Narendra Giri: नरेंद्र गिरि को दी गई भूसमाधि, जानिए इस परंपरा के बारे में विस्तार से
प्रयागराज, 22 सितंबर। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी मठ के महंत नरेंद्र गिरि को आज भूसमाधि दी गई।नरेंद्र गिरि ने सोमवार शाम को बाघंबरी मठ के अपने कमरे में फांसी लगा ली थी। उनके पास से एक सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि 'वो अपने शिष्य आनंद गिरि की वजह से वो मानसिक कष्ट से जूझ रहे थे, उन्हें बदनामी का डर था और इसी कारण वो अब अपनी जीवनलीला समाप्त कर रहे हैं।' नरेंद्र गिरि के इस सुसाइड नोट के बाद आनंद गिरि को अरेस्ट किया गया और आज उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
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महंत नरेंद्र गिरि को दी गई भूसमाधि
मंगलवार को महंत नरेंद्र गिरि का पोस्टमार्टम हुआ था, जिसमें उनकी मौत का कारण फांसी लगना ही बताया गया है। उसके बाद उनके पार्थिव शरीर को मठवालों ने आज आम लोगों के अंतिम दर्शन के लिए रखा था और उनकी रथ यात्रा भी निकाली थी। मठ वाले आज भी चाहते थे कि नरेंद्र गिरि का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाए लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद से पार्थिव शरीर को काफी देर तक रखना सही नहीं होता है इसलिए नरेंद्र गिरि का अंतिम संस्कार आज ही हो जाना चाहिए।

बाघंबरी मठ में नींबू के पेड़ के नीचे भूसमाधि
जिसके बाद नरेंद्र गिरि को भूसमाधि दी गई। नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड लेटर में लिखा था कि 'उन्हें बाघंबरी मठ में अपने गुरु के ही बगल में भूसमाधि दी जाए'।इसी वजह से उन्हें बाघंबरी मठ में नींबू के पेड़ के नीचे उनके गुरुदेव के बगल में समाधि दी गई है।

भूसमाधि की प्रक्रिया रखी जाती है गुप्त
भूसमाधि से पहले उनके पार्थिव शरीर को फूलों से सजे रथ पर रखकर संगम स्नान कराया गया, उसके बाद उनके शरीर को दर्शन के लिए हनुमान मंदिर लाया गया और फिर बाघंबरी मठ लाया गया, जहां उन्हें भूसमाधि देने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। जिसे पूरे विधि-विधान से किया गया है। इस प्रकिया को काफी गुप्त रखा जाता है, इस दौरान केवल साधु-संत ही होते हैं इसलिए जहां भूसमाधि देने की प्रक्रिया चल रही थी, उस स्थान को केसरिया कपड़े से ढ़क दिया गया और प्रशासन और मीडिया वालों से अपील की गई कि कृपया यहां की तस्वीरें ना लें।

समाधि सिद्धासन अवस्था में दी जाती है
मालूम हो कि जिस नींबू के पेड़ के नीचे नरेंद्र गिरि को समाधि दी गई है वो पेड़ नरेंद्र गिरि ने ही मठ में लगाया था। जिस वक्त नरेंद्र गिरि को समाधि दी गई, उस वक्त माहौल एकदम गमगीन था। कई साधुगण रोते हुए दिखाई दिए। नींबू के पेड़ के नीचे एक गड्डाखोदा गया और वहां पर एक छोटा सा कमरा सा बनाया गया, उसी में नरेंद्र गिरि को समाधि दी गई। मालूम हो कि समाधि सिद्धासन अवस्था में दी जाती है।

सुसाइड नोट में भूसमाधि की इच्छा
गौरतलब है कि संतों का अंतिम संस्कार तीन तरह से होता है, पहला 'दाह संस्कार', दूसरा 'भूसमाधि' और तीसरा 'जल समाधि।' चूंकि नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में भूसमाधि की इच्छा व्यक्त की थी इसलिए उन्हें भूसमाधि दी गई है। भूसमाधि के लिए उस स्थान को चिह्नित किया जाता है, जहां भूसमाधि देनी होती है।
भूसमाधि के पीछे ये है कारण
फिर उस स्थान को खोदा जाता है एक कमरानुमा स्थान बनाया जाता है। फिर उसे गंगाजल से पवित्र किया जाता है और फिर उसे मंत्रों से शुद्ध किया जाता है। फिर संत को सिद्धासन अवस्था में समाधि दी जाती है। इस परंपरा के पीछे कारण होता है कि उस संत के शिष्य और अनुयायी उनके बारे में और उनके आदर्शों को समाधि स्थल से जान सकें।












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