Milkipur by-election: बीजेपी ने ढूंढ ली सपा के PDA की काट! चंद्रभान पासवान पर इतना भरोसा क्यों?
Milkipur by-election: मिल्कीपुर विधानसभा उप चुनाव को लेकर बीजेपी कैंडिडेट घोषित होने साथ ही इस हॉट सीट के चुनावी समीकरणों पर एक बार पर चर्चा तेज हो गई। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में बाबा गोरखनाथ मिल्कीपुर सीट से जीतकर लखनऊ पहुंचे थे। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां चौंकाने वाले चुनावी परिणाम आए। दावा किया गया कि समाजवादी पार्टी अयोध्या लोकसभा सीट पर पीडीए समीकरण सेट करने में सफल हो गई। तो क्या इस बार उप चुनाव में यूपी की हॉट सीट बनी मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर पीएडीए को ध्वस्त करने में कामयाब हो पाएगी? बीजेपी के कैंडिडेट्स चंद्रभान पासवान का नाम पार्टी की ओर से घोषित किए जाने के साथ ही ऐसे कई दावे किए जा रहे हैं।
यूपी की मिल्कीपुर विधानसभा सीट का गठन 1967 में हुआ। इस सीट पर जब पहली बार चुनाव हुआ, तो यहां कांग्रेस के उम्मीदवार रहे रामलाल मिश्रा निर्वाचित हुए थे। महज दो साल बाद 1969 में यूपी विधानसभा चुनाव में जनसंघ (अब भारतीय जनता पार्टी) के उम्मीदवार हरिनाथ तिवारी यहां से जीते थे। 1991 में एक बार फिर भाजपा को यहां जीत नसीब हुई थी। जिसके बाद 24 वर्ष तक यहां कोई बीजेपी कैंडिडेट नहीं जीता।

मिल्कीपुर सीट इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि लोकसभा चुनाव 2024 में सपा के अवधेश प्रसाद के सांसद चुने जाने के बाद खाली हुई थी। इससे पहले नेता प्रसाद मिल्कीपुर सीट से विधायक थे। अब इस सीट पर भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर है।
जातीय समीकरण
मिल्कीपुर सीट पर करीब 3 लाख 58 हजार वोटर हैं। जातीय समीकरणों पर नजर डालें तो यहां दलित वोट अहम भूमिका निभाते हैं। इस सीट पर 3.5 लाख पात्र मतदाताओं में से 1.2 लाख दलित, करीब 55,000 यादव (ओबीसी) और 30,000 मुस्लिम वोटर्स हैं। इसके अलावा यहां 60 हजार ब्राह्मण, 55 हजार पासी, 25 हजार ठाकुर, 25 हजार दलित, 50 हजार कोरी, चौरसिया, पाल और मौर्य समाज के लोग हैं।
क्या कहते हैं पॉलिकल एक्सपर्ट?
मिल्कीपुर सीट के चुनावी समीकरण को जिक्र हो रहा है, तो इस बात की चर्चा जरूरी है कि यहां जीत किस वर्ग के समर्थन से सुनिश्चित है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जो भी पार्टी ब्राह्मणों, क्षत्रियों के अलावा ओबीसी और दलित वर्ग का समर्थन हासिल करने में सफल होगी, उसकी की जीत होगी।












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