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ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा- मायावती के सीएम रहते उनके भाई-भाभी को 46 प्रतिशत छूट पर मिले थे 261 फ्लैट्स

लोकसभा चुनाव के पहले उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रहीं। उनके परिवार पर भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगा है। इससे पहले भी उनके ऊपर आय से अधिक संपत्ति का केस चल चुका है।

अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में मायावती के परिवार से संबंधित खुलासा किया है। जिसमें बताया गया कि उनके भाई आनंद कुमार और भाभी विचित्र लता को नोएडा के एक अपार्टमेंट में गलत तरीके से 261 फ्लैट आवंटित किए गए। हैरानी की बात ये है कि उन्हें पूरे 46 प्रतिशत की छूट दी गई थी।

Mayawati

दरअसल जब मायावती यूपी की मुख्यमंत्री थीं, तो रियल एस्टेट फर्म लॉजिक्स इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड ने नोएडा में एक अपार्टमेंट बनवाया। उसी में उनके भाई और भाभी को कम दाम पर बड़ी संख्या में फ्लैट दिए गए। फिलहाल अब ये कंपनी दिवालिया हो गई है। ऐसे में जब इसके दस्तावेजों का ऑडिट किया गया, तो ये खुलासा हुआ।

रिपोर्ट के मुताबिक 2007 में मायावती पूर्ण बहुमत के साथ जीतकर आई थीं। उसके तीन साल बाद 2010 में इस कंपनी की स्थापना हुई। स्थापना के साथ ही कंपनी ने मायावती के परिवार पर मेहरबानी शुरू कर दी, जहां दो ही महीने के अंदर नोएडा के ब्लॉसम ग्रीन्स प्रोजेक्ट में 2300 और 2350 रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से करीब 2 लाख वर्ग फीट जगह बेचने का एक समझौता मायावती के भाई-भाभी से हुआ।

वैसे तो इस जगह की कीमत काफी ज्यादा थी, लेकिन कंपनी ने तत्कालीन सीएम के परिवार पर मेहरबानी दिखाई। इसके लिए उन दोनों से 46-46 करोड़ के आसपास रकम ली गई।

अब कंपनी ने सीएम के परिवार पर मेहरबानी की थी, तो सरकार को भी उसके लिए कुछ करना था। ऐसे में यूपी सरकार के अंतर्गत आने वाले नोएडा प्राधिकरण ने लॉजिक्स इंफ्राटेक को ब्लॉसम ग्रीन्स में 22 टावर बनाने की इजाजत दी। इसके लिए उसको बकायदा 24.74 एकड़ जमीन लीज पर दी गई।

खुलासे के मुताबिक कंपनी ने नोएडा में कुल 2538 फ्लैट बनाए थे, जिसमें 2329 बेच दिए गए। मायावती के परिवार की ओर से 28-28 करोड़ का अग्रिम भुगतान किया गया। जिसके तहत उनके भाई को 135 और भाभी को 126 (कुल-261) फ्लैट मिले।

इस कंपनी के बुरे दिन 2020 में शुरू हुए। पहले तो उसका काम रुका, फिर उसने निर्माण करने वाली कंपनी के भुगतान में असमर्थता जता दी। जिसके बाद मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) पहुंचा और 2022 में कंपनी के दिवालिया होने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद जब कंपनी का ऑडिट शुरू हुआ तो सारी पोल खुल गई।

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