UP Nagar Nigam Election में होगी BJP RLD और Congress के नए सेनापतियों की अग्निपरीक्षा ?
उत्तर प्रदेश में Nagar Nigam Election के प्रचार ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। यूपी के सभी राजनीतिक दलों ने अपनी अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया है। इस चुनाव में असली इम्तिहान तो बीजेपी-रालोद-कांग्रेस में बने नए प्रदेश अध्यक्षों का होगा। 2024 चुनाव से पहले पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी इनके कंधों पर हैं। तीनों पार्टियों के नए प्रदेश अध्यक्षों ने अपने अपने तरीके से तैयारियां शुरू कर दी हैं। बसपा भी इस बार चुनाव लड़ रही है वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने इस बार नरेश उत्तम को ही दोबारा यूपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। उनके पास भी नगर निकाय में जीतने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

बीजेपी के नए बॉस भूपेंद्र चौधरी पर बड़ी जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश में नवंबर के अंत में या दिसम्बर की शुरुआत में नगर निगम के चुनाव हो सकते हैं। हालांकि आयोग की तरफ से इस चुनाव को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। यूपी में सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी ने हाल ही में भूपेंद्र चौधरी को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। इनके साथ ही संगठन मंत्री के पद पर भी बदलाव हुआ था और सुनील बंसल की जगह धर्मपाल सिंह सैनी ने ली थी। आम चुनाव से पहले यूपी के सभी 17 नगर निगमों में जीत दिलाने की जिम्मेदारी इन्हीं पर होगी। हालांकि पद पाने के बाद से भूपेंद्र चौधरी लगातार बैठकें करने में व्यस्त हैं और दावे कर रहे हैं कि बीजेपी नगर निगम चुनाव में अपना पिछला प्रदर्शन दोहराने में कामयाब होगी।

कांग्रेस के बृजलाल खाबरी क्या कर पाएंगे करिश्मा
कांग्रेस के आलाकमान ने हाल ही में यूपी में एक दलित नेता बृजलाल खाबरी को यूपी की कमान सौंपी थी। कांग्रेस यूपी में इस समय हाशिए पर है। लोकसभा चुनाव में केवल एक सीट रायबरेली ही जीत पाई थी। लोकसभा चुनाव के बाद प्रियंका गांधी को यूपी का प्रभार देकर कांग्रेस को खड़ा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई लेकिन विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस यूपी में करिश्मा नहीं कर पाई और केवल दो सीटों रामपुर खास और फरेंदा में जीत मिली थी। इस हार के बाद तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद लगातार मंथनकरने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने बृजलाल खाबरी को बड़ी जिम्मेदारी दी है। बृजलाल खाबरी ने हाल ही में अपना पदभार ग्रहण किया था तब कई सारे वरिष्ठ नेता इस कार्यक्रम से दूर ही रहे थे। ऐसे में नगर निगम का चुनाव भी खाबरी के लिए आसान नहीं होगा। 2024 के चुनाव से पहले यह उनकी प्रतिभा का लिटमस टेस्ट होगा।

रालोद के रामाशीष राय भी रणनीति बनाने में जुटे
बीजेपी-कांग्रेस के अलावा राष्ट्रीय लोकदल (RLD) ने भी चुनाव के बाद यूपी बीजेपी के युवा मोर्चा के अध्यक्ष रह चुके पूर्व एमएलसी रामाशीष राय को प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी थी। यह जिम्मेदारी भी आसान नहीं है। पद संभालने के बाद हालांकि रामाशीष राय ने पूरे यूपी में सदस्यता अभियान चला रखा है। इसमें भी ज्यादा फोकस पूर्वांचल में ही है। हालांकि कुछ दिनों पहले रामाशीष राय ने एक बयान देकर हलचल मचा दी थी। राय ने कहा था कि रालोद सपा के साथ मिलकर निकाय चुनाव नहीं लड़ेगी। हालांकि बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई दी थी। आरएलडी के सूत्रों की माने तो रालोद के सामने सबसे बड़ी चुनौती सपा के साथ सीटों के बंटवारे का है यदि वो सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है तो।

सपा के नरेश उत्तम साबित कर पाएंगे अपनी योग्यता ?
बीजेपी-आरएडी-कांग्रेस के अलावा यूपी की मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने अपने पुराने बॉस नरेश उत्तम पर ही भरोसा जताया है। हाल में लखनऊ में हुए पार्टी के अधिवेशन में नरेश उत्तम को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। नरेश उत्तम को एक मौका और मिला है अपनी क्षमता साबित करने का। इस चुनाव में उनके सामने सपा को आगे ले जाने की जिम्मेदारी होगी। नरेश उत्तम पर भी 2024 से पहले नगर निगम के चुनाव में पार्टी को जिताने का दबाव होगा। इस चुनाव को लेकर सपा ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सपा ने पूरे प्रदेश के लिए पर्यवेक्षकों की तैनाती कर दी है और जल्द ही टिकटों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

नगर निगम चुनाव में वापसी की तैयारी में बसपा
बसपा को स्थानीय निकाय चुनावों में अपने खोए हुए राजनीतिक क्षेत्र को फिर से हासिल करने में जुट गई है। हाल ही में सम्पन्न हुए यूपी चुनावों में बसपा का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था। नगर निगम के चुनाव के बहाने बसपा अपने कैडर के मनोबल को मजबूत करने की कोशिश में जुट गई है। पार्टी कुछ पूर्व विधायकों को यूएलबी में उतारने पर भी विचार कर रही है। 2017 के निकाय चुनावों में, बसपा ने दो नगर निगम सीटें - अलीगढ़ और मेरठ - जीतने में कामयाबी हासिल की थी। बाद में 2019 के लोकसभा चुनावों में सपा के साथ गठबंधन करके 10 सीटें जीती थीं।












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