योगी सरकार के लिए गले की फांस बना मुन्ना बजरंगी का ट्रांसफर आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने खड़ा किया सवाल
देश की सर्वोच्च अदालत ने ट्रांसफर आदेश पर सवाल खड़ा करते हुए बजरंगी को अगले आदेशों तक दोबारा झांसी जेल में भेजने के आदेश दिये हैं।
मिर्जापुर। प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद जेलों में निरुद्ध संगीन मामलों के आरोपितों बाहुबलियों को दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर किया गया। अब तक तो राजनैतिक दल इस पर सवाल उठा रहे थे लेकिन पिछले दिनों माफिया प्रेम प्रकाश उर्फ मुन्ना बजरंगी का मामला प्रदेश शासन के लिए गले की फांस बना हुआ है।

क्या है पूरा मामला
देश की सर्वोच्च अदालत ने इस पर सवाल खड़ा करते हुए बजरंगी को अगले आदेशों तक दोबारा झांसी जेल में भेजने के आदेश दिये हैं। आदेश का अनुपालन न होते देख बजरंगी के अधिवक्ता ने सोमवार को डीजी जेल को इसकी प्रति दोबारा सौंपी है। साथ ही अनुरोध किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराया जाये। प्रदेश शासन के सामने अब आगे कुआं पीछे खाई सरीखी स्थिति है क्योंकि वह किसी सूरत में नहीं चाहेगी कि किसी बाहुबली के बारे में जारी आदेश से पीछे हटा जाए।

सरकार नहीं चाहेगी सुप्रीम कोर्ट की अवमानना हो
सुप्रीम कोर्ट से आदेश भले एक की खातिर हुआ है, लेकिन इसे नजीर बनाते हुए दूसरी याचिका दायर हो सकती है। लिहाजा जेल प्रशासन इसके कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर राय ले रहा है। अनुपालन न कराने पर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का मामला चल सकता है। किसी भी दशा में सुप्रीम कोर्ट की अवमानना हो यह सरकार नहीं चाहेगी। दरअसल मामला सपा शासन काल से जुड़ा है जब मुन्ना बजरंगी को सुल्तानपुर जेल से झांसी भेजा गया था। बजरंगी ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। जिस पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी।

क्या था मुन्ना बजरंगी का मामला
सुप्रीम कोर्ट ने छह अप्रैस को नोटिस जारी कर प्रदेश सरकार से जबाव मांगा। दूसरी तरफ शासन ने प्रशासनिक आधार पर बजरंगी को झांसी से पीलीभीत जेल भेजने के आदेश दे दिये। बजरंगी के अधिवक्ता ने 10 अप्रैल को मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में दिया। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए एक बार फिर से नोटिस जारी की। प्रदेश सरकार की तरफ से पहली बार कोई पेश नहीं हुआ और दूसरी बार दी गयी दलीलों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित किया कि अगले आदेशों तक बजरंगी को दोबारा झांसी जेल भेजा जाये। आदेश जारी हुए एक सप्ताह बीतने के बाद भी अनुपालन न होते देख मुन्ना बजरंगी के वकील ने डीजी जेल को प्रार्थनापत्र देते हुए इसे क्रियांवित करने का अनुरोध किया।
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