UP की मुस्लिम बाहुल्य सीट कुंदरकी पर 1.38 लाख वोट से लहराया भगवा, मोहम्मद रिजवान को ये हार जिंदगी भर रहेगी याद
Kundarki chunav Result 2024: उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों में करारी हार झेलने के बाद, भाजपा को हाल ही में हुए विधानसभा उपचुनावों में जीत से बल मिला है, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए सकारात्मक खबर है।
भाजपा और उसके सहयोगी राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने नौ सीटों में से सात पर जीत हासिल की है, जबकि समाजवादी पार्टी (एसपी) ने बाकी दो सीटों पर बढ़त हासिल की है। इन नौ सीटों में से सबसे ज्यादा चर्चा में कुंदरकी विधानसभा सीट है। मुस्लिम बाहुल्य सीट कुंदरकी में भाजपा के उम्मीदवार ठाकुर रामवीर सिंह 1.33 लाख वोटों के अंतर से जीत रहे हैं। सपा उम्मीदवार हाजी रिजवान को अपनी ऐसी हार की उम्मीद नहीं थी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कुंदरकी में सपा की जमानत जब्त हो गई है।

कुंदरकी में मतदान लोकतंत्र नहीं, राजतंत्र नीति से हुआ: हाजी रिजवान
सोशल मीडिया पर कई लोग लिख रहे हैं कि सपा उम्मीदवार हाजी रिजवान को ये हार जिंदगी भर याद रहेगी। हालांकि चुनावी नतीजे आने के बाद उन्होंने आरोप लगाया है कि मुसलमानों को वोट डालने नहीं दिया गया है और मतदान में धांधली की गई। उन्होंने कहा है कि कुंदरकी सीट पर मतदान लोकतंत्र नहीं, राजतंत्र नीति से कराया गया था।
वहीं दूसरी ओर भाजपा के उम्मीदवार ठाकुर रामवीर सिंह ने अपनी जीत का श्रेय मुस्लिमों को दिया है। उन्होंने कहा है कि मुसलमानों ने ठान लिया था कि इस बार वो भाजपा को मौका देंगे। मुसलमानों ने धर्म-जाति से परे विकास के नाम पर भाजपा को वोट दिया है।
कुंदरकी सीट पर मुस्लिमों की संख्या?
कुंदरकी सीट पर कुल वोटर 3,80,000 है। इसमें से यहां 2,50,000 मुस्लिम वोटर हैं, वहीं हिंदू वोटरों की संख्या 1,2,0000 है। 10 हजार के आसपास अन्य हैं।
उत्तर प्रदेश उपचुनाव 2024: भाजपा किन 7 सीटों पर जीती और सपा किन 2 सीटों पर जीती?
भाजपा ने कुंदरकी, खैर, गाजियाबाद, फूलपुर, कटेहरी और मझवां विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की है। जबकि रालोद ने मीरापुर में जीत दर्ज की है। वहीं सपा ने करहल और सीसामऊ सीटों पर मजबूती दिखाई है।
इस सप्ताह की शुरुआत में हुए उपचुनावों को सभी प्रमुख दलों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा के रूप में देखा जा रहा था, जो अगले आम चुनावों से पहले जनता की भावनाओं का बैरोमीटर बन गया।
ये उपचुनाव अलग-अलग कारणों से जरूरी थे, जिनमें मौजूदा विधायकों के इस्तीफे और अयोग्यता शामिल हैं। भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन फिर से हासिल करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह राज्य उसकी राष्ट्रीय चुनावी रणनीति के लिए महत्वपूर्ण है। इस बीच, दो सीटों पर अपने गढ़ के बावजूद, सपा भाजपा-रालोद गठबंधन का मुकाबला करने के लिए अपने अभियान की प्रभावशीलता और गठबंधन का मूल्यांकन करेगी।












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