योगी के मंत्रिमंडल में दिखेगा मोदी के "विजन 2024" का अक्स, जानिए अमित शाह को क्यों सौंपी ये जिम्मेदारी
लखनऊ, 14 मार्च: उत्तर प्रदेश में चुनाव के बाद अब योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में बनने वाली नई सरकार के मंत्रिमंडल को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। पीएम मोदी ने यूपी की सरकार का खाका खींचने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद और कभी यूपी के प्रभारी रहे देश के गृहमंत्री अमित शाह को अहम जिम्मेदारी सौंपी। शाह के यूपी आने के पीछे बीजेपी की सोची समझी रणनीति है। अमित शाह का यूपी का पर्यवेक्षक बनकर यूपी में आना इस बात की ओर इशारा करता है कि मोदी इस बार योगी के मंत्रिमंडल में किसी तरह की चूक नहीं होने देना चाहते हैं। एक तरह से कहा जाए तो अमित शाह की देखरेख में यूपी में बनने वाले मंत्रिमंडल में मोदी के विजन 2024 का अक्स दिखाई देगा।

डिप्टी सीएम के नामों पर चल रही अटकलों पर लगेगा विराम
यूपी में भाजपा की जीत के बाद से ही यूपी में नए मंत्रिमंडल के गठन को लेकर कवायद तेज हो गई है। पिछले दो तीन दिनों से लखनऊ में सत्ता के गलियारे में कई नाम तैर रहे हैं। कुछ नाम डिप्टी सीएम को लेकर हैं तो कुछ कैबिनेट मंत्रियों को लेकर। लेकिन अमित शाह का आना ही इस बात का सबूत है कि मोदी इस बार फूंकफूंक कर कदम रखना चाह रहे हैं। योगी की पिछली सरकार में कुछ नामों को शामिल करने को लेकर काफी खींचतान चली थी। इस बार जो भी नाम होंगे उसपर अमित शाह मजबूती से मुहर लगाएंगे। मोदी के विजन को लेकर अमित शाह मंगलार को लखनऊ पहुंच सकते हैं और विधायक दल की बैठक में योगी को नेता चुना जा सकता है।

गृहमंत्री को यूपी का पर्यवेक्षक बनाया जाना बड़े बदलाव के संकेत
यूपी चुनाव के बाद अमित शाह का यूपी का पर्यवेक्षक चुना जाना अपने आपमें एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। यह बदलाव क्या होगा वह तो एक दो दिन में पता चल जाएगा लेकिन सत्ता के गलियारों में इस बात की चर्चा है कि अमित शाह मोदी के उस विजन का खाका लेकर पहुंचेंगे जिसके तहत दो साल बाद मिशन 2024 की लड़ाई लड़ा जाना है। अमित शाह के साथ ही देश के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को उत्तराखंड का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। राजनीतिक पंडितों की माने तो बीजेपी के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि गृहमंत्री और रक्षामंत्री स्तर के नेताओं को पयवेक्षक बनाया गया है।

लोकसभा चुनाव में अमित शाह को बनाया गया था पश्चिम का प्रभारी
बीजेपी ने चुनाव के दौरान भी यूपी में बड़े नामों को पर्यवेक्षक बनाया था। अमित शाह को पश्चिमी यूपी का प्रभार दिया गया था जबकि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को अवध की जिम्मेदारी दी गई थी। उसी तरह राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को गोरक्षप्रांत का प्रभारी बनाया गया था। पर्यवेक्षक बनने के बाद जिस तरह अमित शाह ने पश्चिमी यूपी में काम किया और डोर टू डोर कैंपने किया उससे बीजेपी को काफी फायदा मिला था। बीजेपी पहले ही पश्चिमी यूपी में किसान आंदोलन और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत की चालों से डरी हुई थी। ऐसे में अमित शाह ने पश्चिमी यूपी की कमान संभालकर जाटों की नाराजगी दूर की और दूसरी ओर कैराना से पलायन का मुद्दा उठाकर पश्चिमी यूपी में नया एजेंडा सेट किया था। अब एक बार फिर पर्यक्षेक बनकर यूपी आना बीजेपी की बड़ी रणनीति की ओर इशारा कर रहा है।

अमित शाह का पर्यवेक्षक बनकर आना बड़ी रणनीति की ओर इशारा
यूपी हमेशा ही बीजेपी के लिए काफी अहम रहा है और विधानसभा जीत के बाद अब पार्टी ने अपने निगाहें अगले आम चुनाव पर टिका दी हैं। अमित शाह के बयानों पर गर्व करें तो उन्होंने अपनी रैलियों में कहा था कि मोदी को 2024 में पीएम बनाने के लिए 2022 में योगी का सीएम बनना बहुत जरूरी है। योगी के नेतृत्व में अब यूपी में बीजेपी की सरकार तो बनने जा रही है लेकिन मिशन 2024 को लेकर बीजेपी अब किस रास्ते ओर किन महारथियों को लेकर आगे बढ़ेगी उसकी तस्वीर योगी मंत्रिमंडल में दिखेगी। इसपर मुहर लगाने के लिए अब अमित शाह खुद लखनऊ आएंगे। राजनीतिक पंडितों की माने तो गृहमंत्री को बीजेपी का पर्यवेक्षक बनाकर यूपी भेजना अपने आप में इस बात का संकेत है कि बीजेपी की निगाहें अब 2024 पर ही टिकी हैं और उसी का अक्स योगी के मंत्रिमंडल में दिखायी देगा।

योगी ने दिल्ली में मोदी-अमित शाह से की थी मुलाकात
यूपी में जीत के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ दिल्ली पहुंचे थे। पिछले दो दिनों के दौरान उन्होंने पीएम मोदी और सीएम योगी समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। इस दौरान योगी और पीएम मोदी की मुलाकात करीब पौने दो घंटे तक चली थी और इसमें यूपी की रणनीति और अगले आम चुनाव को लेकर काफी चर्चा की गई थी। मोदी ने अपने सबसे खास अमित शाह को यूपी की जिम्मेदारी सौंपी है जिससे ये स्पष्ट है कि इस बार मंत्रिमंडल के चयन में मोदी की ही चलेगी और वह आम चुनाव से पहले किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते हैं।












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