मिर्जापुर: सपा के मौजूदा MLA के खिलाफ कांग्रेस ने उतारा अपना प्रत्याशी, फिर कमजोर दिखा गठबंधन

भाईलाल कोल मुलायम और अखिलेश दोनों की लिस्ट में थे। कांग्रेस से गठबंधन के बाद जारी लिस्ट में भी उनका नाम था। इसके बाद भी इस सीट पर कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित कर दिया है।

मिर्जापुर। 'यूपी को ये साथ पसंद है' नारे के साथ अखिलेश और राहुल ने सपा-कांग्रेस का गठबंधन किया तो इस साथ के चलते जो सीट सपा के खाते में गई है अब वहां कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी उतार दिया। मिर्जापुर के छानबे सीट, जिस पर सपा के वर्तमान विधायक भाईलाल कोल हैं। यहां से सपा ने उन्हें अपना प्रत्याशी बनाया। तो इस सीट पर गठबंधन के बावजूद कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और प्रदेश उपाध्यक्ष भगवती चौधरी को प्रत्याशी बना दिया। इसे लेकर क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में उहापोह की स्थिति बन गई है।

मिर्जापुर: सपा के मौजूदा MLA के खिलाफ कांग्रेस ने उतारा अपना प्रत्याशी, फिर कमजोर दिखा गठबंधन

लोगों में भी भ्रम की स्थिति है कि आखिर किस नेता का साथ दिया जाए। भाईलाल कोल मुलायम और अखिलेश दोनों की लिस्ट में थे। कांग्रेस से गठबंधन के बाद जारी लिस्ट में भी उनका नाम था। इसके बाद भी इस सीट पर कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित कर दिया है। दोनों नेता गठबंधन के प्रत्याशी होने की बात कह रहे हैं। ऐसे में गठबंधन का क्या होगा?

मिर्जापुर: सपा के मौजूदा MLA के खिलाफ कांग्रेस ने उतारा अपना प्रत्याशी, फिर कमजोर दिखा गठबंधन

क्या कहना है भगवती चौधरी का?

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष भगवती चौधरी का कहना है कि गठबंधन से पहले चुनाव लड़ने की तैयारी थी। गठबंधन के बाद पार्टी ने उन्हें छानबे विधानसभा से प्रत्याशी घोषित किया है। अब पार्टी ने प्रत्याशी बनाया है तो गठबंधन के प्रत्याशी वही हैं। उनका नामांकन पत्र ले लिया गया है और 13 तारीख को नामांकन किया जाएगा।

मिर्जापुर: सपा के मौजूदा MLA के खिलाफ कांग्रेस ने उतारा अपना प्रत्याशी, फिर कमजोर दिखा गठबंधन

क्या कहना है विधायक भाईलाल कोल का?

सपा के वर्तमान विधायक भाईलाल कोल पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी बनाया है। उन्हें पार्टी का सिंबल भी मिल गया है। पार्टी हाईकमान ने चुनाव लड़ने का आदेश दिया है। हाईकमान के आदेश के अनुसार चुनाव की तैयारी चल रही हैं। 13 को वो भी नामांकन करेंगे।

मिर्जापुर: सपा के मौजूदा MLA के खिलाफ कांग्रेस ने उतारा अपना प्रत्याशी, फिर कमजोर दिखा गठबंधन

इन परिस्थितियों से कोई भी बन सकता है बागी!

अभी तो दोनों नेता गठबंधन के प्रत्‍याशी होने का दावा कर रहे हैं। दोनों अपने-अपने नामांकन पर अड़े हैं लेकिन फैसला तो किसी एक के ही पक्ष में जाना है। तो इन परिस्थितियों में दूसरा बागी हो सकता है। लेकिन बगावत का भी सही समय तलाशना चुनौतीपूर्ण है।

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