Pooja Pal: अतीक के आतंक की शिकार पूजा पाल! पति को खोकर बनीं सपा विधायक, आज BJP के लिए क्यों कर रहीं प्रचार?
Pooja Pal News: उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 20 नवंबर को होने हैं। इन 9 सीटों में से एक है फूलपूर। यहां बीजेपी, सपा और बसपा की प्रमुख दल एक दूसरे को टक्कर देने के लिए तैयार है। खास बात यह है कि बीजेपी प्रत्याशी दीपक पटेल के लिए सपा विधायक पूजा पाल चुनाव प्रचार के लिए घर-घर चौपाल लगा रही हैं।
सपा की बागी विधायक पूजा पाल का नाम उत्तर प्रदेश की सियासत में हमेशा चर्चा में रहा है। 2022 विधानसभा चुनाव में कौशांबी सीट से सपा की बनी विधायक इन दिनों 'योगी-योगी' करती नजर आ रही है। आइए जानते हैं, कैसे पति की हत्या ने पूजा पाल को राजनीति में आने के लिए मजबूर किया और अब वह योगी की धुन क्यों गुनगुना रही हैं?

कौन हैं पूजा पाल?
बात है 2005 की। जब बसपा विधायक राजू पाल की प्रयागराज (तब इलाहाबाद) के खूनी खेल में जान चली गई। इस खूनी खेल का मास्टरमाइंड माफिया डॉन से नेता बने अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ था। अतीक ने सरेआम अपने तीन गुर्गों से राजू को गोलियों से छलनी करा डाला।
राजू की पूजा से शादी के मात्र 9 ही दिन हुए थे। राजू पाल की हत्या के बाद, पूजा ने न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ी। इस दौरान उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अपने पति की विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
बसपा से शुरुआत, सपा से विधायक
यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पूजा को राजनीति में प्रवेश दिलाया। 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में पूजा ने इलाहाबाद शहर पश्चिमी सीट से जीत दर्ज की। 2017 में, भाजपा के सिद्धार्थ नाथ सिंह से हारने के बाद, उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थामा और कौशांबी की चायल विधानसभा सीट से 2022 में विधायक बनीं।
अब क्यों गुनगुना रहीं योगी-योगी?
अतीक अहमद और अशरफ को उनके अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया और योगी सरकार ने इस मामले में सख्ती दिखाई। पूजा ने कई बार मीडिया के सामने कहा कि 18 साल से मैं अतीक के आतंक के खिलाफ लड़ रही हूं। सीएम योगी ने मुझे और मेरे समुदाय को न्याय दिलाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त कानून व्यवस्था के कारण ही उन्हें न्याय मिला। 2023 में, जेल से अस्पताल जाते समय तीन लोगों ने अतीक और अशरफ की हत्या कर दी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और इसे न्याय का अंत माना गया।
सपा से बगावत और भाजपा के लिए प्रचार
- क्रॉस वोटिंग का मामला: फरवरी 2023 में, राज्यसभा चुनाव के दौरान पूजा पाल ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर क्रॉस वोटिंग की थी।
- फूलपुर उपचुनाव में भाजपा का समर्थन: इस समय, पूजा पाल भाजपा उम्मीदवार दीपक पटेल के लिए खुलकर प्रचार कर रही हैं। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य केवल उन लोगों को समर्थन देना है जिन्होंने उनके साथ न्याय किया।
क्यों हो रहे हैं उपचुनाव? कौन-कौन उम्मीदवार?
यह सीट भाजपा के प्रवीण सिंह पटेल द्वारा खाली की गई थी, जो लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इसलिए, अब उपचुनाव हो रहे हैं। कौन-कौन है उम्मीदवार?
- भाजपा: दीपक पटेल
- सपा:मुस्तफा सिद्दीकी
- बसपा: जितेंद्र सिंह
क्या है फूलपुर का जातीय समीकरण?
फूलपुर में कुल 4.16 लाख मतदाता हैं, जिनमें दलित, यादव, मुस्लिम और ब्राह्मण प्रमुख जातियां हैं। भाजपा पाल बिरादरी के 20,000 वोटरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां पूजा पाल का प्रभाव मजबूत है।
- दलित: 90,000
- यादव: 70,000
- मुस्लिम: 55,000
- ब्राह्मण: 40,000
पूजा पाल का भाजपा के समर्थन में उतरना सिर्फ सियासी घटनाक्रम नहीं, बल्कि उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक यात्रा का एक अहम पड़ाव है। 18 साल तक न्याय की लड़ाई लड़ने के बाद, वह आज सीएम योगी को अपना समर्थन देकर उनके नेतृत्व में विश्वास जता रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि फूलपुर उपचुनाव में उनकी यह सक्रियता भाजपा के लिए कितना लाभदायक साबित होती है।
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