अयोध्या विवाद से इतर एक कहानी: रामलला की सुरक्षा से सदरी तक, 3 मुसलमान संभालते हैं ये खास जिम्मेदारियां
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अयोध्या। राम जन्मभूमि से जुड़ा विवाद तो हर कोई जानता है लेकिन शायद ही कोई ये जानता होगा पिछले दो दशकों से भी ज्यादा समय से राम लला का वस्त्र तैयार करने से लेकर सुरक्षा और रोशनी की जिम्मेदारी तीन मुस्लिमों के कंधे पर है। जब कभी आंधी, तेज बारिश या तूफान की वजह से राम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा में लगे कंटीले तार टूट जाते हैं तो पीडब्लूडी अब्दुल वाहिद को याद करता है। इतना ही नहीं राम लला के लिए जब कपड़े सिलने होते हैं तो सादिक अली उनके लिए कुर्ता, सदरी, पगड़ी और पायजामे सिलते हैं। वहीं महबूब मंदिरों में 24 घंटे बिजली की व्यवस्था देखते हैं। आज (5 दिसंबर 2017) को जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर सुनवाई हो रही है। इसी बीच ये बातें चर्चा में हैं। तो विस्तार से जानिए।

राम लला को परेशानी में देख दौड़ पड़ते हैं ये तीनों मुस्लिम
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक 38 साल के अब्दुल वाहिद पेशे से वेल्डर हैं। वो 250 रुपए रोजना पर मंदिर की सुरक्षा में मदद करते हैं। आंधी, बारिश या तूफान में जब कभी भी कंटीली तारें टूट जाती हैं तो उसे वाहिद ही वेल्डिंग करते हैं। वाहिद अपने पेशे और काम से काफी खुश हैं और उन्हें इसपर गर्व है।

क्या कहना है अब्दुल वाहिद का
अब्दुल वाहिद ने बताया कि 'मैंने मंदिर का काम 1994 में करना शुरू किया था। उस वक्त मैंने वेल्डिंग का काम अपने पिता से सीखा था। उन्होंने कहा कि मैं एक भारतीय हूं और सभी हिंदू मेरे भाई हैं। वाहिद ने बताया कि मैं सामान कानपुर से लेकर आता हूं और उसे मंदिर के आसपास फिट कर देता हूं। साल 2005 में राम जन्मभूमि मंदिर पर हुए लश्कर के हमले को याद करते हुए वाहिद बताते हैं, 'उस हमले के बाद से मैंने कई बैरियर बनाए हैं और मंदिर के बाहर उनकी रिपेयरिंग करता रहता हूं। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। मेरी तरह अनेक सीआरपीएफ और पुलिस के जवान 24 घंटे मंदिर की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।'

राम लला और मंदिर के मुख्य पुरोहित के लिए कपड़ा सिलते हैं सादिक अली
दूसरे मुस्लिम युवक सादिक अली की बात करें तो वह पेशे से दर्जी हैं। सादिक पिछले काफी समय से रामलला की मूर्ति के लिए कपड़े सिलने का काम कर रहे हैं। अखबार ने सादिक के हवाले से लिखा है कि उन्हें यह काम राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी सौंपते हैं जिसे वह बहुत ही मन लगा कर करते हैं।

क्या कहना है सादिक अली का
सादिक अली ने बताया, 'पिछले 50 सालों से मेरा परिवार सिलाई का काम कर रहा है और हम पुजारियों और साधु-संतों सहित हिंदुओं के लिए कपड़े सिलने का काम करते हैं। मैं राम जन्मभभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद के बाद से इनके सभी याचिकाकर्ताओं के लिए सदरी बनाता हूं। इनमें रामचंद्र दास परमहंस से लेकर हनुमानगढ़ी मंदिर के वर्तमान अध्यक्ष रमेश दास शामिल हैं। लेकिन मुझे सबसे ज्यादा संतुष्टि तब मिलती है जब मैं रामलला के लिए वस्त्र तैयार करता हूं।' 57 साल के अली की दुकान 'बाबू टेलर्स' हनुमानगढ़ी की जमीन पर ही बनी हुई है और इसके लिए वह मंदिर को हर महीने 70 रुपया किराया देते हैं।

सीता कुंड के पास सामुदायिक रसोई के लिए पानी की थी महबूब ने
तीसरा शख्स महबूब है जो कि मंदिर में बिजली के काम को देखते हैं। महबूब के अनुसार, 1995 में सीताकुंड के पास सामुदायिक रसोई के लिए पानी की व्यवस्था उन्होंने ही मोटर लगाकर की थी। उसके बाद से ही वह मंदिर में बिजली की व्यवस्था देखने का काम करते हैं।












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