Noida Engineer Death Case में सबसे बड़ा एक्शन! किसी भी वक्त हो सकती है इस बड़े आदमी की गिरफ्तारी, वारंट जारी
Noida Engineer Yuvraj Mehta Death Case: ग्रेटर नोएडा पुलिस ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। हादसे में लापरवाही के मुख्य आरोपी और लोटस ग्रीन के मालिक निर्मल सिंह के खिलाफ कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी कर दिया है।
पुलिस ने आरोपी के दफ्तर को पहले ही सील कर दिया था, लेकिन निर्मल सिंह अभी भी फरार चल रहे हैं। अब प्रशासन उनके घर और दफ्तर की कुर्की करने की तैयारी में है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत नोएडा के सेक्टर 150 में जलभराव की वजह से हुई थी। घने कोहरे के दौरान उनकी कार अनियंत्रित होकर एक गहरी खाई (ट्रेंच) में गिर गई थी, जो वर्षों से जमा गंदे पानी और बारिश के पानी के कारण एक गहरे तालाब में तब्दील हो चुकी थी। इस पानी में डूबने से युवराज की मौत हो गई थी।
NGT का कड़ा रुख
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे पर्यावरण कानूनों और स्टॉर्म वाटर मैनेजमेंट की विफलता का गंभीर मामला माना है। एनजीटी की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- स्थायी तालाब बन गई थी जमीन: जिस जगह हादसा हुआ, वह जमीन एक निजी मॉल के लिए आवंटित थी, लेकिन बीते 10 वर्षों से वहां जलभराव होता रहा, जिसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए।
- फाइलों में दबी रही योजना: एनजीटी ने पाया कि 2015-16 में ड्रेनेज सिस्टम और हेड रेगुलेटर के लिए बजट (13.05 लाख रुपये) भी जारी हुआ था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण योजना कभी लागू ही नहीं हुई।
- नोटिस जारी: एनजीटी ने नोएडा अथॉरिटी, यूपीपीसीबी, सिंचाई विभाग और जिलाधिकारी को नोटिस जारी कर हलफनामा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
घटना के बाद तीन मुख्य गिरफ्तारियां
नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस अब तक तीन मुख्य गिरफ्तारियां कर चुकी है। पुलिस ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार रियल एस्टेट कंपनियों के अधिकारियों पर शिकंजा कस दिया है।
पुलिस ने गुरुवार को लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े दो और आरोपियों, रवि बंसल और सचिन करनवाल को गिरफ्तार किया है। रवि बंसल फरीदाबाद का निवासी है, जबकि सचिन गाजियाबाद का रहने वाला है। इन पर लापरवाही बरतने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने का आरोप है।
इससे पहले, पुलिस ने 'विजटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड' (MZ Wiztown) के डायरेक्टर अभय कुमार को गिरफ्तार किया था। अभय कुमार फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
अन्य आरोपियों की तलाश
मुख्य आरोपी और लोटस ग्रीन के मालिक निर्मल सिंह (निर्मल कुमार) अभी भी फरार हैं, जिनके खिलाफ कोर्ट ने गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया है और उनके दफ्तर को सील कर दिया गया है। पुलिस उनकी संपत्ति कुर्क करने की तैयारी में है।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है, जिसमें नोएडा अथॉरिटी के सीईओ (CEO) को हटा दिया गया है और संबंधित जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है। योगी सरकार द्वारा गठित SIT मामले की गहन जांच कर रही है और संभावना है कि आने वाले दिनों में कुछ और प्रशासनिक अधिकारियों और बिल्डरों की गिरफ्तारी हो सकती है।












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