UP News: बिना कांग्रेस की भूमिका तय किए सफल होगा ग़ैर BJP गठबंधन?
Arvind Kejariwal-Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुलाकात के बाद से ही एक बार फिर गैर बीजेपी एलायंस को लेकर सियासत गरम हो गई है।

Arvind Kejariwal-Akhilesh Yadav: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी के खिलाफ गठबंधन बनाने की कवायद तेज हो गई है। गठबंधन में फिलहाल गैर कांग्रेस दल ही एकजुट हो रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से सपा के चीफ अखिलेश यादव की मुलाकात के कई राजनीतिक मायने निकालने जा रहे हैं।
गठबंधन में क्या होगी कांग्रेस की भूमिका?
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो केजरीवाल और अखिलेश की मुलाकात के बाद गैर कांग्रेसी गठबंधन की कवायद तेज होगी लेकिन एक बात तो तय है कि यह गठबंधन तब तक सफल नहीं होगा जब तक इसमें कांग्रेस की कोई भूमिका तय नहीं की जाएगी। इसकी वजह ये है कि जितने घटक दल हैं उनका अपने राज्यों से बाहर कोई जनाधार नहीं है। ऐसे में राष्ट्रीय फलक पर यह गठबंधन कैसे सफल होगा ये बड़ा प्रश्न है।
घटक दलों को जोड़ना अच्छी शुरुआत
अरविंद केजरीवाल के अखिलेश के साथ मुलाकात के बाद कई अटकलें लगाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि अखिलेश और केजरीवाल के बीच गैर कांग्रेसी गठबंधन को लेकर भी बातचीत हुई है। हालांकि इस गठबंधन में कांग्रेस के शामिल होने या न होने पर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है लेकिन यूपी में बिना कांग्रेस के शामिल हुए यह गठबंधन सफल होगा यह बड़ा सवाल है। हालांकि गैर कांग्रेसी घटक दलों का बीजेपी के खिलाफ एक छतरी के नीचे आना भविष्य के लिए अच्छा कदम माना जा रहा है।
कांग्रेस शामिल न हुई तो अखिलेश के सामने चुनौती
हालांकि 2024 से पहले गठबंधन की जो कवायद शुरू की गई है उसमें यदि कांग्रेस न शामिल हुई तो अखिलेश यादव की चुनौती और बढ़ जाएगी। वरिष्ठ पत्रकार राजीव श्रीवास्तव कहते हैं कि,
घटक दलों को जोड़ने की कवायद एक अच्छी शुरुआत कही जा सकती है लेकिन इसमें यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस की क्या भूमिका रहती है। कांग्रेस इस गठबंधन में शामिल होगी या नहीं यह देखना होगा क्योंकि पिछले कई चुनावों में उत्साहजनक परिणाम आने के बाद अब वह बारगेनिंग पॉवर में खड़ी हो गई है।
कर्नाटक और निकाय चुनाव में मुस्लिम इफ़ेक्ट
राजीव श्रीवास्तव की माने तो कर्नाटक चुनाव में जीत और निकाय चुनाव में उत्साहजनक स्थिति के बाद अब कांग्रेस कांग्रेस को लेकर रहा है कि उसके मत प्रतिशत में इजाफा हो रहा है। इसलिए वह अपने आपको बारगेनिंग की स्थिति में देख रही है। इसके लिए कांग्रेस अभी राजस्थान और मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव का इंतजार करना चाहती है। यदि इन दो राज्यों से अच्छे परिणाम मिले तो कांग्रेस अपने आपको बेहतर स्थिति में पा सकती है।
भारत जोड़ो, कर्नाटक, हिमाचल और निकाय चुनाव
राजीतिक विश्लेषकों की माने तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा, कर्नाटक और हिमाचल विधानसभा चुनाव में मिली जीत ने कांग्रेस के भीतर एक उम्मीद जगाई है। इसके अलावा यूपी में हुए निकाय चुनाव में भी कांग्रेस का दावा है कि उसका वोट प्रतिशत बढ़ा है और कई जगहों पर वह बेहतर पोजिशन में रही है। इन सब बातों को देखते हुए कांग्रेस इस गठबंधन में शामिल होने के बाद ठीक ठाक सीटों की डिमांड करेगी जिसे क्षेत्रीय क्षत्रपों के लिए पूरा करना इतना आसान नहीं होगा।
अखिलेश के लिए ऊहापोह की स्थिति
सपा के चीफ अखिलेश यादव दिल्ली के सीएम केजरीवाल समेत तमाम नेताओं से मुलाकात तो कर रहे हैं लेकिन वह खुद ही उहापोह की स्थिति में हैं कि क्या करें। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह कभी कांग्रेस के नजदीक दिखाई देते हैं तो कभी दूरी बना लेते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो अखिलेश को भी यह बात समझ में आ गई है कि बिना कांग्रेस के इस गठबंधन को खड़ा करना काफी मुश्किल होगा।
कांग्रेस शामिल हुई तो सपा की सीटें घटेंगी
कांग्रेस यदि गठबंधन में शामिल हुई तो वह अपने कद के हिसाब से यूपी में अच्छी खासी सीटों की डिमांड रखेगी। अखिलेश को कांग्रेस के साथ ही अपने सहयोगियों के साथ भी डील करना होगा। ऐसी स्थिति में वह यूपी में सपा के लिए कितनी सीटें बचा पाएंगे यह सबसे बड़ा सवाल है।












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