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'जय श्रीराम का नारा दंगा कराने का लाइसेंस बना, योगी खुद', स्‍वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान पर मचा बवाल

यूपी के पूर्व मंत्री और अपनी जनता पार्टी के अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य अपने विवादित बयानों के कारण आए दिन सुर्खियों में बने रहते हैं। इस बार उन्‍होंने हिंदू धर्म से जुड़े धार्मिक नारों के इस्‍तेमाल के लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर बवाल मच गया है।

स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने मीडिया से बात करते हुए शनिवार को कहा कि "जय श्री राम" और "जय बजरंगबली" जैसे धार्मिक नारे अब दंगे भड़काने और नफरत फैलाने का लाइंसेंस बन गए हैं। इसके साथ ही उन्‍होंने इसके साथ ही उन्‍होंने सीएम योगी पर भी बड़ा आरोप लगाया।

Swami Prasad Maurya

स्‍वामी प्रसाद मार्य ने कहा, "भाजपा सरकार और उसके समर्थक इन नारों का उपयोग धार्मिक उन्माद फैलाने के लिए कर रहे हैं, और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। मौर्य ने कहा कि देश में धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले लोग समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं।"

स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, "धर्म की दुहाई देने वाले लोग अब आतंकवाद के रास्ते पर चल पड़े हैं। 'जय श्री राम' और 'जय बजरंगबली' के नारे अब दुकानों, घरों, ईदगाहों, मस्जिदों और मदरसों पर हमले का संकेत बन गए हैं। दुर्भाग्य से मुख्यमंत्री उनका साथ देते हैं। ऐसे अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार निर्दोष मुसलमानों के घरों पर बुलडोजर चलाती है।"

उन्होंने मुख्यमंत्री पर न्यायपालिका की भूमिका निभाने का आरोप लगाया। मौर्य ने कहा, "न्यायालय को जो काम करना चाहिए, वह मुख्यमंत्री खुद अपने हाथों में ले लेते हैं। निर्दोष लोगों के घरों, मदरसों और मस्जिदों पर बुलडोजर चलाया जाता है, जबकि असली गुंडे, माफिया और अपराधी खुलेआम घूमते हैं। मुख्यमंत्री की पसंद का कोई अपराधी हो तो उसके घर पर कभी बुलडोजर नहीं जाता।"

फतेहपुर की एक घटना का जिक्र करते हुए, मौर्य ने बताया कि कैसे एक भीड़ ने "जय श्री राम" और "जय बजरंगबली" के नारे लगाते हुए एक मकबरे को तोड़ दिया, लेकिन पुलिस ने मुसलमानों के खिलाफ मामला दर्ज किया और असली दोषियों को क्लीन चिट दे दी।

उन्होंने आगे कहा, "फतेहपुर में मकबरा तोड़ने वालों को खुला छोड़ दिया गया, लेकिन मुस्लिम समाज के निर्दोष लोगों पर कार्रवाई की गई। वहीं, अलीगढ़ में हिंदू समाज के चार युवकों ने मंदिरों में 'आई लव मोहम्मद' लिखकर सांप्रदायिक दंगा कराने की साजिश रची, जिसे पुलिस ने समय रहते बेनकाब किया। मैं अलीगढ़ के एसएसपी और पुलिस प्रशासन को इसके लिए धन्यवाद देता हूं।"

पूर्व मंत्री के अनुसार, इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि भाजपा सरकार संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन कर रही है। उन्होंने कहा, "भारतीय संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि धर्म, पंथ, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। लेकिन भाजपा सरकार भेदभाव रोकने के बजाय उसे बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री स्वयं एक विशेष धर्म के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई करते हैं, जो न केवल उनकी मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि संविधान की आत्मा के भी विपरीत है।"

मौर्य ने कहा कि योगी सरकार की नीतियों ने समाज में गहरी खाई पैदा कर दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता और पुलिस के संरक्षण में गुंडे, माफिया और सांप्रदायिक तत्व इतने निडर हो गए हैं कि वे खुलेआम नफरत फैला रहे हैं।

उन्होंने भाजपा पर 'धर्म और आस्था' को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि धार्मिक नारों के पीछे हिंसा, लूट और भेदभाव छिपा हुआ है। मौर्य ने दुख व्यक्त किया कि आज यदि कोई "जय श्री राम" या "जय बजरंगबली" का नारा लगाता है, तो लोग डर जाते हैं कि कहीं उसके बाद पत्थरबाजी या दंगा न हो जाए।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद शर्मनाक है और भगवान के नाम पर हिंसा करना न तो धर्म है और न ही भारतीय संस्कृति का हिस्सा। मौर्य ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री का रवैया न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर कर रहा है, जिससे राज्य में अराजकता फैल रही है।

उन्‍होंने कहा "अगर मुख्यमंत्री खुद पार्टी बन जाएं, अगर वे खुद न्याय और सज़ा तय करने लगें, तो कानून का शासन खत्म हो जाता है। यही कारण है कि आज दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज के घरों पर बुलडोजर चल रहा है, जबकि असली अपराधी सत्ता के संरक्षण में मस्त हैं।"

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