शाइस्ता परवीन: पुलिसवाले की बेटी से बनी बाहुबली अतीक की पत्नी, अब यूपी की मोस्ट वॉन्टेड
Shaista Parveen, अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता उमेश पाल की हत्या से बाद फरार चल रही है। उसकी जानकारी देनें वाले को पुलिस ने 50 हजार का इनाम देने का ऐलान किया है।

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यूपी के प्रयागराज में एक समय जिस अतीक अहमद की तूती बोलती थी। अब वह मिट्टी मिल चुका है। परिवार पूरी तरह से तहस-नहस हो गया है। एक बेटे की मौत हो चुकी है, 2 बेटे जेल में बंद हैं। अतीक पत्नी शाइस्ता परवीन लबें समय से फरार चल रही है।
शाइस्ता ना बेटे की मौत पर आई और ना ही पति की मौत के बाद अंतिम दर्शन करने। शाइस्ता इस समय यूपी की मोस्ट वांटेड की लिस्ट में शामिल है। यूपी पुलिस ने उस पर 50 हजार का इनाम रखा है। अतीक के जेल जाने के बाद शाइस्ता ही परिवार और कारोबार संभाल रही थी।

उमेश पाल मर्डर के बाद से यूपी पुलिस और एसटीएफ की कई टीम लगातार शाइस्ता के पीछे लगी हुई है। सूचना देने वालों को 50 हजार देने का ऐलान किया है। लेकिन अभी भी शाइस्त पुलिस की पहुंच से दूर है। शाइस्ता की एक पुलिसकर्मी की बेटी से लेकर यूपी के माफिया अतीक का पत्नी बनने की कहानी दिलचस्प है।
50 साल की शाइस्ता परवीन ने एक साधारण सी लड़की से एक बाहुबली नेता अतीक की पत्नी तक का सफर तय किया है। इस सफर ने शाइस्ता ने कई उतार-चढ़ाव देखे। 1972 में शाइस्ता का जन्म प्रयागराज के दामुपुर गांव में हुआ था। वह पुलिस कॉन्स्टेबल फारूख की बेटी हैं।

पुलिस कॉन्स्टेबल फारूख की छह संतानों में शाइस्ता सबसे बड़ी है। वे चार बहनें और दे भाई हैं। शाइस्ता बचपन से ही पिता के साथ थानों में बने सरकारी पुलिस क्वार्टर में रही। उनका बचपन और उसके बाद के कई साल प्रतापगढ़ में बीते। प्रयागराज के एक कॉलेज से बारहवीं पास करने के बाद शाइस्ता ने शुरुआत में खुद को घर के कामों तक ही सीमित रखा।
1996 में जब शाइस्ता की अतीक से शादी हुई तब तक अतीक ने खुद को गैंग लॉर्ड के रूप में स्थापित कर लिया था। वह राजनीति में भी एंट्री ले चुका था। इस समय शाइस्ता की उम्र 24 साल थी। शाइस्ता का परिवार अतीक के परिवार के पास रिश्ता लेकर गया था। दोनों परिवारों की एक दूसरे से पहले से जान पहचान थी।

वहीं दूसरी ओर अतीक गरीब परिवार से आता था। अतीक 10वी फेल था। भले ही अतीक के पास तक नाम और पैसा दोनों आ गया था, लेकिन वह ऐसा जीवनसाथी चाह रहा था जो उससे अधिक पढ़ा लिखा हो। शाइस्ता बातचीत में तेज तर्रार थी। इसके साथ ही अतीक से ज्यादा पढ़ी-लिखी भी थी। इसी के चलते अतीक ने ये रिश्ता मंजूर कर लिया।
अगस्त 1999 में अतीक ने शाइस्ता से शादी कर। जब शाइस्ता से शादी तब तक अतीक 4 बार, साल 1989, 1991, 1993, 1996 में विधायक बन चुका था। इसके बाद साल 2002 में शहर पश्चिमी सीट से वो 5वीं बार विधायक चुना गया। वहीं 2004 में फूलपुर संसदीय सीट से सांसद भी निर्वाचित हुआ।

प्रयागराज के एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि शाइस्ता बहुत विनम्र थी और हमेशा पेरेंट्स-टीचर मीटिंग में भाग लेती थी। अब सवाल ये कि कैसे एक शालीन लड़की उमेश पाल हत्याकांड में फंस गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उमेश पाल की हत्या से पहले शाइस्ता गुजरात की साबरमती जेल में अपने पति से मिलने गई थी। जहां दोनों ने उमेश पाल की हत्या पर चर्चा की थी।
मीडिया रिपोट्स् के मुताबिक, अतीक ने शाइस्ता को जेल के अंदर एक फोन और एक सिम कार्ड भेजने के लिए कहा था। उसने उसे एक पुलिस वाले का नाम भी बताया था। जो उसे जेल में फोन पहुंचाने में मदद करने वाला था। कुछ दिनों बाद शाइस्ता ने अतीक ले लिए एक फोन भेजा। अतीक ने इसी फोन का इस्तेमाल शूटरों से बात करने और अपराध की साजिश रचने के लिए किया था।

जीशान नाम के एक प्रॉपर्टी डीलर ने भी यह आरोप लगाया है कि शाइस्ता ने उसे कई बार फोन पर धमकी दी थी कि अतीक उससे रंगदारी मांग रहा है। 2017 में यूपी में बीजेपी की सरकार बनी तो अतीक के बुरे दिन फिर से शुरू हो गए। 2018 में शाइस्ता ने अतीक के लिए चुनाव प्रचार किया था। लेकिन अतीक यह चुनाव हार गया।
इसके बाद साल 2021 में परिवार ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ओवैसी की पार्टी जॉइन कर ली। दो बेटे, पति और देवर के जेल में जाने के बाद शाइस्ता ने राजनीति में फिर से अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की। जिसके चलते जनवरी 2023 में, वह मेयर चुनाव के लिए पार्टी से टिकट पाने के लिए बसपा में शामिल हो गईं। लेकिन उमेश पाल की हत्या के बाद पार्टी ने उससे दूरी बना ली। अब कई करीब तीन महीने से शाइस्ता फरार है।

वर्तमान में शाइस्ता के खिलाफ प्रयागराज में 4 मामले दर्ज हैं। इनमें से 3 धोखाधड़ी के और 1 हत्या का मामला है। पहले 3 मामले 2009 में कर्नलगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज किए गए थे। भारतीय दंड संहिता की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा या वसीयत की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और आर्म्स एक्ट की धारा 30 (लाइसेंस या नियम का उल्लंघन) के अलावा 471 (जाली दस्तावेज का इस्तेमाल करना) जैसे मामले दर्ज हैं।












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