तीसरे चरण में 36 सीटों पर अहम रोल अदा करेंगे आलू किसान, जानिए इस बेल्ट की क्या है अहमियत

लखनऊ, 17 फरवरी: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण में जिन 69 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है उनमें 36 विधानसभा क्षेत्र आलू उत्पादक हैं, जिनमें यादव, कुर्मी बहुमत वाले इन क्षेत्रों के किसान आलू को शुद्ध सोना मानते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आलू उगाने वाले किसानों पर कितना प्रभाव पड़ता है तीसरे चरण की 59 में से 36 सीटों पर। हालांकि पूर्व सीएम अखिलेश यादव भी समय समय पर आलू बेल्ट के किसानों के लिए नई तकनीक लाने के वादे करते रहे हैं। इस बार आलू किसान भी गन्ना किसानों की तरह अपनी मुट्‌ठी नहीं खोल रहा है। लिहाजा 20 फरवरी को तीसरे चरण के मतदान के दौरान सबकी निगाहें इस बेल्ट पर टिकी होंगी।

कन्नौज के आसपास चार लाख किसान करते हैं आलू की खेती

कन्नौज के आसपास चार लाख किसान करते हैं आलू की खेती

कानुपर के फर्रुखाबाद, कन्नौज, मैनपुरी और अरौल-बिल्हौर क्षेत्र के आलू क्षेत्र में आलू के खेत सड़क किनारे दिखाई दे रहे हैं और 258 कोल्ड स्टोरेज भी हैं। ये इस बात की गवाही देते हैं कि यहां के अधिकांश किसान आलू उगाते हैं। इनकी संख्या करीब साढ़े चार लाख है। स्वाभाविक है कि किसानों के इतने बड़े समूह की उम्मीदें राजनीतिक दलों से भी बड़ी होंगी। खेतों के बीचोबीच खड़े ट्रैक्टरों पर आलू की बोरियां लादने के बाद किसानों के चेहरों पर जल्द मेहनत का दाम मिलने की उम्मीद नजर आ रही है. इस दौरान पूरे आलू पट्टी में सभी पक्षों के प्रति किसानों में रोष है।

36 विधानसभा सीटों पर हर तरफ नजर आती है आलू की चमक

36 विधानसभा सीटों पर हर तरफ नजर आती है आलू की चमक

आगरा एक्सप्रेस-वे पर जैसे ही कन्नौज का बॉर्डर शुरू होता है, खेतों में हर तरफ आलू की चमक नजर आती है. वहीं खेत में और खेत में हर जगह आलू की फसल होती है। सड़क किनारे कोल्ड स्टोरेज भी। ऐसे में कानपुर के बिल्हौर, कन्नौज और फरूखाबाद से लेकर फिरोजाबाद तक ये नजारा दिखता है, यह आलू की पट्टी है. यहां लाखों किसान परिवारों की आजीविका आलू पर टिकी है। जहां 11 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन करने वाले फर्रुखाबाद में 2 लाख से ज्यादा किसान आलू की खेती से जुड़े हैं। यहां की शैतानपुर मंडी पहुंचने पर आलू के हाल और राजनीतिक चाल दोनों का खुलासा होता है। यहां आलू बेचने आए किसानों का कहना है कि चुनाव में वादे तो किए गए, लेकिन आलू की खपत बढ़ाने के लिए उद्योग नहीं लग पाए। जहां पिछली सरकारों ने आलू किसानों के लिए कुछ खास नहीं किया।

राजनीतिक दलों की उदासीनता से नाराज हैं किसान

राजनीतिक दलों की उदासीनता से नाराज हैं किसान

इसी तरह के सवाल फर्रुखाबाद के बुढानामऊ के किसान रजत कटियार से भी पूछे जाते हैं। कहा जाता है कि हर चुनाव में चिप्स, शराब फैक्ट्री और आलू पाउडर बनाने की बात होती है। इस चुनाव में भी राजनीतिक दलों ने दावा करना शुरू कर दिया है। लेकिन यह दावा हकीकत में बदल पाएगा, इस पर अभी भी संशय बना हुआ है। ऐसे में वोट उन्हीं को मिलेगा जो आलू किसानों की बात करेंगे। वहीं घोषणापत्र के सवाल पर किसानों का कहना है कि किसी ने आलू से जुड़ी बातें ज्यादा रखी हैं तो किसी ने कम, लेकिन ऐसी घोषणाएं हर चुनाव में की जाती है लेकिन पूरी नहीं होताी, यह चिंता का विषय है।

आलू पैदा करने वाले किसानों को लेकर सियासत

आलू पैदा करने वाले किसानों को लेकर सियासत

वहीं, विधानसभा चुनाव में तीसरे चरण में शामिल 16 जिलों के 59 विधानसभा क्षेत्रों के 36 विधानसभा क्षेत्र आलू उत्पादक हैं। जबकि कुर्मी बहुल यादव के इन इलाकों में किसान आलू को शुद्ध सोना मानते हैं। आलू उत्पादन क्षेत्रों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक राज्य है। यहां करीब 6.1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आलू बोया जाता है। वहीं, पूरे राज्य में करीब 147.77 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ है। ऐसे में आगरा से शुरू होकर मथुरा, इटावा, फर्रुखाबाद से लेकर कानपुर देहात तक फैली आलू पट्टी देश के कुल उत्पादन का करीब 30 फीसदी उत्पादन करती है। वहीं देश में डीजल के दामों में बढ़ोतरी, डीएपी और यूरिया की कमी, तैयार आलू की आढ़ती के सहारे होने का दर्द किसानों को बेचैन कर रहा है।

राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में आलू किसान की अहमियत

राजनीतिक दलों के घोषणापत्र में आलू किसान की अहमियत

भाजपा ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए मतदाताओं को लुभाने के लिए मेगा फूड पार्क, एक जिला एक उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली, भंडारण संयंत्र आदि की योजनाओं के बारे में बताया है। वहीं समाजवादी पार्टी ने किसान आयोग का गठन किया, हरित क्षेत्र परियोजनाओं के लिए भूमि बैंक की स्थापना, किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली, ब्याज मुक्त ऋण, हर 10 किमी के भीतर और सभी संभागों में किसान बाजार नेटवर्क के तहत बाजार की स्थापना की। इस बेल्ट में खाद्य प्रसंस्करण क्लस्टर बनाए जाने की बात कही गई। इसके साथ ही राज्य के कन्नौज में 5 स्थानों पर खाद्य प्रसंस्करण क्लस्टर, कंटेनर डिपो के साथ आलू निर्यात क्षेत्र स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया है, हर प्रखंड में कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था की जाएगी।

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