आतंकियों के निशाने पर थी लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतें

लखनऊ की ऐतिहासिक इमारतें थी आतंकियों के निशाने पर, पूछताछ में आतंकियों ने किया खुलासा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ऐतिहासिक इमारतों पर आतंकियों का साया मंडराने लगा है। राजधानी की ऐतिहासिक इमारतों पर हमले की साजिश रच रहे दो संदिग्ध आतंकियों को यूपी पुलिस ने हिरासत में लिया है, जिन्होंने खुद इस बात को कबूल किया है कि वह पुराने लखनऊ में ऐतिहासिक इमारतों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। इन संदिग्ध आतंकियों ने विधानसभा का वीडियो भी बनाया है, यही नहीं इन लोगों ने सचिवालय के भीतर जाने की भी कोशिश की थी ताकि इसकी रेकी कर सके।

शिया संस्थान थे निशाने पर

शिया संस्थान थे निशाने पर

एंटी टेरर स्क्वॉड के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि ये संदिग्ध इन जगहों पर ब्लास्ट करके दहशत फैलाना चाहते थे। उन्होंने इन संदिग्ध आतंकियों से पूछताछ के बाद बताया कि दोनों ही इस समय एटीएस की हिरासत में हैं। सूत्रों के मुताबिक इन दोनों संदिग्ध आतंकियों ने इस बात का भी खुलासा किया है कि वह पश्चिमी यूपी में शियाओं के स्थानों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे।

हाल ही में पांच राज्यों ने किया था साझा ऑपरेशन

हाल ही में पांच राज्यों ने किया था साझा ऑपरेशन

आपको बता दें कि ये दोनों आतंकियों को हाल ही में पांच राज्यों की पुलिस द्वारा साझा ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तार किया है, जिसमें आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार और उत्तर प्रदेश की पुलिस शामिल थी। इनमें से एक संदिग्ध जिसका नाम उमर उर्फ निजाम है, उसे मुंबई एटीएस ने गिरफ्तार किया था। जानकारी के अनुसार उमर बिजनौर जाने की योजना बना रहा था, जहां वह अपने दो सहयोगियों से मुलाकात करने वाला था। इन दोनों ही संदिग्धों को लखनऊ के चीफ न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास पेश किया गया जहां पुलिस ने इन्हें अपनी हिरासत में ले लिया।

बम बनाने के लिए जमा कर रहे थे गनपाउडर

बम बनाने के लिए जमा कर रहे थे गनपाउडर

माना जा रहा है कि उमर ने इस बात का भी खुलासा किया है कि उनका ग्रुप गनपाउडर इकट्ठा कर रहा था जिससे कि वह आईईडी ब्लास्ट को अंजाम दे सके। इसके लिए इन लोगों ने बिजनौर के पटाखा बनाने वाली फैक्ट्री से संपर्क किया था, यही नहीं इन लोगों ने उसे 12500 रुपए एडवांस भी दे दिए थे। जांच एजेंसिया अब उस व्यक्ति की तलाश कर रही हैं जो इन लोगों को धमाके लिए वस्तुएं मुहैया कराने का काम करता था। एटीएस ने पटाखा फैक्ट्री के मालिक से पहले ही मुलाकात कर ली है और उसने इस बात का स्वीकार किया है कि उसने ऐसी डील की थी।

दहशत फैलाना चाहते थे

दहशत फैलाना चाहते थे

एटीएस के अधिकारी ने बताया कि इन संदिग्धों की योजना किसी बड़े धमाके की नहीं थी, बल्कि ये लोग छोटा धमाका करके लोगों में दहशत फैलाना चाहते थे, इन लोगों को बहुत बड़ी तैयारी नहीं कराई गई है, ये बस जो वस्तुएं इन्हें आसानी से मिल पा रही थी उसी के आधार पर ब्लास्ट की योजना बना रहे थे।

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