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यूपी: बीएचयू में लाठीचार्ज की बरसी पर आंदोलित हुए स्टूडेंट, एक बार फिर आमने-सामने हुए दो गुट

वाराणसी। 23 सितम्बर को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सिंह द्वार पर हुए छात्राओं पर लाठीचार्ज का आक्रोश एक साल बीत जाने के बाद भी शांत नहीं हुआ है। इस बात के प्रमाण में कैम्पस लाठीचार्ज की बरसी मनाते हुए यूनिवर्सिटी के महिला महाविद्यालय की छात्राओं और उनका समर्थन करने वाले छात्रों ने परिसर के विश्वनाथ मंदिर पर नुक्कड़ सभा की। साथ ही महिला महाविद्यालय के गेट पर ओपन माइक सभा का भी आयोजन किया। ऐसे में लाजमी है कि माहौल फिर गरमा गया है और दो गुट एक बार फिर आमने-सामने हो गए हैं। दोनों गुटों के आमने-सामने होने की सूचना पर कैम्पस के सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज कर दोनों गुटों के छात्रों को तितर बितर किया।

23 सितम्बर को काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सिंह द्वार पर हुए छात्राओं पर लाठीचार्ज का आक्रोश एक साल बीत जाने के बाद भी शांत नहीं हुआ है। इस बात का प्रमाण में कैम्पस लाठीचार्ज की बरसी मनाते हुए कर यूनिवर्सिटी के महिला महाविद्यालय की छात्राओं और उनका समर्थन करने वाले छात्रों ने परिसर के विश्वनाथ मंदिर पर नुक्कड़ सभा की और महिला महाविद्यालय के गेट पर ओपन माइक सभा का भी आयोजन किया। ऐसे में लाजमी है कि माहौल फिर गरमा गया और दो गुटों के आमने सामने होने की सूचना पर कैम्पस के सुरक्षाकर्मियों ने लाठियां पीट दोनों गुटों के छात्रों को तितर बितर किया।

दूसरे गुट ने किया भद्दी भाषा का प्रयोग

लाठीचार्ज की बरसी मानने वाली छात्राओं का आरोप है कि बीते साल मुख्य द्वार पर पिटाई में अपना सांकेतिक विरोध दर्ज कराने वाली छात्राओं और छात्रों को इस बात का मलाल था कि उन्हें पिछले साल बेरहमी से पीटा गया था। इसी बात को लेकर हम लोग ने विश्वनाथ मंदिर पर नुक्कड़ सभा और महिला महाविद्यालय के गेट पर ओपन माइक डिबेट का आयोजन किया है। इस पूरे मामले पर मनीषा रॉय ने बताया कि जब हम लोगों ने अपना कार्यक्रम शुरू किया तो वहां वही लड़के आ गए। जो पिछले साल हमारा विरोध कर रहे थे। इन लोगों ने जय श्री राम और वन्दे मातरम न बोलने वालों को कैम्पस से बाहर होने की धमकी देते हुए भद्दी भद्दी बाते हमारे साथ के लड़कों के साथ करने लगे। यही नहीं दूसरे गुट के छात्रों ने एमएमवी गेट पर भी ओपन माइक डिबेट कार्यकम में हमारे सर्किल में घुस कर छात्रों को चैलेंज करने लगे। जिसके बाद मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने हमे गेट के अंदर कर लाठीचार्च कर उन छात्रों को भगाया। हालांकि मनीषा ने लाठीचार्ज की घटना से इनकार भी किया है।

चीफ प्रॉक्टर को भी झेलना पड़ा विरोध

दो गुटों के आमने सामने होने की सूचना पर एक बार फिर कैम्पस में सरगर्मी बढ़ गई। इस बात की जानकारी जब यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर रोयान सिंह को हुई तो वो अपने दल बल के साथ मौके पर पहुंच गईं। रोयान सिंह के आने से ही महिला महाविद्यालय के छात्राओं का गुस्सा और भड़क गया। सभी छात्राओं ने नारेबाजी के साथ अपने कार्यक्रम में दूसरे गुट पर माहौल खराब और सुरक्षा को लेकर उनका विरोध करना शुरू कर दिया। वहीं इस पूरे मामले पर रोयान सिंह का कहना है कि छात्राएं 23 सितम्बर 2017 की घटना को लेकर विरोध स्वरूप कविता सुना रही थीं। जिसके बाद दूसरे गुट के छात्र भी वहां पहुंचे और दोनों ओर से तेज आवाज में एक दूसरे के अगेंस्ट कविता सुनने का दौर शुरू हुआ। इस बात की जानकारी पर सुरक्षकर्मियों के साथ मौके पर पहुंच कर लोगों ने दोनो गुटों के छात्रों का मामला शांत करा उन्हें हॉस्टल भेज दिया।

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