कश्मीर से भाग कर आए युवकों ने बताया पत्थरबाजी के लिए कौन करता था मजबूर

सहारनपुर। कश्मीर में आए दिन सेना पर पत्थर चलाने की घटनाएं सामने आती हैं। ये पत्थर कौन चलाता है और इन्हें फंडिंग कौन करता है इसका खुलासा कश्मीर से बचकर आए सहारनपुर और बागपत के युवकों ने किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें कश्मीर में बंधक बनाकर सेना पर पत्थरबाजी के लिए भेजा जाता था और मना करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी।

saharanpur man who came from jammu told why he used to throw stone on indian army in uttar pradesh.

सहारनपुर के कुछ युवकों का आरोप है कि उन्हें कश्मीर में उनकी फैक्ट्री का मालिक सैनिकों पर पत्थरबाजी करने के लिए मजबूर करता था। यह लोग सहारनपुर के नकुड़ व ननौता के रहने वाले हैं। यह जम्मू कश्मीर में टेलर का काम किया करते थे। इनका आरोप है कि जंहा यह काम करते थे वंहा के मालिक ने इन्हें शुरू में एक दो माह तो पैसे दिये। लेकिन उसके बाद इनके पैसे रोक लिए और उन्हें बंधक बना कर उनसे काम लिया जाता था। जब वो पेसों की बात करते थे तो उनसे सैनिकों पर पत्थरबाजी करने के लिए कहा जाता था। और कहा जाता था कि तुम्हें पत्थरबाजी के बाद ही पैसे मिलेंगे। वहां से यह लोग किसी तरह से उनकी कैद से फरार हुए ओर पुलिस को अपनी आप बीती बताई।

सहारनपुर जनपद के नानौता निवासी मोहम्मद अजीम राव, नकुड़ निवासी बबलू और पंकज, बागपत के अन्य युवकों के साथ कश्मीर के पुलवामा में लस्तीपुरा गए थे। वहां उन्हें डिवाइन इंडस्ट्रियल फर्म में सिलाई की नौकरी मिल गई थी। उसी फैक्ट्री में कश्मीर के भी कई युवक काम करते थे। फैक्ट्री मालिक एजाज वाणी उन पर पत्थरबाजी करने का दवाब बनाने लगा। जनवरी महीने से कश्मीर में पत्थरबाजों की कैद में रहे सहारनपुर और बागपत जनपद के दर्जनों युवक आखिरकार कश्मीर से छूटकर भाग निकलने में सफल रहे। कश्मीर से छूटकर घर पहुंचे पीड़ित युवकों ने बताया कि वे कश्मीर में सिलाई की फैक्ट्री में नौकरी करने गए थे। लेकिन फैक्ट्री मालिक ने कश्मीरियों की मदद से उन्हें बंधक बना लिया और उन्हें पत्थरबाजी करने की ट्रेनिंग देकर सेना के जवानों पर पत्थरबाजी करने को मजबूर किया। पीड़ितों का कहना है कि जब इन लोगों ने सेना के जवानों पर पत्थरबाजी से इंकार कर दिया तो इन्हें मारा-पीटा जाता था।

सहारनपुर के एस. एस. पी. बबलू कुमार ने इन लोगों से पूछताछ करने के बाद जांच शुरू कर दी है। शुरूआत में तो सहारनपुर पुलिस इन युवकों की बतायी गयी बात को आधार मानकर अपनी कार्यवाई कर रही है। लेकिन असल मामला क्या है यह तो इसकी तह में जाकर ही पता लग पायेगा।

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