यूपी पुलिस को सिखाया जा रहा, कैसे करें लड़कियों को छेड़ने वालों की पहचान
पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग के जरिए सिखिया जाएगा कि ये कैसे सुनिश्चित करें कि किसी को बेवजह परेशान ना किया जाए।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा और विवादों में रहे एंटी रोमियो अभियान को फिर से पटरी पर लाने के लिए इस बार प्रदेश पुलिस खास प्लान बना रही है। अब इस अभियान से जुड़े पुलिसकर्मियों को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी।


मोरल पुलिसिंग रोकने की कोशिश
एंटी रोमियो से जुड़े पुलिसकर्मियों के सार्वजनिक जगहों पर लड़के-लड़कियों को परेशान करने और उनक बेइज्जती करने की खबरें आने के बाद अब पुलिस को रोमियो पहचानने की ट्रेनिंग दी जा रही है। जिससे वो बेवजह किसी को परेशान ना करें और सिर्फ उन्हीं को पकड़े, जो किसी लड़की का पीठा कर रहा हो।

प्रेजेंटेशन से बचाई जाएंगी गलतियां
पुलिसकर्मियों को प्रेंजेटेशन के जरिए सिखिया जाएगा कि कैसे ये सुनिश्चित करें कि किसी को बेवजह परेशान ना किया जाए। अभियान के वीडियो दिखाकर ये भी बताया जाएगा कि पहले कहां गलतियां हुईं और उन्हें सुधारा जाए।

हमने गलतियां की, सुधार की जरूरत
ट्रेनिंग करने वालीं वूमेन पावरलाइन की डिप्टी एसपी बबिता सिंह ने माना कि एंटी रोमियो दस्ते ने वो काम किए जो उसे नहीं करने चाहिए थे और इसलिए उसकी आलोचना भी हुई। लखनऊ में वूमेन पावरलाइन के दफ्तर में यह ट्रेनिंग हो रही है, जिसके इंचार्ज आईजी नवनीत सिकेरा हैं।

क्यों फेल हुआ एंटी रोमियो अभियान
भाजपा की सरकार बनने के बाद एंटी रोमियो दस्ते ने सार्वजनिक जगहों पर छापेमारी कर रोमियो पकड़ने की बात कही। इस अभियान में पुलिस ने जहां भी लड़का-लड़की साथ दिखे उन्हें पकड़ लिया और अपनी वाहवाही के लिए उनके वीडियो भी बनाकर सोशल मीडिया पर जारी कर दिए। यहां तक कि बाई-बहन, दोस्त या पति-पत्नी भी कहीं बैठे दिखे को उनकी एक ना सुनी गई और बेइज्जती की गई। ऐसी वजहों से ये अभियान पटरी से उतर गया और इसकी खूब आलोचना भी हुई।












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