संभल में पुलिस ने नहीं तो किसने चलाई गोलियां? जिससे चार लोगों की गई जान, जांच में जुटी पुलिस

Sambhal Violence: शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हिंसा भड़क उठी थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हो गई है। इन मौतों पर अब यूपी की राजनीति तेज हो गई है। दरअसल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि अधिकांश पीड़ितों की मौत गोली लगने से हुई। स्थानीय लोगों ने ऐसा दावा किया था गोली पुलिस ने चलाई थी। हालांकि, पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने कहा था कि संभल में कुछ दंगाई हथियारबंद थे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मुख्य रूप से पेलेट गन का इस्तेमाल किया था। हालांकि, अधिकारी अभी भी इस बात की जांच कर रहे हैं कि गोलियां किसने चलाईं जिससे चार लोगों की मौत हो गई। बुधवार को मुरादाबाद कमिश्नर अनंजय कुमार सिंह ने कहा कि कल तक घटना में 3 नाबालिगों का नाम सामने आया है।

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नाबालिगों के साथ हम काउंसलिंग की चीजें ही कर रहे हैं। इसके अलावा अभी तक जिन 27 लोगों की गिरफ़्तारी हुई है, उनके संबंध में हम कोर्ट के जरिए कानूनी कार्यवाही पूरी कर रहे हैं। खतरनाक चाकू मिला है। हमें जो अवैध हथियार मिल रहे हैं, उनकी रिकवरी की जा रही है। कहा कि मृतकों के परिजनों को आमंत्रित किया है। अगर वे FIR दर्ज़ करेंगे तो हम FIR दर्ज़ जरूर करेंगे। 4 लोगों का मारा जाना दुखद है।

मामले की जांच जारी रहने के कारण मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। बता दें, 24 नवंबर को हुई हिंसा के बाद शहर में सामान्य स्थिति लौटने लगी है। हिंसा में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। बुधवार सुबह कुछ दुकानें खोली गईं, लेकिन प्रतिबंध अभी भी जारी है। इस बीच, पुलिस स्थानीय लोगों और फैलाई जा रही किसी भी गलत सूचना पर कड़ी नजर रखे हुए है। संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए आज कई सांसदों ने संभल हिंसा पर बात की।

बीजेपी सांसद रवि किशन ने कश्मीर के साथ तुलना करते हुए आरोप लगाया कि हिंसा शहर के स्थानीय नेताओं द्वारा भड़काई गई थी। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के इस दावे पर सवाल उठाया कि प्रशासन की गलती थी, पर कहा, "प्रशासन कैसे जिम्मेदार है? सर्वेक्षण न्यायालय के आदेश के अनुसार किया जा रहा था।" इस बीच, कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने सांप्रदायिक पक्षपात का आरोप लगाते हुए पुलिस की "भाजपा विंग" की तरह काम करने की आलोचना की।

इस बीच, हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के सदस्यों ने एकता का आह्वान किया है और मौजूदा तनाव के बावजूद सांप्रदायिक सद्भाव को बहाल करने का संकल्प लिया है। वहीं, योगी सरकार ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की घोषणा की है। पत्थरबाजों के पोस्टर सार्वजनिक रूप से लगाए जाएंगे और उपद्रव के दौरान हुए नुकसान की भरपाई उनसे की जाएगी। एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर इनाम की पेशकश की जा सकती है।

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