UP: 2024 लोकसभा चुनाव से पहले सपा को सता रहा मुस्लिम वोट बैंक खिसकने का डर?
Samajwadi Party के मुखिया अखिलेश यादव की पार्टी कर्नाटक के नतीजों से अंदरखाने काफी चिंतित हैं क्योंकि उनको अब इस बात का डर सता रहा है कि कहीं कर्नाटक की तरह कहीं मुस्लिम वाेट 2024 में कांग्रेस के पास न चला जाए।

Samajwadi Party in UP: उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के मुखिया अखिलेश यादव मिशन 2024 की तैयारी में जुटे हैं। सपा के सूत्रों की माने तो कर्नाटक के चुनाव में सपा को मिली जीत ने सपा के भीतर डर पैदा कर दिया है कि कहीं 2024 के चुनाव में मुस्लिम मतदाता कांग्रेस का रुख न कर लें? यदि ऐसा हुआ तो सपा को भारी नुकसान हो सकता है।
कर्नाटक की जीत ने बढ़ाई सपा की चिंता
कर्नाटक राज्य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की भारी जीत ने समाजवादी पार्टी के लिए एक चुनौती पेश की है। मुसलमानों द्वारा कांग्रेस को दिए गए वोटों ने जनता दल (सेक्युलर) का सफाया कर दिया, जिसने 22 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, लेकिन वे सभी हार गए। सपा के सूत्रों ने बताया कि पार्टी इस बात की आशंका से ड़री हुई है कि इसका प्रभाव 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है मुस्लिम वोट बैंक कांग्रेस की ओर रुख कर सकता है।
नतीजों के बाद से ही कांग्रेस के खिलाफ नरम हो गए सपा के सुर
कर्नाटक राज्य विधानसभा के नतीजों के बाद, समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के खिलाफ अपनी बयानबाजी कम कर दी है। इससे पहले, अखिलेश यादव कांग्रेस से उन क्षेत्रीय दलों का समर्थन करने के लिए कह रहे थे जहां वे भाजपा को चुनौती देने की स्थिति में हों। अखिलेश ने यह भी कहा था कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव में अपनी भूमिका तय करे कि वह भाजपा के खिलाफ चुनावी जंग में सपा का साथ देना चाहती है या नहीं।

12 जून को पटना की बैठक में शामिल होंगे अखिलेश
दरअसल, लोकसभा चुनाव 2024 से ठीक पहले बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता को दिशा देने के लिए 12 जून को एक बैठक बुलाई है। यह बैठक पटना में आयोजित होगी और इस बैठक में देशभर के विपक्षी दलों के नेताओं के जुटने की उम्मीद जताई जा रही हैं। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के भी इस बैठक में शामिल होने की बात सामने आई है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 12 जून को पटना में आयोजित होने वाली इस बैठक में हिस्सा लेंगे।
दलित-ओबीसी आरक्षण को मुद्दा बनाएगी सपा
हालांकि सपा के नेताओं का दावा है कि यूपी विधान परिषद की दो सीटों पर सोमवार को आए उपचुनाव के नतीजों से पार्टी उत्साहित है। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि,
समाजवादी पार्टी को पता था कि उसके पास संख्या की कमी है और वह चुनाव नहीं जीत सकती है, फिर भी हमने एससी और ओबीसी समुदाय से उम्मीदवारों को उतारने का काम किया। यूपी की सरकार में दलित और ओबीसी को राज्य सेवाओं में आरक्षण के उनके अधिकार से वंचित किया गया है। हम इस संदेश को आने वाले महीनों में राज्य के हर नुक्कड़ पर ले जाएंगे।
MLC चुनाव में एकजुट रहा गठबंधन
सपा सूत्रों ने कहा कि भाजपा द्वारा किए गए कई प्रयासों के बाद भी सपा अैर आरएलडी को तोड़ने में नाकाम साबित हुए। सपा-रालोद गठबंधन के पास 118 विधायक हैं। दो विधायक जेल में थे और एक अस्पताल में भर्ती होने के कारण वोट नहीं डाल सका। सपा के एक उम्मीदवार को 115 और दूसरे को 116 वोट मिले थे।












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