यहां भूतों की लगती है अदालत, जुर्म साबित होने पर मिलती है फांसी की सजा
यूपी के हरदोई में स्थित एक मजार पर कुछ तांत्रिक भूतों की अदालत लगाते हैं। इतना ही नहीं इन भूतों पर चालीस दिन की कार्यवाही के बाद फांसी तक की सजा दी जाती है।
हरदोई। आज के 21वीं सदी में जहां डाक्टर कृत्रिम अंगो के प्रत्यारोपण और सर्जरी से लाइलाज बीमारी को ठीक करने के दावे कर रहे है वहीं दूसरी तरफ आज भी लोग अंधविश्वास के मकड़जाल में फंसकर भूत-प्रेत, तांत्रिक, मजारों और बाबाओं के चक्कर में फंसकर अपनी मेहनत की कमाई लुटा रहे है। मानसिक रोगी या किसी भी मर्ज से पीड़ित महिलाएं या अन्य लोग डाक्टरों के पास न जाकर मजारो के मौलवियो और तांत्रिको के पास झाड़-फूंक से अपना इलाज करवाने पर ज्यादा विश्वास कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला यूपी के हरदोई जिले का है जहां पर आज भी तांत्रिक, तंत्र-विद्या की मदद से भूत और जिन्न उतारने का दावा करते हैं इसके एवज में इन तांत्रिको के द्वारा पीड़ित लोगों से प्रसाद के नाम पर पूजा के नाम पर जमके धनउगाही की जा रही है।

भूतों की लगाते हैं अदालत
हरदोई जिले में कोतवाली सिटी के टिलिया इलाके में सरकार और साबिर सरकार नाम की दो मजारें स्थित है। इन मजारों पर रात दिन भूत प्रेत उतारने के अंधविश्वास का नंगा खेल खेला जा रहा है। यहां अदालत की तरह इन मजारों के आकाओं की अदालत लगाकर शैतानो की पेशी की जाती है और फिर उनको चालीस दिन की कार्यवाही के बाद फांसी तक की सजा दी जाती है। यहां एक खम्बा जमीन पर गड़ा है। कहा जाता है कि इसको पकड़ते ही पीड़ित व्यक्ति पर शैतान का साया आ जाता है फिर शैतान का डांस और उपद्रव शुरू हो जाता है। पीड़ित व्यक्ति सरकार सरकार कहकर गालियां भी बकने लगता है। मजार के चारो तरफ दौड़ने लगता है झूमने लगता है।

बृहस्पतिवार के दिन आती है भारी भीड़
इस मजार में प्रवेश करते ही महिलाओं का बालों का लहराना, गर्दन को घुमाना एक अजीब सा माहौल पैदा कर देता है। सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और लोगों की भारी भीड़ इस मजार पर जमा होती है। तांत्रिक का एक भाई यहां पर झोलाछाप डॉक्टर का काम करता हैं क्योंकि नाचते-गाते पीड़ित महिला या व्यक्ति को जब चोट लग जाती है तो उससे इलाज के नाम पर भी धन उगाही की जाती है। इस मजार पर बृहस्पतिवार के दिन भारी भीड़ उमड़ती है। भूतों से पीड़ित लोगों में महिलाओं की संख्या अधिक देखी जाती है बुजुर्ग व्यक्ति भी भूतों से पीड़ित हो कर यहां इलाज कराने आते है। इन पीड़ित लोगों की आस्था मजारों के प्रति अटूट होती है चाहे जितना समझाने का प्रयास किया जाए वह अपना इलाज इन्हीं तांत्रिकों से और मजारों के दुआओं से कराना पसंद करते हैं।
आस्था या अंधविश्वास
तांत्रिक संतोष कुमार की माने तो यह मजार सैकड़ों वर्षो से यहां स्थित है। बाहर साबिर बाबा की और अंदर बड़े सरकार के नाम की मजार अतीत है। यहां आए रोगियों का बाबा पल भर में इलाज कर देते हैं इसिलिए लोग यहां आते हैं। एक वृद्धपीड़ित से जब मजार के बारे में पूछा गया तो उसने अपना अटूट विश्वास जाहिर कर सरकार बाबा की रहमत का बखान किया और उनको अपना वह अपने परिवार का रखवाला बताया। वहीं दूसरी तरफ मजार के पास दवाखाना खोले तांत्रिक के भाई प्रवीण कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यहां आने वाले ज्यादातर लोग मानसिक रोगी होते हैं।












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