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Indrajeet Saroj Controversy: मंदिरों की ताकत नापने वाले MLA इंद्रजीत सरोज कौन हैं? जानिए पूरी प्रोफाइल

MLA Indrajeet Saroj Controversy: उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त एक नया भूचाल आया जब समाजवादी पार्टी के फायरब्रांड विधायक इंद्रजीत सरोज ने हिन्दू देवी-देवताओं और मंदिरों को लेकर बयान दिया। इसके बाद सियासत का पारा हाई हो गया और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया।

कौन हैं अखिलेश यादव के ये विधायक जिन्होंने हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की जिस पर बीजेपी ने कड़ा विरोध किया। आईए समाजवादी पार्टी के प्रमुख दलित चेहरे में से एक इंद्रजीत सरोज के बारे में विस्तार से जानते हैं...

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Indrajeet Saroj: छात्र राजनीति से प्रमुख दलित चेहरा तक

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जब भी दलित नेतृत्व की बात होती है, तो एक नाम जो तेजी से उभर कर सामने आता है वो है इंद्रजीत सरोज। बहुजन समाज पार्टी के पूर्व मंत्री और अब समाजवादी पार्टी के फायरब्रांड विधायक, सरोज की राजनीतिक यात्रा महज एक नेता की कहानी नहीं, बल्कि दलित चेतना और सामाजिक न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन चुकी है।

इंद्रजीत सरोज का जन्म उत्तर प्रदेश के कौशांबी (तत्कालीन इलाहाबाद) जिले के एक दलित परिवार में हुआ था। समाज में फैली भेदभाव की जंजीरों को तोड़ते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और सामाजिक आंदोलनों से जुड़ गए। छात्र राजनीति से लेकर दलित जागरूकता अभियानों में उनकी भूमिका हमेशा सक्रिय रही। बहुजन समाज पार्टी के शुरुआती दिनों में ही वे कांशीराम और मायावती के करीबी माने जाने लगे।

MLA Indrajeet Saroj Statement: बीएसपी से शुरू किया राजनीतिक करियर

इंद्रजीत सरोज ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से की, जो कांशीराम और मायावती के नेतृत्व में दलितों के अधिकारों के लिए संघर्षरत थी। 1996 में उन्होंने मंझनपुर विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए और इसके बाद 2002, 2007 और 2012 में भी इस सीट से विजयी रहे। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी सेवा दी।​

1996 से 2012 तक इंद्रजीत सरोज को बीएसपी ने लगातार ताकतवर भूमिका में रखा। वे कई बार विधायक बने और मायावती सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री पदों पर रहे। श्रम, समाज कल्याण और खाद्य आपूर्ति जैसे विभागों की जिम्मेदारी उन्होंने संभाली। मगर 2017 में हालात बदले और सरोज को पार्टी में उपेक्षित महसूस होने लगा और यही कारण था कि उन्होंने बीएसपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।

MLA Indrajeet Saroj समाजवादी पार्टी में दलित वोट का प्रमुख चेहरा

इंद्रजीत सरोज को अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया और 2022 में विधानसभा चुनावों के दौरान उन्हें मानिकपुर सीट से विधायक बनाया गया। दलित समाज में उनकी पकड़ और जमीनी नेटवर्क को अखिलेश ने एक 'एसेट' के तौर पर पहचाना। अखिलेश यादव के नेतृत्व में एसपी जिस तरह से 'सामाजिक न्याय' की राजनीति को आगे बढ़ा रही है, उसमें सरोज की भूमिका अब सिरे से केंद्रीय होती जा रही है।

दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति

उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक एक निर्णायक भूमिका निभाता है। बीएसपी की गिरती पकड़ के बीच समाजवादी पार्टी इस वर्ग को साधने की पुरज़ोर कोशिश कर रही है और इंद्रजीत सरोज इसका सबसे अहम चेहरा हैं। उनके भाषणों में अब बीएसपी पर सीधा हमला दिखाई देता है।

सरोज की लोकप्रियता का बड़ा कारण उनका जमीन से जुड़ा व्यवहार और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी है। चाहे कोविड काल में राहत कार्य हो या किसानों और मजदूरों के हक़ की लड़ाई - इंद्रजीत सरोज हमेशा फ्रंटफुट पर नजर आते हैं। प्रयागराज, चित्रकूट और कौशांबी जिलों में उन्हें "जन नेता" की तरह देखा जाता है।

Indrajeet Saroj की संपत्ति और कानूनी स्थिति

इंद्रजीत सरोज की कुल संपत्ति लगभग ₹14.33 करोड़ है, जिसमें चल संपत्ति ₹6.10 करोड़ और अचल संपत्ति ₹8.23 करोड़ शामिल है। उनके खिलाफ दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। ​

14 अप्रैल 2025 को अंबेडकर जयंती के अवसर पर एक कार्यक्रम के दौरान इंद्रजीत सरोज ने मंदिरों की शक्ति पर टिप्पणी की, जिससे राजनीतिक विवाद उत्पन्न हुआ। भाजपा ने इस बयान को सनातन आस्था पर आघात बताते हुए उनकी आलोचना की और माफी की मांग की। ​

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