OP Rajbhar: 'छावा' फिल्म पर राजनीति क्यों? मंत्री ओपी राजभर ने साधा मौलाना पर निशाना
OP Rajbhar: उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज्य मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न गांवों का दौरा करते हुए कई अहम मुद्दों पर बयान दिया। खासतौर पर, बरेली के मौलाना शहाबुद्दीन रजवी के बयान को लेकर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी।
राजभर ने मौलाना पर निशाना साधते हुए कहा कि वे कांग्रेस, सपा और बसपा को अपना रहनुमा मानते हैं, लेकिन इस्लामिक विचारों का सही तरीके से पालन नहीं करते। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर मौलाना में हिम्मत है, तो वे इन पार्टियों से किसी मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाने की मांग करें। इसके साथ ही उन्होंने मौलाना से गैर-जरूरी मुद्दों से हटकर शिक्षा, रोजगार और भाईचारे की बात करने की सलाह दी।

गौरतलब है कि मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर फिल्म 'छावा' पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इसे लेकर राजभर ने मौलाना के बयान को बेमतलब करार दिया और कहा कि धर्म के नाम पर राजनीति करने से बेहतर है कि लोग अपने समुदाय की शिक्षा और रोजगार की स्थिति सुधारने पर ध्यान दें।
अखिलेश यादव पर साधा निशाना
आईएएस अधिकारी अभिषेक सिंह के निलंबन पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सवाल उठाए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने कहा, "अखिलेश यादव बड़े नेता हैं, लेकिन उनके कार्यकाल में गोमती रिवर फ्रंट और खनन घोटाले हुए थे। गायत्री प्रजापति जेल में हैं और खुद अखिलेश यादव का नाम भी एफआईआर में दर्ज था, लेकिन वे जुगाड़ से बच गए।"
मसूद सालार गाजी मेले पर प्रशासन का फैसला सही
राजभर ने मसूद सालार गाजी मेले के आयोजन को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि इसका फैसला प्रशासन को लेना चाहिए और वही इसे सही तरीके से देखेगा। उन्होंने साफ किया कि धार्मिक आयोजनों को लेकर प्रशासन को स्वतंत्र रूप से काम करने देना चाहिए।
हाल ही में योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने एक विवादित बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे सात दरोगाओं के हाथ-पैर तुड़वाकर यहां तक पहुंचे हैं। इस पर राजभर ने कहा, "यह नेता का बयान है, इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। राजनीति में कई बार बयानबाजी तीखी हो जाती है, लेकिन इससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए।"
राजभर ने औरंगजेब की तुलना महर्षि परशुराम से करने पर कांग्रेस नेताओं को जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने देश पर लंबे समय तक शासन किया, लेकिन शिक्षा को अनिवार्य नहीं बनाया। अगर उन्होंने शिक्षा नीति को मजबूत किया होता, तो आज लोगों की सोच बदली होती। उन्होंने कांग्रेस को देश में शिक्षा की दुर्गति के लिए जिम्मेदार ठहराया।












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