Mulayam Singh Yadav: करहल के जिस कॉलेज से पढ़े नेताजी बाद में उसी में रहे शिक्षक, 120 रुपए थी सैलरी
Mulayam singh yadav passed away नेताजी के नाम से मशहूर मुलायम सिंह यादव के निधन से ना सिर्फ यादव परिवार बल्कि पूरी समाजवादी पार्टी अनाथ जैसी हो गई है, क्योंकि मुलायम सिंह यादव न सिर्फ यादव परिवार के मुखिया थे बल्कि वो समाजवादी पार्टी को भी अपना परिवार ही समझते थे। नेताजी तो अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके किस्से और उनकी उपलब्धियां हमेशा भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय रहेंगी।

शिक्षक भी रह चुके थे मुलायम सिंह यादव
यह बात तो हर कोई जानता है कि मुलायम सिंह यादव राजनीति में आने से पहले पहलवान थे और उनके पिताजी भी उन्हें पहलवान ही बनाना चाहते थे, लेकिन बहुत कम लोग यह बात जानते होंगे कि नेताजी एक समय पर स्कूल-कॉलेजों में शिक्षक भी थे और जिस तरह राजनीति में युवा पीढ़ी उन्हें अपना आदर्श मानती है, उसी तरह बतौर शिक्षक भी मुलायम सिंह यादव छात्रों के दिल पर छाप छोड़ते थे।

जिस कॉलेज से पढ़े उसी में पढ़ाने लगे थे नेताजी
आपको बता दें कि मुलायम सिंह यादव 1955 में मैनपुरी के करहल स्थित जैन इंटर कॉलेज में पढ़ते थे। इस कॉलेज से उन्होंने 1959 में बैचलर की डिग्री हासिल की थी और 1963 से वो इसी कॉलेज सहायक शिक्षक के तौर पर छात्रों को पढ़ाने लगे थे। वो उस वक्त 120 रुपए महीने की सैलरी लेते थे। बताया जाता है कि इस कॉलेज में उन्होंने हिंदी और सामाजिक विज्ञान के विषय पढ़ाया करते थे। बाद में उन्होंने पढ़ाते-पढ़ाते इसी कॉलेज से MA पॉलिटिकल साइंस की डिग्री प्राप्त कर ली।

बच्चों के पसंदीदा टीचर बन गए थे मुलायम
आपको बता दें कि जैन इंटर कॉलेज में मुलायम सिंह यादव को बतौर शिक्षक भी छात्रों ने खूब पसंद किया था। अपनी टीचिंग करियर में नेताजी स्कूल के अंदर बच्चों के पसंदीदा टीचर बन गए थे। बच्चों को उनके पढ़ाने का तरीका हर किसी को पसंद था। कहा जाता है कि वो कभी बच्चों पर सख्ती नहीं करते थे और शायद इसीलिए बच्चे उन्हें बहुत पसंद करते थे। कुछ साल की इस नौकरी के बाद नेताजी राजनीति में आ गए और 1968 में वो पहली बार जसवंत नगर सीट से विधायक बने। इसके बाद तो उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।












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