पश्चिमी यूपी के कद्दावर गुर्जर नेता हैं नरेंद्र भाटी, मुलायम सिंह यादव के रहे हैं बेहद खास
पश्चिमी यूपी के कद्दावर गुर्जर नेता हैं नरेंद्र भाटी, मुलायम सिंह यादव के रहे हैं बेहद खास
लखनऊ, 17 नवंबर: पश्चिमी यूपी के कद्दावर गुर्जर नेता नरेंद्र भाटी आज (17 नवंबर) को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए। नरेंद्र भाटी ने लखनऊ स्थित भाजपा मुख्यालय पर पार्टी की सदस्यता ली। नरेंद्र भाटी, यूपी के पूर्व सीएम और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी माने जाते हैं। नरेंद्र भाटी के कई बार चुनाव हारने के बावजूद भी मुलायम सिंह यादव ने उनका साथ नहीं छोड़ा था। बुलंदशहर जिले के सिकंद्राबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान मुलायम सिंह यादव ने यहां तक कह दिया था कि 'आप इसे हराते रहो, मैं टिकट देता रहूंगा'।

कांग्रेस पार्टी से शुरू किया था राजनीति सफर
नरेंद्र भाटी, दादरी तहसील के बोड़ाकी गांव के रहने वाले है और उनके पिता का नाम प्रेम सिंह है। पांच साल तक नरेंद्र भाटी ने दादरी तहसील में बैनामा लेखक के रूप में काम किया। इसके बाद 1975 में नरेंद्र भाटी ने युवा कांग्रेस सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। 1980 में ब्लॉक प्रमुख चुने गए। इसके बाद वह जनता दल में शामिल हो गए। जनता दल के टिकट पर 1989, 1991 में चुनाव जीतकर विधायक बनें। इसके बाद नरेंद्र भाटी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।

सपा के टिकट पर सिकंद्राबाद सीट से जीते चुनाव
साल 1996 में नरेंद्र भाटी ने समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर बुलंदशहर जिले की सिकंदराबाद विधानसभा जीत से चुनाव लड़ा। चुनाव जीतकर नरेंद्र भाटी विधायक बने। हालांकि, इसके बाद से वो विधानसभा या लोकसभा चुनाव नहीं जीत सके। 7 मार्च 2016 को समाजवादी पार्टी ने उन्हें एमएलसी बनाया। इस दौरान वह यूपी स्टेट एग्रो इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष भी रहे। हालांकि, नरेंद्र भाटी ने बुलंदशहर की सिकंद्राबाद सीट से कई बार चुनाव भी लड़ा। लेकिन वो जीत नहीं सके।

मुलायम सिंह यादव ने नरेंद्र भाटी का नहीं छोड़ा साथ
इसके बावजूद मुलायम सिंह यादव ने नरेंद्र भाटी का साथ नहीं छोड़ा। बुलंदशहर जिले के सिकंद्राबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान मुलायम सिंह यादव ने यहां तक कह दिया था कि 'आप इसे हराते रहो, मैं टिकट देता रहूंगा'। हालांकि, अब नरेंद्र भाटी ने स्वयं ही समाजवादी पार्टी को छोड़ दिया है। नरेंद्र भाटी पश्चिमी यूपी के कद्दावर गुर्जर नेता हैं। नरेंद्र भाटी के सपा छोड़ने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गुर्जर राजनीति में नए समीकरण बनने की उम्मीद जताई जा रही है।

इन दिनों पश्चिमी यूपी में गरमाई हुई गुर्जर राजनीति
पश्चिमी यूपी में इन दिनों सम्राट मिहिर भोज प्रतिमा के विवाद को लेकर गुर्जर राजनीति गरमाई हुई है। वेस्ट यूपी के वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप त्यागी ने बताया कि
सम्राट मिहिर भोज पर जो विवाद छिड़ा हुआ है उसको लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) खुद को खतरे में महसूस कर रही थी। गुर्जरों को अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा ने नरेंद्र भाटी को बीजेपी में शामिल करने का दांव खेला है। उन्होंने बताया कि नोएडा के आस-पास, समय-समय पर गुर्जर महापंचायत हो रही थी, ऐसे में बीजेपी को डर था कि गुर्जरों की नाराजगी, विधानसभा चुनावों में भारी न पड़ जाए। भाजपा, सम्राट मिहिर भोज के विवाद में सीधे पड़ने बच रही है, क्योंकि ठाकुर और गुर्जर भाजपा का अपना वोट बैंक हैं।

सपा छोड़ने का नहीं पड़ेगा कोई फर्क
समाजवादी युवा जनसभा के पूर्व जिला अध्यक्ष (बुलंदशहर) जर्रार खान ने बताया कि
नरेंद्र भाटी के भाजपा में शामिल होने से पश्चिमी यूपी की राजनीति में कोई असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि एमएलसी का कार्यकाल अगले साल मार्च 2022 में खत्म हो रहा है, इसलिए वो पार्टी में बने हुए थे। नरेंद्र भाटी का पूरा परिवार भाजपा में है, इनके अब भाजपा में जाने से ना तो पार्टी को कोई फर्क पड़ेगा। ना ही विधानसभा चुनावों के नतीजों पर इसका कोई फर्क पड़ेगा। गुर्जर समाज पहले भी समाजवादी पार्टी के साथ था, है और रहेगा।












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