VIDEO: मुजरिमों की रिहाई के लिए 5 हजार की घूस लेते दरोगा कैमरे में कैद

कानपुर। कानपुर पुलिस के एक एसएसआई और उसके साथी कॉस्टेबल द्वारा घूस लेने का मामला सामने आया है। इस पुलिसकर्मियों द्वारा चार मुजरिमों की रिहाई के बदले घूस लेने का लाइव वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कम्प मच गया है। जिले के एसएसपी ने पश्चिमी क्षेत्र के प्रभारी पुलिस अधीक्षक को जांच करने और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

kanpur asi caught on camera receiving bribe from criminals

योगी सरकार भले ही सूबे को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिये संकल्परत हो लेकिन इस वीडियो ने जीते जागते सबूत दे दिए हैं कि पुलिस महकमे के कुछ अधिकारी सरकार की मंशा के अनुरूप काम करने को तैयार नहीं है। इसका सबूत जनता के सामने है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में एक पुलिस अधिकारी दो युवकों से पांच हजार काम होने से पहले और बाकी का एक हजार काम होने के बाद देने की बात कहता है। ये काम इलाके में गुंडई व झगड़ा करने वाले चार मुजरिमों को रिहा करने का था।

इसके बाद पुलिस अधिकारी के कहने पर थाने के अन्दर एक कॉस्टेबल रूपये लेते दिखाई पड़ रहा है। उसके ठीक आगे यूपी पुलिस के लाल नीले निशान के साथ कानपुर पुलिस के मित्र व्यवहार को व्यक्त करने वाले स्लोगन वाली तख्ती लगी है जिसपर लिखा है - '' मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं।''

सोशल मीडिया पर इस वीडियो के बारे में जो चर्चा छिड़ी है, उसके अनुसार कुछ दिन पहले थाना चमनगंज क्षेत्र में आपसी मारपीट और गुण्डई करने के आरोप में चार दबंग युवक गिरफ्तार किये गये थे। पुलिस ने इनके पास से असलहा बारूद भी बरामद किया था लेकिन इसके बाद उन्हें छुड़ाने के लिए दलालों की मदद ली गई और थाने में बैठकर सौदेबाजी की गई। इसमें थाने के एसएसआई तनवीर ने मुजरिमों के खिलाफ कोई कार्रवाई न करने और रिहा करने के एवज में तमाम मोलभाव के बाद छह हजार में सौदा तय हुआ।

मुजरिमों की पैरवी में आए एक युवक ने पर्स से पैसे निकाल कर गिने और कुछ कम होने की बात कही। इसपर एसएसआई ने कहा कि पांच अभी दे दो। बाकी के एक हजार कल दे देना इसके बाद युवक ने पर्स से पैसे निकाल कर गिने और बगल में बैठे कॉस्टेबल कफील को थमा दिए। ये पैसे कॉस्टेबल की मुठ्ठी में जाकर गायब हो गए। ​इस बाबत जब कानपुर नगर के एसएसपी अखिलेश कुमार से उसका वर्जन जानना चाहा तो उन्होने मोबाईल फोन हाथ में लेकर पूरा वीडियो को देखा और इसकी जांच पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर को सौंप दी।

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