यूपी में सपा की चलेगी या कांग्रेस की, जानें कहां फंस रहा है तालमेल में पेच?

INDIA bloc seat sharing in UP: विपक्षी दलों की ओर से इंडिया ब्लॉक की इसी महीने फिर से एक बैठक आयोजित करने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, उससे पहले यूपी में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच तालमेल का पेच फंस रहा है।

जानकारी के मुताबिक 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 80 सीटों में से करीब दो दर्जन सीटें मांग रही है। लेकिन, सपा से जो संकेत मिल रहे हैं, उससे तालमेल होना तो बहुत मुश्किल लग रहा है।

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मध्य प्रदेश की घटना नहीं भूले हैं अखिलेश
समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव जिस तरह के संकेत दे रहे हैं, उससे तो लगता है कि वह सीटों का तालमेल होने के बाद ही कांग्रेस से आगे किसी तरह की बातचीत बढ़ाने के मूड में हैं।

डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले कहा गया है कि मध्य प्रदेश चुनावों के दौरान जिस तरह का बर्ताव हुआ, उसके बाद अखिलेश कांग्रेस के साथ बातचीत को लेकर काफी सावधान हो गए हैं।

बता दें कि खुद अखिलेश कह चुके हैं कि एमपी में पहले कांग्रेस ने 6 सीटें देने की बात कही थी, लेकिन बाद में अपने कदम पीछे खींच लिए। यह मुद्दा चुनावों के दौरान दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच बहुत ही अप्रिय शक्ल अख्तियार कर चुका है और उसका असर विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद अखिलेश के एक एक्स पोस्ट में भी नजर आया है।

सिर्फ अमेठी और रायबरेली पर बनेगी गठबंधन की बात?
समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता ने डीएच को बताया है कि अमेठी और रायबरेली से आगे कांग्रेस का कोई जनाधार नहीं है। इसमें अमेठी पिछली बार राहुल गांधी बीजेपी की स्मृति ईरानी से हार ही चुके हैं और रायबरेली का प्रतिनिधित्व अभी उनकी मां सोनिया गांधी कर रही हैं।

उस नेता ने कहा, 'सच कह रहा हूं कांग्रेस को सिर्फ अमेठी और रायबरेली यही दोनों सीटें मिलनी चाहिए....इन दोनों लोकसभा क्षेत्रों के अलावा इनकी मौजूदगी कहीं नहीं है।' हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि सपा इंडिया ब्लॉक को न तो तोड़ना चाहती है और न ही छोड़ना ही चाहती है।

कांग्रेस नेताओं को याद आ रहा है 2009 वाला चुनाव
उधर ऐसी भी रिपोर्ट है कि कांग्रेस में भी यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर दो तरह के विचार हैं। एक वर्ग गठबंधन की वकालत कर रहा है और दूसरा वर्ग सम्मानजनक सीटें नहीं मिलने पर अकेले चुनाव लड़ने की भी सलाह दे रहा है।

इनका तर्क है कि पार्टी ने 2009 में अकेले लड़कर भी 22 सीटें जीत ली थी। इसी आधार पर दो दर्जन सीटों की चर्चा सामने आ रही है।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि हाल ही में सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की जयंती के मौके पर पार्टी नेताओं ने दावा किया था कि अगर पार्टी लोकसभा की 40 सीटें भी जीत लेती है तो अखिलेश यादव देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

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इसे सपा की ओर से राज्य में अधिकतर सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की रणनीति के तौर पर देखा गया था। उधर सपा की एक और सहयोगी आरएलडी भी इंडिया ब्लॉक में रहने या नहीं रहने को लेकर आगे कोई फैसला लेने की बात कह चुकी है। वह भी राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से मुंह मांगी सीटें नहीं मिलने की वजह से खफा है।

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