि अन्य पांच के नाम राज्य इकाई द्वारा प्रस्तावित किए गए थे। राजनीतिक विश्लेषक मनीष हिन्दवी का दावा है कि बीजेपी इस तरह का दांव खेलकर वह अपने लिए भविष्य की जमीन तैयार कर रही है। आने वाले दिनों में इस तरह के चौंकाने वाले फैसले देखने को मिल सकते हैं।

निकाय चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवारों टिकट देना चाहती है बीजेपी

उन्होंने कहा, 'भाजपा भविष्य के चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देना चाहती है। लेकिन अतीत में यह देखा गया है कि मुस्लिम उम्मीदवार को अपने समुदाय के मतदाताओं से पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता है और हार जाते हैं। खासकर एएमयू जैसे संस्थानों से मुसलमानों को नामांकित कर पार्टी यह समझाने की कोशिश कर रही है कि बीजेपी 'सबका साथ-सबका विकास' के नारे के साथ उनका समर्थन मांगने के लिए गंभीर है और उन्हें विधानसभा में प्रतिनिधित्व देना चाहती है. पार्टी भविष्य के लिए जमीन तैयार कर रही है।'

मोदी के करीबी नृपेंद्र मिश्रा के बेटे को मिली जगह

साकेत मिश्रा एक बैंकर हैं और उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल विकास बोर्ड में सलाहकार हैं। आईआईएम-कलकत्ता के पूर्व छात्र, मिश्रा पिछले चार से पांच वर्षों से पूर्वी यूपी के श्रावस्ती में भाजपा के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। वह 2019 में श्रावस्ती से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे।लेकिन बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया और दद्दन मिश्रा को मैदान में उतारा था। वह बसपा के राम शिरोमणि से हार गए। उनके पिता नृपेंद्र मिश्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव के रूप में कार्य किया। वर्तमान में नृपेंद्र मिश्रा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भारत सरकार द्वारा स्थापित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं।

दलित और राजभर समुदाय को साधने का प्रयास

प्रमुख दलित नेता और सामाजिक कार्यकर्ता लालजी प्रसाद निर्मल अंबेडकर महासभा ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। वह यूपी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष भी हैं। माहेश्वरी कासगंज जिले से ताल्लुक रखते हैं और उन्होंने दो कार्यकाल के लिए भाजपा की ब्रज क्षेत्रीय इकाई के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। पिछले हफ्ते उनकी जगह ध्रुवविजय सिंह शाक्य ने ली थी। वहीं दूसरी ओर ओबीसी नेता हंसराज विश्वकर्मा भाजपा की वाराणसी जिला इकाई के अध्यक्ष हैं। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया था।

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