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Kedarnath Helicopter हादसे ने छीना पूरा परिवार, रुला देगी बिजनौर की तुष्टि और नानी विनोद देवी की कहानी

Kedarnath helicopter crash: उत्तराखंड की केदारनाथ यात्रा के दौरान एक भयावह हादसे ने बिजनौर के परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। रुद्रप्रयाग के गौरीकुंड क्षेत्र में रविवार सुबह हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही जान चली गई।

इस हादसे में बिजनौर निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मपाल सिंह की पत्नी विनोद देवी (66 वर्ष) और नातिन तुष्टि शामिल थीं। यह हादसा उस समय हुआ जब सभी तीर्थयात्री दर्शन के बाद गुप्तकाशी लौट रहे थे। हादसे की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।

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परिवार के अन्य सदस्य जिसमें धर्मपाल सिंह, पोता ईशान और नाती गौरांश एक अन्य हेलिकॉप्टर से यात्रा कर रहे थे। वे सकुशल गुप्तकाशी पहुंच गए, लेकिन विनोद देवी और तुष्टि वाला हेलिकॉप्टर देर तक नहीं लौटा तो चिंता गहरा गई।

एक परिवार, दो हेलिकॉप्टरों में बंटी यात्रा

धर्मपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने हेलिपैड पर आग्रह किया था कि पूरा परिवार एक साथ जाए, लेकिन कंपनी ने नियमों का हवाला देकर उन्हें अलग-अलग हेलिकॉप्टरों में भेजा। इसके बाद ही वे परेशान हो गए थे।

परिवार का कहना है कि गुप्तकाशी पहुंचने के बाद जब दूसरा हेलिकॉप्टर नहीं उतरा तो इंतजार बढ़ने लगा। बाद में खबर आई कि हेलिकॉप्टर गौरीकुंड और सोनप्रयाग के बीच दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। यह सुनते ही परिवार की उम्मीदें टूट गईं।

हादसे की पुष्टि होते ही बिजनौर में छाया मातम

धर्मपाल सिंह ने बताया कि शुरुआती समय में किसी ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। लेकिन कुछ घंटों बाद प्रशासन ने बताया कि सातों यात्रियों की जान चली गई है। विनोद देवी और तुष्टि की भी इसी हेलिकॉप्टर में थीं।

इधर, बिजनौर और नगीना स्थित घरों में जैसे ही यह खबर पहुंची, पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन रोते-बिलखते केदारनाथ के लिए रवाना हो गए। घर में हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है।

परिवार के लिए यह रिश्ता सिर्फ खून का नहीं, आत्मा का जुड़ाव था। धर्मपाल सिंह ने कहा कि तुष्टि उनकी आंखों की रोशनी थी। विनोद देवी के बिना पूरा घर अधूरा लगता है। यह खालीपन कभी नहीं भर पाएगा।

परिजनों ने बताया कि तुष्टि पढ़ाई में होशियार और बेहद चंचल थी और धार्मिक यात्रा से लौटकर अपनी सहेलियों को किस्से सुनाने का सपना संजोए थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। एक लम्हे ने सबकुछ छीन लिया।

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