'हम तो डूबेंगे, तुमको भी...' मायावती ने बिगाड़ा इंडिया ब्लॉक का खेल? छोड़ देतीं जिद तो आज होती कुछ अलग तस्वीर!

Mayawati Factor in UP: भाजपा ने इस लोकसभा चुनाव में 240 सीटें जीती हैं जो उनके निर्धारित आंकड़ों से काफी कम है। साथ ही साथ पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले बीजेपी को सीटों का भारी नुकसान हुआ है। 2019 में भाजपा ने अकेले 303 सीटें जीती थी।

हालांकि गठबंधन के पास तीसरी बार सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें हैं लेकिन बहुत हद तक यह संभव था कि अगर मायावती की बसपा इंडिया ब्लॉक का हिस्सा होती तो बीजेपी के हिस्से और कम सीटें आतीं। हालांकि, बसपा यूपी में अपना खाता भी नहीं खोल पाई है।

Mayawati factor in UP election

इस बार भाजपा को जिन सीटों का नुकसान हुआ है उसमें से एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश की सीटों का है। यूपी एक ऐसा राज्य है जहां 2014 की 'मोदी लहर' के बाद से बीजेपी का वर्चस्व रहा है। 2019 में पार्टी ने लगभग 50 फीसदी वोट शेयर के साथ 62 सीटें जीती थी। इस बार पार्टी का वोट शेयर गिरकर 41.3 फीसदी रह गया।

यूपी लोकसभा चुनाव में मायावती फैक्टर

बसपा ने इस लोकसभा चुनाव में 79 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। मायावती की पार्टी का राज्यभर में वोट शेयर 9.4 प्रतिशत रहा और पार्टी के खाते में एक भी सीट नहीं आई।

हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि भाजपा या उसकी सहयोगी पार्टी द्वारा जीती गईं सभी 16 सीटों पर पूर्व मुख्यमंत्री की पार्टी को जीत के अंतर से अधिक वोट मिले। यदि वह विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक का हिस्सा होतीं तो भाजपा के सीटों का स्कोर और बिगड़ सकता था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंडी ब्लॉक ने मायावती को गठबंधन का हिस्सा बनाने की पहल भी कि थी लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।

यहां जिन 16 सीटों की बात हम कर रहे हैं वो हैं, अकबरपुर, अलीगढ, अमरोहा, बांसगांव, भदोही, बिजनोर, देवरिया, फर्रुखाबाद, फतेपुर सीकरी, हरदोई, मेरठ, मिर्ज़ापुर, मिश्रिख, फूलपुर, शाहजहांपुर और उन्नाव। इनमें से बीजेपी को 14 और एडीएस को दो सीटें मिलीं हैं।

कुछ सीटों, जैसे बांसगांव, फर्रुखाबाद और फूलपुर में जीत का अंतर 5,000 वोटों से कम रहा। जबकि इन सीटों से हारने वाले बसपा उम्मीदवारों को 5000 से ज्यादा वोट मिले थे। बांसगांव में बसपा प्रत्याशी को 64,000, फर्रुखाबाद में 45,000 और फूलपुर में 82 हजार से अधिक वोट मिले।

मेरठ में बीजेपी उम्मीदवार अरुण गोविल ने जीत दर्ज की जबकि सपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहीं। यहां जीत का अंतर 10,585 वोट रहा तीसरे स्थान पर रहे बसपा उम्मीदवार को 87,025 वोट मिले।

बात करें भदोही सीट की तो यहां इंडी गठबंधन की ओर से तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी को भाजपा ने 44,072 वोटों के अंतर से हराया। इस सीट से बसपा उम्मीदवार जो तीसरे स्थान पर रहे, उन्हें 1.55 लाख से अधिक वोट मिले।

अगर मायावती की पार्टी भी इंडी गठबंधन का हिस्सा होती तो मुमकिन था कि इन सीटों पर इंडिया ब्लॉक का कब्जा होता। ऐसी स्थिति में इन सीटों को हारने के बाद भाजपा के पास 224 सीटें होतीं और एनडीए के पास केवल 277 सीटें होतीं। ऐसे में ये सीटें बहुमत से केवल पांच अधिक होतीं और बहुत मुमकिन था कि जोड़-तोड़ की राजनीति से सरकार का चेहरा बदल सकता था।

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मायावती, 'किंगमेकर्स' और I.N.D.I.A के साथ होने पर कैसी होती तस्वीर?

इस बार एनडीए में आंध्र प्रदेश के आने वाले मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी और उनके बिहार समकक्ष नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) 'किंगमेकर' की भूमिका निभा रहे हैं। टीडीपी की 16, जेडीयू की 12 और शिव सेना की 7 सीटों के बदौलत एनडीए लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है।

बीजेपी गठबंधन से टीडीपी और जेडीयू की 28 सीटों को हटा दें तो एनडीए के पास 265 सीटें बचती हैं जो नरेंद्र मोदी के लिए इस सप्ताह के अंत में ऐतिहासिक लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ लेने के लिए पर्याप्त नहीं है।

भाजपा नायडू और नीतीश कुमार के महत्व से अवगत है। ये भी एक कारण है कि नरेंद्र मोदी द्वारा मंगलवार को अपने विजय भाषण में उनका विशेष उल्लेख किया गया। सूत्रों की मानें तो भाजपा ने लिखित समर्थन पत्र हासिल करके दोनों 'किंगमेकर्स' के बीच जितना संभव हो सके समझौता कर लिया है। मोदी अब इस सप्ताह के अंत में प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। वो जवाहरलाल नेहरू के बाद केवल दूसरे तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले शख्स होंगे।

अगर मायावती ने इंडी ब्लॉक से गठबंधन किया होता तो शायद ये तस्वीर बदल सकती थी।

इंडिया ब्लॉक ने क्या कहा?

ऐसी अटकलें थी कि इन 28 सीटों को पलटने की कोशिश में इंडी ब्लाक नायडू और नीतीश कुमार से संपर्क करेगी। हालांकि ये सरकार का दावा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता लेकिन भाजपा के पैरों के नीचे से कालीन जरूर खींच देता।

कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि विपक्ष "भाजपा द्वारा शासित न होने की लोगों की इच्छा को साकार करने के लिए उचित समय पर उचित कदम उठाएगा"।

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