BJP प्रत्याशियों के लिए हार का सबब न बन जाए नोटा, संघ ने एबीवीपी को दी ये अहम जिम्मेदारी
लखनऊ, 5 फरवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर सब अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं। इस बीच आरएसएस ने भी अपने संगठनों को सक्रिय होने का निर्देश दिया है। सूत्रों के मुताबिक आरएसएस ने एवीबीपी को निर्देश दिया है कि वह लोगों को इस बात के लिए समझाए में कि चुनाव में मतदान के दौरान नोटा यान नन ऑफ द एबव की जगह किसी उम्मीदवार को मत देने की कोशिश करें। नोटा का आप्शन दबाकर अपना मत बर्बाद न होने दें। बताया जा रहा है कि पिछले चुनाव में नोटा के असर के बाद सक्रिय हुए संघ ने अब इस बार ये अहम जिम्मेदारी विद्यार्थी परिषद जैसे संगठन को दी है।

एबीवीपी ने शुरू किया नोटा को ना अभियान
संघ के निर्देश पर उनके आनुसंगिक संगठन एबीवीपी ने अपना अभियान शुरू कर दिया है। नोटा को न बोलने के अभियान के साथ ही एबीवीपी के कार्यकर्ता लोगों को योगी और मोदी सरकार बी नीतियां भी बताएंगे। एक नेता ने बताया कि पिछले चुनाव में नोटा के पक्ष में काफी मतदान हुआ था। 6 सीटें ऐसी थी जहां नोटा को बीजपी उम्मीदवारों की जीत के अंतर से अधिक मत मिले थे। वहीं दो सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के अंतर से अधिक मत नोटा को मिले थे। वहीं करीब आधा दर्जन सीटें ऐसी थीं जहां पर हार और जीत का अंतर के करीब ही मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था।
मतदाताओं को जागरूक करने का प्रयास
संघ की कोशिश है कि जो मतदाता सरकार की नीतियों से और संगठन से नाराज ऐसे मतदाता जो उम्मीदवार को मतदान करना नहीं चाहते हैं वो नोटा का बटन दबाते हैं। ऐसे में यदि नोटा का बटन दबाने वालों की संख्या अधिक हुई तो उन सीटों पर पार्टी की जीत का समीकरण बिगड़ सकता है। इसी रणनीति को ध्यान में रखते हुए संघ के निर्देश पर एबीवीपी ने यह अभियान शुरू किया है। यह अभियान खासतौर से उन जिलों में तेजी से चलाया जा रहा है जहां दस फरवरी को मतदान होना है। यहां संघ और एबीवीपी के कार्यकर्ता तेजी से डोर टू डोर कैंपन चलाकर लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं।
नोटा दबाकर अपने मत को बेकार न होने दें
एबीवीपी अवध प्रांत के मंत्री आकाश पटेल का कहना है कि मतदाता को अपना विधयक चुननने के लिए पांच सालों तक इंतजार करना पड़ता है। उसके बाद अपने अधिकार के प्रयोग का मौका मिलता है ऐसे में वह अपने अधिकार का प्रयोग नोटा को दबाकर बेकार न करें। विद्यार्थी परिषद मतदाताओं को नोटा नहीं दबाने के लिए जागरूक कर रही है। साथ ही ऐसी सरकार चुनने के लिए भी प्रेरित कर रही है जो राष्ट्रवाद के साथ ही देश व समाज के विकास के लिए काम करे।












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