PICs: यूपी स्वास्थ्य विभाग बधाई हो, सड़क पर दिया महिला ने बच्चे को जन्म

मिथिलेश के परिजनों को पता चला कि महिला को प्रसव पीड़ा हो रही है तो उन्होंने सरकारी एंबुलेंस 102 और 108 दोनों पर फोन किया लेकिन किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया।

मथुरा। मथुरा के सोनाई गांव में एक प्रसूता ने सड़क पर अपने बच्चे को जन्म दे दिया। सरकारी एंबुलेंस को जब कॉल की गई तो किसी ने भी फोन नहीं उठाया और इसी के चलते प्रसूता को अपने बच्चे को सड़क पर जन्म देना पड़ा। उत्तर प्रदेश में भले ही सत्ता का निजाम बदल गया और भले ही योगी आदित्यनाथ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की बात कहते हो लेकिन हकीकत कुछ और ही दिखाई दे रही है। सोनई गांव की ये प्रसूता मिथिलेश उम्र करीब 25 वर्ष, जब प्रसव पीड़ा में पड़ी तो स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का शिकार हो गई। मिथिलेश के परिजनों को पता चला कि महिला को प्रसव पीड़ा हो रही है तो उन्होंने सरकारी एंबुलेंस 102 और 108 दोनों पर फोन किया लेकिन किसी ने भी फोन रिसीव नहीं किया।

Pregnant woman delivered child on road, UP Health Department Congratulations
Pregnant woman delivered child on road, UP Health Department Congratulations

जब परिजनों ने सोनई के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क साधा तो वहां भी इन्हें एंबुलेंस की कोई सुविधा नहीं मिली। सड़क पर ये प्रसूता तड़पती रही और दो-तीन घंटे बीत जाने के बाद मिथिलेश ने अस्पताल ले जाते वक्त सड़क पर बच्चे को जन्म दे दिया। जब इसका पता वहां रह रहे आसपास के लोगों को हुआ तो उन्होंने बिना समय गवाएं प्रसूता को सोनई गांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भर्ती करा दिया और जच्चा और बच्चा दोनों ही सुरक्षित बताए गए हैं।

Pregnant woman delivered child on road, UP Health Department Congratulations

ऐसे में कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। अगर समय से एंबुलेंस कर्मचारियों का फोन उठ गया होता तो शायद मिथिलेश अपने बच्चे को सड़क पर जन्म देने की वजह हॉस्पिटल में जन्म दे देती। स्वास्थ्य सेवाएं किस कदर बदहाल हैं आपको पता लग ही गया होगा कि स्वास्थ्य विभाग और सरकारी कर्मचारी अपने काम के प्रति कितने लापरवाह हैं। ऐसे में कैसे स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी।

Pregnant woman delivered child on road, UP Health Department Congratulations

ग्रामीणों ने की मदद

मिथिलेश के परिजन रामदेव ने बताया कि आसपास की महिलाएं और लोग आए, उन्होंने हमारी मदद की और सामुदायिक केंद्र पर मिथिलेश को भर्ती कराया। अगर एंबुलेंस आ जाती तो हॉस्पिटल में मिथिलेश बच्चे को जन्म देती। मिथिलेश के रिश्तेदार राम सिंह का कहना है कि हम लोग उसे मोटरसाइकिल पर बिठाकर हॉस्पिटल ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में मिथिलेश को ज्यादा पीड़ा होने लगी।

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