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Sambhal Shahi Jama Masjid: हिंदू-मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में क्या-क्या किए दावे?, जानिए वकील का तर्क?

Sambhal Shahi Jama Masjid Survey: कोर्ट द्वारा सर्वेक्षण के आदेश के बाद से संभल जिले की शाही जामा मस्जिद सुर्खियों में बनी हुई हैं। सर्वेक्षण टीम रविवार को जामा मस्जिद पहुंची, जिस देखकर मुस्लिम समाज के लोग भड़क गए और पथराव कर दिया। सर्वे के दौरान हुई हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई है। वहीं, कई गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई है।

अभी तक जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक, पुलिस ने इस मामले में दो महिलाओं समेत कुछ लोगों को गिरफ्तार किया है। ऐसा बताया जा रहा है कि पकड़ी गई महिलाएं छत से पत्थरबाजी कर रही थीं। बता दें, शाही जामा मस्जिद, शहर के केंद्र में ऊंचे टीले पर कोर्ट पूर्वी इलाके में बनी हुई है। इस मस्जिद को लेकर हिंदू-मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट में अलग-अलग दावे किए है।

Sambhal Shahi Jama Masjid

आइए जानते हैं कि हिंदू और मुस्लिम पक्ष में कोर्ट में क्या दावा पेश किया। हिंदू पक्ष के वकील ने कोर्ट में क्या दिया तर्क...

हिंदू पक्ष का दावा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभल शाही जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष दावा कर रहा है कि जामा मस्जिद प्राचीन हरिहर मंदिर थी, जहां पर कलियुग में विष्णु के दशावतारों में से एक कल्कि का अवतार होने वाला है। इतना ही नहीं, हिंदू पक्ष द्वारा कहा गया है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। इस दावे को सिद्ध करने के लिए उन्होंने बाबरनामा, आइन-ए-अकबरी और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 150 साल पुरानी रिपोर्ट को आधार बनाया है।

हिंदू पक्ष के वकील का क्या है तर्क?
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में दायर की याचिका में दावा किया है कि मस्जिद उस जगह पर खड़ी है जो कभी सदियों पुराना हरिहर मंदिर हुआ करता था। उनका तर्क है कि अंदर मंदिर के अवशेष हैं, जिनमें खंभे भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि 19 नवंबर को पारित न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आज एडवोकेट कमिश्नर द्वारा दूसरे दिन का सर्वेक्षण किया गया। इस सर्वेक्षण के दौरान सभी विशेषताओं का अध्ययन किया गया।

मुस्लिम पक्ष का क्या है दावा
मुस्लिम पक्ष का दावा है कि शाही जामा मस्जिद का निर्माण 1529 में मीर बेग ने करवाया था, जो मुगल बादशाह बाबर का कमांडर था। इतना ही नहीं, मस्जिद के अंदर बने एक शिलालेख की ओर मुस्लिम पक्ष इशारा करता हैं, जिसमें साफतौर पर बाबर का नाम लिखा है। जामा मस्जिद का उल्लेख बाबर नामा में मिलता है। सुप्रीम कोर्ट के 1991 के उस ऑर्डर को आधार बनाकर मुस्लिम पक्ष अपना विरोध दर्ज कराता है, जिसमें अदालत ने कहा था कि 15 अगस्त 1947 से जो भी धार्मिक स्थल जिस भी स्थिति में हैं, वो अपने स्थान पर बने रहेंगे।

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