ऑपरेशन करता दिखा 8वीं पास 'डॉक्टर' , बीजेपी नेता का है सपोर्ट

शामली। स्वास्थ्य विभाग भाजपा नेता के सरंक्षण प्राप्त प्राइवेट अस्पताल संचालकों के सामने एक बार फिर से बौना साबित हुआ। एक बार फिर से शहर का आर्यन हॉस्पिटल सुर्खियों में है। इस बार हॉस्पिटल में अयोग्य लोगों द्वारा ऑपरेशन करने का मामला सामने आया है। अयोग्य व्यक्ति द्वारा ऑपरेशन किए जाने का वीडियो एक अस्पताल कर्मी ने ही स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया। वीडियो के आधार पर स्वास्थ्य विभाग की टीम आर्यन हॉस्पिटल जांच करने और ऑपरेशन थियेटर को सील करने पहुंची, लेकिन अस्पताल प्रबंधन और भाजपा नेता ने ए.सी.एम.ओ को हड़काते हुए बगैर जांच के सील लगाने का विरोध कर दिया। जिसके चलते स्वास्थ्य टीम को बैरंग लौटना पड़ा। अब स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल प्रबंधक को नोटिस भेजने की तैयारी कर रही है।

shamli 8th class paas hospital owner seen to perform operation

दरअसल शामली शहर के एमएसके रोड स्थित आर्यन हॉस्पिटल हमेशा से ही विवादों में घिरा रहता है। कभी लिंग परीक्षण को लेकर तो कभी मरीज को गलत खून चढ़ाने को लेकर आए दिन अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी होती रहती है। आर्यन हास्पिटल में अयोग्य लोगों द्वारा ऑपरेशन करने की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग की पांच सदस्यीय टीम अस्पताल में पहुंची।

एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा सी.एम.ओ. राजकुमार को एक वीडियो देते हुए शिकायत की गई थी कि अस्पताल में कोई भी सर्जन नहीं है। वीडियो आर्यन अस्पताल के अंदर ऑपरेशन थियेटर की बताई गई। वीडियो के अनुसार एक महिला ओटी में टेबल पर लेटी हुई है, जबकि एक डॉक्टर बगल में खड़ा है। वहीं, मरीज को एक महिला इंजेक्शन लगाती दिखाई दे रही है। यही नहीं सर्जन के अलावा एक अन्य व्यक्ति भी महिला का ऑपरेशन करता हुआ दिख रहा है। बताया जा रहा है कि स्टाफ नर्स ही ओटी को संभाले हुए है और अस्पताल मालिक नरदेव जो की शैक्षिक योगता में भी अयोग्य है और ना ही उनके पास कोई डॉक्टरी की डिग्री है, सर्जरी करते दिख रहे हैं।

इसी के आधार पर सीएमओ डॉक्टर राजकुमार के निर्देश पर एसीएमओ डॉक्टर अशोक हांडा, एसीएमओ डॉक्टर केपी सिंह स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ आर्यन हॉस्पिटल पर पहुंचे और ऑपरेशन थियेटर पर सील लगाने की बात कही। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई का वहां मौजूद अस्पताल प्रबंधन के कुछ लोगों ने विरोध कर दिया। वहीं, अस्पताल में भाजपा जिलाध्यक्ष पवन तरार ने भी बगैर जांच के कार्रवाई करने को नियम विरुद्ध बताया। बताया जा रहा है। कि भाजपा जिलाध्यक्ष ने जांचकर्ताओं को हड़काते हुए ट्रांसफर की धमकी भी दी है। विरोध होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम बगैर किसी कार्रवाई के लौट गई। एसीएमओ डॉक्टर केपी सिंह ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन से विडियो के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है, यदि तीन दिन के भीतर जवाब नहीं आता है तो कार्रवाई की जाएगी।

ए.सी.एम.ओ अशोक हाण्डा ने बताया कि अज्ञात लोगों ने मुख्य चिकित्साधिकारी को एक वीडियो सीण्डी भेजी थी। उसमें इनके यहाँ जो हॉस्पिटल मालिक हैं वो खड़े दिख रहे हैं। वहीं एक लेडिज इस्पान्डेलेसिस का इन्जेक्शन लगा रही है। इसी वीडियो में आगे जो सज्जन आपरेशन करते दिखाई दे रहे है वो असल में सर्जन नहीं है। बल्कि यहाँ के सर्जन डा.ए.के.सिंह हैं जो वीड़ियो में ऑपरेशन के दौरान नदारद दिखे। वीडियो की जांच के बाद एसीएमओ ओटी सील करने के लिए पहुंचे लेकिन उन्हें ऐसा करने नहीं दिया गया।

ए.सी.एम.ओ अशोक हाण्डा ने बताया कि अस्पताल को किसी पार्टी के नेता के संरक्षण प्राप्त है। वे किस पाटी के नेता हैं, ये पूछने पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी हॉस्पिटल बिना सर्जन के ऑपरेशन करने के मामले में सील किया गया था और 12 अप्रैल को पुनः डा.ए.के.सिंह ने हॉ़स्पिटल की पूर्ण जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने पर सील खोल दी गई थी और नेता द्वारा ट्रांसफर की बात मैंने ठीक से नहीं सुनी अभी हम लोग वापस जा रहे है। आगे देखते हैं, क्या कार्रवाई कर सकते हैं।

ए.सी.एम.ओ. के.पी.सिंह ने बताया कि वीडियो की जांच की गई उसमें ऐसे लोग ऑपरेशन करते दिखाई दे रहे थे जो अधिकृत नहीं हैं और वीडियो जांच में ऐसा लग रहा है कि वे हॉस्पिटल के मालिक हैं। एन.एस.थीसिया नर्स के द्वारा नही दिया जाना चाहिए ये भी जांच का विषय है और सरकारी कार्य होते समय किसी जनप्रतिनिधि को बुलाया जाना गलत है और उन्होंने हमें ओटी में जाने के लिए रोक दिया। 3दिन का समय वीडियो के स्पष्टीकरण के लिए दिया है। उसके बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

हॉस्पिटल मालिक नरदेव का कहना है कि हॉस्पिटल के खिलाफ कुछ लोगों की साजिश है जो हॉस्पिटल को बदनाम कर रहे है। हमने जांच टीम से वीडियो दिखाने के लिए कहा है। उन्होंने वीडियो नही दिखाई यह सब एक साजिश है।

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