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27 साल पहले की वह घटना, जिसने सीएम योगी आदित्यनाथ को बनाया यूपी के माफियाओं का दुश्मन

लखनऊ, 31 दिसंबर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा योगी सरकार के माफियाओं और अपराधी सरगनाओं के खिलाफ की गई कार्रवाई को बड़ा मुद्दा बना चुकी है। योगी आदित्यनाथ को भी अपनी यह छवि खूब पसंद आती है। तथ्य भी है कि प्रदेश में बीते पांच वर्षों में कई माफिया सरगनाओं की संपत्ति पर सरेआम बुल्डोजर चलाए गए हैं। उनकी ओर से जमीनों पर किए गए अवैध कब्जे हटवाकर वहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की नींव पड़ी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुख्यमंत्री के बोल्ड फैसलों को सार्वजनिक रूप से सराहना करते रहे हैं। लेकिन, कम लोग जानते हैं कि योगी आदित्यनाथ ने खुद को माफिया का दुश्मन कैसे बना लिया? आखिर इसकी शुरुआत कहां और कैसे हुई ?

योगी आदित्यनाथ की छवि माफिया विरोधी बनी है

योगी आदित्यनाथ की छवि माफिया विरोधी बनी है

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस भी जनसभा में जाते हैं, वह प्रदेश में अपनी सरकार के दौरान माफियाओं के खिलाफ हो रही कार्रवाई का जिक्र बड़े ही दिलचस्प अंदाज में करते हैं। वह बताते हैं कि कैसे उनके कार्यकाल में बेलगाम माफियाओं की संपत्ति कुर्क करके उसे गरीबों या सरकार की योजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कैसे सभी तरह के अपराधियों और माफिया सरगनाओं के ठिकानों पर डुगडगी बज रही है, कैसे बुल्डोजर चलाए जा रहे हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करके उन्होंने प्रदेश की जनता में अपनी छवि माफियाओं के दुश्मन की तरह बनाई है। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा है, 'सभी अपराधियों को पता है कि अगर वे किसी चीज पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा करेंगे, तो उन्हें बुल्डोजरों का सामना करना पड़ेगा।' उन्होंने ये भी बताया है कि उनके इस मिशन की शुरुआत कब और कहां से हुई थी।

माफिया समाज का दुश्मन है- योगी आदित्यनाथ

माफिया समाज का दुश्मन है- योगी आदित्यनाथ

कई सर्वे में यह बात सामने आई है कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ सख्ती से आम जनता में एक सकारात्मक संदेश गया है। लेकिन, मुख्यमंत्री के विरोधी उनपर यह आरोप लगाने से नहीं हिचकते कि यह कार्रवाई चुनिंदा तौर पर की जाती है। इस सवाल के जवाब में सीएम योगी ने कहा है, 'माफिया, माफिया है। इसे जाति, समुदाय या धर्म के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। माफिया समाज का दुश्मन है और यह कोरोना वायरस से भी खराब हैं।'

मेरठ के सोतीगंज में अवैध काराबोर पर ब्रेक

मेरठ के सोतीगंज में अवैध काराबोर पर ब्रेक

माफियाओं के मुद्दे के बीच ही योगी आदित्यनाथ की सख्त प्रशासनिक शैली की फेहरिस्त में एक और नाम जुड़ गया है। यह है पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ का सोतीगंज, जो चोरी के कारों को खपाने (कारब्रेकिंग) और चोरी के स्पेयर पार्ट्स के लिए हाल तक पूरे देश में कुख्यात था। योगी सरकार में पुलिस ने यहां के अवैध कारोबार पर ऐसा डंडा चलाया है कि स्पेयर पार्टस के अवैध धंधे में लगे लोगों में से आज किसी ने चिकन बेचना शुरू कर दिया है तो कोई जूते और कपड़ों की दुकानें खोले बैठा है। मेरठ के सोतीगंज में कई दशकों से ज्यादातर अवैध कारोबार ही चल रहा था। यहां की कई बड़ी दुकानें 12 दिसंबर से बंद पड़ी हैं और उसके मालिक या तो पुलिस की नजरों से भागे फिर रहे हैं या फिर जेल पहुंचाए जा चुके हैं।

पीएम मोदी ने भी की है सीएम योगी की सराहना

पीएम मोदी ने भी की है सीएम योगी की सराहना

मेरठ के सोतीगंज में यूपी पुलिस ने जिस तरह से बड़े पैमाने पर चल रहे स्पेयर पार्ट्स के अवैध कारोबार को रोका है, उसकी सराहाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में एक जनसभा में कहा है, 'सोतीगंज बंद है।' उन्होंने शाहजहांपुर में कहा था, "देशभर में कहीं भी गाड़ी की चोरी हो, वो कटने के लिए, गलत इस्तेमाल के लिए मेरठ के सोतीगंज ही आती थी........जो चोरियों की गाड़ियों के कटाई के आका थे, उनपर कार्रवाई की पहले की सरकारों को हिम्मत ही नहीं होती थी। ये काम भी अब दमदार योगीजी की सरकार और स्थानीय प्रशासन ने किया है। अब सोतीगंज का यह कालाबाजारी वाला बाजार बंद कर दिया गया है।"

27 साल पहले सीएम योगी के साथ क्या हुआ था ?

27 साल पहले सीएम योगी के साथ क्या हुआ था ?

अंग्रेजी अखबार ने जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल किया कि जब वे गोरखपुर के गोरक्ष पीठ के उत्तराधिकारी नियुक्त किए गए थे, तब वहां अपराध का बोलबाला था। फिर उन्होंने उतनी कम उम्र में माफियाओं और अपराधियों को कैसे हैंडल किया, क्या उन्होंने कोई ट्रेनिंग ली थी? इसपर सीएम योगी बोले कि 1994-95 का समय था। तब गोरखपुर में दो जाना-माना परिवार था, जिनकी दो बड़ी हवेलियां थीं। राज्य सरकार ने दोनों हवेलियों को माफिया को आवंटित कर दिया था। परिवार ने दोनों हवेलियां गिरा दीं। मुख्यमंत्री बोले- 'मैं परिवार से इमारतें गिरा दिए जाने के एक दिन बाद मिला और पूछा कि क्या हुआ था। वह व्यक्ति बोला कि अगर वह बिल्डिंगों को नहीं गिराता तो वह सबकुछ गंवा देता, लेकिन अब वह कम से कम जमीन तो बचा सकता है।' लेकिन, माफियाओं की गुंडागर्दी का यह अकेले वाक्या नहीं था।

'जब माफिया ने मेरे चेहरे पर कुछ पेपर लहराए....'

'जब माफिया ने मेरे चेहरे पर कुछ पेपर लहराए....'

सीएम योगी ने आगे बताया कि 'एक दूसरी घटना में गोरखपुर के एक अमीर व्यक्ति का फोन आया। उन्होंने कहा कि उनके घर पर एक मंत्री ने कब्जा कर लिया है। वहां पहुंचा तो देखा कि उनका सामाना बाहर फेंका जा रहा था। मैंने उनसे कहा कि मालिक ने यह बिल्डिंग नहीं बेची है, फिर कैसे कोई इसपर कब्जा कर सकता है। जनता देख रही थी, लेकिन कोई कुछ नहीं कर रहा था। जब माफिया ने मेरे चेहरे पर कुछ पेपर लहराए तो मैंने जनता से कहा कि इन्हें पीटो।' इन्हीं घटनाओं ने उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव ला दिया। उन्होंने कहा है, 'इस तरह की घटनाओं के चलते ही मुझे राजनीति में आना पड़ा। अब यूपी में कोई भी व्यक्ति इस तरह की गतिविधियों को अंजाम नहीं दे सकता। सभी अपराधियों को पता है कि अगर वे किसी चीज पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा करेंगे, तो उन्हें बुल्डोजरों का सामना करना पड़ेगा।'

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